टिड्डी दल का बढ़ता प्रकोप, सरकार ने जारी किये दिशा निर्देश, ड्रोन से किया जाएगा कीटनाशकों का छिडकाव

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टिड्डी दल से बचाव के लिए उपाय

देश में टिड्डी कीट का प्रकोप राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के बाद अपना क्षेत्र बढ़ाते जा रहा है  | दिन प्रतिदिन यह यह दायरा बढ़कर अन्य राज्यों में पहुँच रहा है | अभी खरीफ फसल कि बुवाई शुरू भी नहीं हुई है लेकिन टिड्डी का आतंक इससे लगाया जा सकता है कि कई राज्यों में बाबुल  एवं अन्य पेड़ों को चंद मिनटों में खत्म कर दे रही है | पिछले कुछ दिनों राजस्थान से से लगते हुए मध्य प्रदेश के नीमच, मंदसौर रतलाम तथा उज्जैन जिलों में तेजी फैल रहा है |

राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं केंद्र  सरकार ने टिड्डी से बचाव तथा इसकी रोकथाम के लिए समुचित व्यवस्था कर रही है | मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने टिड्डी दल से होने वाले नुकसान को देखते हुए उक्त जिलों के किसानों को सलाह दी गयी है कि वे अपने स्तर पर समूह बनाकर खेतों में रात के समय निगरानी करे | शाम 7 से 9 बजे के बीच टिड्डी दल रात्री विश्राम के लिए कहीं भी बैठ सकता है, जिसकी पहचान एवं जानकारी के लिए स्थानीय स्तर पर दल का गठन कर सतत निगरानी रख कर किया जा सकता है |

टिड्डी कीट के प्रकोप से बचाने के लिए सरकार ने जारी किये दिशा निर्देश

पारंपरिक उपाय

जिन स्थानों ओअर भी टिड्डी दल का प्रकोप देखा जाये तत्काल स्थानीय प्रशासन ओर कृषि विभाग से संपर्क कर जानकारी दें | किसान भाई टोली बनाकर विभिन्न तरह के पारंपरिक उपाय जैसे शोर मचाकर, अधिक ध्वनी वाले यंत्रों को बजकर या पौधों कि दलों से अपने खेत से टिड्डी दलों को भगा सकते हैं |

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टिड्डी कीट को रोकने के रासायनिक उपाय

किसी क्षेत्र में शाम को टिड्डी दल का प्रकोप हेतु रासायनिक कीटनाशक दवायें अनुशंसित की गई हैं | किसान इन कीटनाशकों का उपयोग सुबह 3 बजे से 6 बजे तक तुरंत अनुशंसित कीटनाशी दवाएं का प्रकोप करें |

  • क्लोरपायरिफास 20 ई.सी. 1200 मिली
  • डेल्टामेथरिन8 ई.सी. 600 मिली
  • लेम्डासाईहेलोथ्रिन 5 ई.सी. 400 मिली

डाईफ्लूबिनज्युरान 25 डब्ल्यू.टी. 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में मिलाकर ट्रैक्टर चलित स्प्रे – पंप (पाँवर स्प्रेयर) द्वारा छिडकाव करें | टिड्डी दल के आक्रमण के समय यदि कीटनाशक दवा उपलब्ध ण हो तो ट्रैक्टर चलित पावर–स्प्रे के द्वारा तेज बौछार से भी दल को भगाया जा सकता है |

राजस्थान में किसानों को कीटनाशक पर शत प्रतिशत अनुदान

इस वर्ष पहली बार 11 अप्रेल को राज्य में टिड्डी दलों का प्रवेश हुआ था और अब तक जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर, अजमेर, पाली, बीकानेर, सिरोही एवं भीलवाड़ा जिलों में लगभग 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी का प्रभाव रहा है। यहां प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर भविष्य के लिए राज्य सरकार की ओर से योजनाबद्ध ढंग से प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। टिड्डियों के नियंत्रण एवं सर्वेक्षण के लिए 70 बोलेरो, 45 बोलेरो केम्पर यूटिलिटी वाहन, 600 ट्रेक्टर माउंटेड स्प्रेयर मय ट्रेक्टर एवं 3 हजार 200 ट्रेक्टर मय पानी के टैंकरों के उपयोग की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। वाहनों का किराये पर संचालन के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर पौध संरक्षण रसायन उपलब्ध कराने के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

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ड्रोन से भी होगा कीटनाशक छिड़काव

पिछले वर्ष  राजस्थान के 12 जिले टिड्डी से प्रभावित हुए थे, वहां के लिए काफी पहले ही कंटीनजेंसी प्लान तैयार कर लिया है। इस साल नए जिले जुड़ने की आशंका के कारण शेष जिले भी जिला कलक्टर से कंटीनजेंसी प्लान स्वीकृत कराकर मुख्यालय भिजवाएं। उन्होंने सोयाबीन बीज का उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए। टिड्डी नियंत्रण के लिए जहां गाड़ियां पहुंचने में मुश्किल होती है वहां ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी। 

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