उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना को मंजूरी: किसानों को ₹6 लाख तक का लोन 6% ब्याज पर, सरकार देगी ब्याज अनुदान

UP Mukhyamantri Krishak Samriddhi Yojana: लघु और सीमांत किसानों को 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन कृषि ऋण 6% वार्षिक ब्याज दर पर मिलेगा। सरकार 5% ब्याज अनुदान देगी। योजना के लिए 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की गई है।

UP Yogi Adityanath Cabinet Approval Krishak Samriddhi Yojana

उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए राज्य सरकार ने नई ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 15 सितंबर को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में योजना के लिए उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड को कुल 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

योजना के तहत पात्र लघु एवं सीमांत किसान 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन ऋण 6 प्रतिशत की रियायती वार्षिक ब्याज दर पर प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार किसानों को वितरित ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराएगी।

इस सस्ते ऋण का इस्तेमाल किसान कृषि और कृषि आधारित गतिविधियों में दीर्घकालीन पूंजी निवेश एवं परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए कर सकेंगे।

6 लाख तक का कृषि लोन 6% ब्याज पर

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का प्रमुख प्रावधान किसानों को कम ब्याज पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराना है। योजना के तहत प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों को अधिकतम 6 लाख रुपये तक का ऋण 6 प्रतिशत की रियायती वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।

वर्तमान व्यवस्था में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक को नाबार्ड से उच्च ब्याज दर पर पुनर्वित्त मिलने के कारण किसानों को ऋण 11 से 11.50 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है। नई योजना में सरकार द्वारा ब्याज अनुदान दिए जाने से पात्र किसानों के लिए ब्याज दर घटकर 6 प्रतिशत हो सकेगी।

सरकार कृषि ऋण पर देगी 5% ब्याज अनुदान

किसानों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा वितरित ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि इस ब्याज अनुदान का लाभ लेने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है।

5 प्रतिशत ब्याज अनुदान केवल उन्हीं ऋणी किसानों को मिलेगा, जो निर्धारित किस्तों का भुगतान नियत देय तिथि तक करेंगे। इसलिए योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए समय पर किस्त चुकाना महत्वपूर्ण होगा।

प्रदेश के 92% कृषक परिवारों को होगा बड़ा फायदा

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसान प्रदेश के कृषक परिवारों का करीब 92 प्रतिशत हैं। इसी बड़े किसान वर्ग को कम ब्याज दर पर दीर्घकालीन कृषि निवेश ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना लाई गई है।

योजना के माध्यम से किसान कृषि और उससे जुड़े कार्यों के लिए दीर्घकालीन परिसंपत्तियां तैयार कर सकेंगे। इससे उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के लिए 384 करोड़ मंजूर

योजना के तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक सहायता दी जाएगी। राज्य सरकार की ओर से कुल 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने को मंजूरी मिली है। इसमें किसानों के दीर्घकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान के साथ बैंक शाखाओं के आधुनिकीकरण और ब्रांडिंग के लिए सहायता शामिल है।

ब्याज अनुदान का प्रावधान पांच वर्षों के लिए रहेगा, जबकि बैंक शाखाओं के आधुनिकीकरण एवं ब्रांडिंग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2027-28 तक दो वर्षों की अवधि तय की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

योजना की घोषणा कब हुई थी?

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 दिसंबर 2025 को सहकारिता विभाग के ‘युवा सहकार सम्मेलन एवं यूपी कोऑपरेटिव एक्सपो-2025’ में की थी। अब 15 सितंबर को मंत्रि-परिषद की मंजूरी मिलने के बाद योजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

इसे राज्य सरकार के ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ लक्ष्य से भी जोड़ा गया है, जिसके तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश, स्वरोजगार और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

कृषि के साथ दूसरे कामों के लिए भी मिल सकेगा ऋण

योजना का उद्देश्य केवल मौसमी खेती के खर्च के लिए कर्ज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों को कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों में दीर्घकालीन निवेश करने में सक्षम बनाना है।

सरकार के अनुसार रियायती ब्याज पर ऋण मिलने से लघु एवं सीमांत किसान दीर्घकालीन परिसंपत्तियों का सृजन कर सकेंगे। इससे कृषि उत्पादकता और आय बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित छोटे उद्योग एवं व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। इन गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन देने का लक्ष्य है।

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