उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आलू उत्पादक किसानों के हित में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तीन महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। सरकार का उद्देश्य आलू की कीमतों में गिरावट, कोल्ड स्टोरेज में भंडारण की लागत और गुणवत्तापूर्ण आलू बीज की लागत से किसानों को राहत देना है।
इन योजनाओं के पारदर्शी एवं सुगम क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने 17 अगस्त को लखनऊ स्थित उद्यान भवन में नव विकसित ऑनलाइन पोर्टल potato-uphorticulture.in का शुभारंभ किया। सरकार के अनुसार इन योजनाओं के माध्यम से आलू किसानों को बाजार भाव, भंडारण और बीज—तीनों स्तरों पर आर्थिक सहायता मिलेगी।
आलू किसानों के लिए ₹1000 करोड़ का भाव स्थिरता कोष
आलू की बंपर पैदावार होने पर बाजार में कीमतों में गिरावट आ जाती है। ऐसे समय में किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। इस समस्या से राहत देने के लिए योगी सरकार ने 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की है। इसके लिए फिलहाल 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि का प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा आलू की उत्पादन लागत निर्धारित की जाएगी। किसानों को निर्धारित लागत के 25 प्रतिशत या उत्पादन लागत और बिक्री दर के अंतर, इनमें से जो राशि कम होगी, उतनी अनुदान राशि दी जाएगी।
प्रति किसान कितनी उपज पर मिलेगा लाभ?
भाव स्थिरता योजना में:
- प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लाभ मिलेगा।
- प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल आलू पर अनुदान अनुमन्य होगा।
- योजना से करीब 12 से 14 लाख किसान लाभान्वित होने की उम्मीद है।
- अनुदान की राशि आधार सीडेड DBT के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
आलू पर भाव गिरने पर किसानों को कैसे मिलेगा अनुदान?
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। किसान को योजना का लाभ लेने के लिए क्रेता-विक्रेता सौदा प्रपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आलू की बिक्री मंडी, उपमंडी, शीतगृह परिसर अथवा प्रक्षेत्र पर की जा सकेगी और पात्रता पूरी होने पर किसान योजना के तहत अनुदान का लाभ ले सकेंगे।
योजना की क्रियान्वयन अवधि
आलू भाव स्थिरता योजना के लिए क्रियान्वयन अवधि:
1 जनवरी से 15 अप्रैल तथा
1 जुलाई से 31 अक्टूबर
निर्धारित की गई है।
कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने पर ₹100 प्रति क्विंटल अनुदान
योगी सरकार ने निजी शीतगृहों में आलू भंडारित करने वाले किसानों के लिए भी बड़ी राहत दी है। प्रदेश में 2,363 निजी शीतगृहों में 173.03 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है। किसानों पर भंडारण प्रभार का बोझ कम करने के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत किसानों को ₹100 प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाएगा।
कोल्ड स्टोरेज भंडारण योजना में:
- अनुदान दर: ₹100 प्रति क्विंटल
- प्रति किसान अधिकतम लाभ: ₹20,000
- लाभार्थी: 15 लाख से अधिक किसान
- योजना के लिए टोकन धनराशि: ₹100 करोड़
इससे उन किसानों को सीधी राहत मिलेगी, जो आलू को तत्काल बाजार में बेचने के बजाय शीतगृह में सुरक्षित रखकर बेहतर भाव का इंतजार करते हैं।
आलू बीज खरीदने पर ₹1000 प्रति क्विंटल तक छूट
आलू किसानों की उत्पादन लागत कम करने के लिए सरकार ने आलू बीज विक्रय दर में छूट योजना भी लागू की है। इसके लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत विभागीय आधारीय आलू बीज खरीदने वाले किसानों को अधिकतम ₹1,000 प्रति क्विंटल तक की छूट दी जाएगी। इससे किसानों की प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी। सरकार के अनुसार इस योजना से 15 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।
आलू किसानों को तीन स्तर पर मिलेगा फायदा
योगी सरकार की तीनों योजनाओं का उद्देश्य आलू उत्पादन से जुड़े किसानों की अलग-अलग समस्याओं को दूर करना है।
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योजना |
किसानों को लाभ |
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भाव स्थिरता योजना |
बाजार भाव गिरने पर अनुदान |
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कोल्ड स्टोरेज भंडारण योजना |
₹100 प्रति क्विंटल, अधिकतम ₹20,000 |
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आलू बीज छूट योजना |
₹1,000 प्रति क्विंटल तक बीज पर छूट |
इस तरह सरकार ने आलू की बिक्री, भंडारण और उत्पादन लागत तीनों मोर्चों पर किसानों को राहत देने की व्यवस्था की है।
ऑनलाइन पोर्टल से होगा योजनाओं का क्रियान्वयन
तीनों योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। इसका उद्देश्य आवेदन और योजना से संबंधित प्रक्रिया को पारदर्शी, सुगम और डिजिटल बनाना है। आलू किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित पात्रता और आवश्यक प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भाव स्थिरता योजना के लिए ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
योगी सरकार का आलू किसानों पर फोकस
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार किसानों की आय, हित और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। तीनों योजनाओं के जरिए आलू किसानों को एक साथ कई स्तरों पर राहत देने का प्रयास किया गया है। बाजार में भाव गिरने पर अनुदान, कोल्ड स्टोरेज की लागत में सहायता और बेहतर गुणवत्ता वाले बीज पर छूट से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।