उत्तर प्रदेश में पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु या अन्य निर्धारित जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा देने के लिए नई राज्य योजना “मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना” को वित्तीय वर्ष 2026-27 में लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना में राज्य सरकार की 85 प्रतिशत और लाभार्थी पशुपालक की केवल 15 प्रतिशत सहभागिता प्रस्तावित है।
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में पशुधन विभाग और बीमा कंपनियों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में योजना के क्रियान्वयन, बीमा प्रीमियम, क्लेम प्रक्रिया और पशुपालकों को मिलने वाले कवरेज पर चर्चा की गई। मंत्री ने बीमा प्रीमियम को यथासंभव कम रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि अधिक से अधिक पशुपालक अपने पशुओं को बीमा सुरक्षा दे सकें।
पशुधन बीमा में सरकार की 85 प्रतिशत हिस्सेदारी
नई मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात राज्य सरकार और लाभार्थी की सहभागिता है। योजना में राज्य सरकार की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत और लाभार्थी की हिस्सेदारी केवल 15 प्रतिशत रखी जाएगी।
सरकार का प्रयास है कि पशुपालकों पर बीमा का आर्थिक बोझ कम रहे और ज्यादा से ज्यादा पशुओं को बीमा के दायरे में लाया जा सके। बैठक में बीमा कंपनियों से प्रीमियम की दर यथासंभव कम रखने के लिए भी कहा गया। पशुपालकों को बीमा के लिए 1 वर्ष, 2 वर्ष और 3 वर्ष की अवधि के विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुओं का निर्धारित अधिकतम मूल्य:
बैठक के दौरान अलग-अलग पशुओं के अधिकतम मूल्य को लेकर भी चर्चा हुई।
- वर्गीकृत नस्ल की भैंस: अधिकतम ₹75,000 तक मूल्यांकन।
- गाये (देशी/संकर): अधिकतम ₹65,000 तक मूल्यांकन।
- छोटे पशु (बकरी, भेड़, सुकर): अधिकतम ₹6,500 तक मूल्यांकन।
नंद बाबा दुग्ध मिशन की योजनाओं को प्राथमिकता
मंत्री धर्मपाल सिंह ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया कि डेयरी-उन्मुख और राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं को बीमा कवर में सबसे आगे रखा जाए। विशेष रूप से नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत संचालित निम्नलिखित योजनाओं के लाभार्थियों को प्राथमिकता मिलेगी:
- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: 02 स्वदेशी गायों का बीमा।
- मिनी नंदनी कृषक समृद्धि योजना: 10 स्वदेशी गायों का बीमा।
- नंदिनी कृषक समृद्धि योजना: 25 स्वदेशी गायों का बीमा।
बीमा कवरेज की सीमा और नियम:
- कवरेज लिमिट: एक परिवार के लिए अधिकतम 25 बड़े पशु इकाई (Large Animal Units) तक बीमा कवरेज का प्रावधान है।
- इकाई मानक: 1 बड़ा पशु (गाय/भैंस/भारवाहक) = 10 छोटे पशु (भेड़/बकरी/सुकर)।
बीमा क्लेम की प्रक्रिया सरल बनाने के निर्देश
सरकार ने केवल पशुओं का बीमा कराने के बजाय क्लेम मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। पशुधन मंत्री ने कहा कि अनावश्यक तकनीकी औपचारिकताओं के कारण वास्तविक बीमा दावों को अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। पात्र क्लेम का भुगतान समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही जनपद स्तर पर पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने और बीमा पॉलिसी से संबंधित जानकारी पशुपालकों को समय पर देने को कहा गया है।
गांव-गांव तक पहुंचाई जाएगी पशुधन बीमा योजना की जानकारी
योजना शुरू होने के बाद अधिक से अधिक पात्र पशुपालकों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से प्रचार करने के साथ मोबाइल वेटरनरी यूनिट की एंबुलेंस पर योजना के प्रमुख बिंदुओं वाले स्टीकर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य योजना की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाना है, ताकि कोई पात्र पशुपालक केवल जानकारी के अभाव में इसका लाभ लेने से वंचित न रहे।
हर महीने होगी योजना की समीक्षा
योजना लागू होने के बाद इसकी प्रगति की हर महीने शासन स्तर पर समीक्षा की जाएगी। पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग ने बीमा कंपनियों से कम प्रीमियम में बीमा सुविधा उपलब्ध कराने और पात्र पशुपालकों को बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर क्लेम दिलाने की अपेक्षा की है। सरकार के अनुसार योजना का उद्देश्य सिर्फ पशुओं का बीमा कराना नहीं, बल्कि पशुधन से जुड़े किसी संकट की स्थिति में पशुपालकों को वास्तविक आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।