उत्तर प्रदेश में पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से लम्पी स्किन डिजीज (LSD) के संभावित लक्षणों पर विशेष निगरानी रखने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि किसी पशु में बीमारी के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर उसे तत्काल अन्य पशुओं से अलग करें और संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।
विभाग के अनुसार समय पर बीमारी की पहचान और आवश्यक नियंत्रण उपाय पशुधन को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करें और बीमारी के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
लम्पी स्किन डिजीज (LSD) के मुख्य लक्षण
यदि पशुओं में निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत गंभीरता से लें:
- त्वचा पर बदलाव: पशु की पूरी त्वचा पर गोल, कठोर और उभरती हुई गांठें (Lumps) बनना।
- तेज बुखार: पशु को लगातार तेज बुखार रहना और शरीर में अत्यधिक कमजोरी आना।
- शारीरिक सूजन: पशु के पैरों, गले और शरीर के निचले हिस्सों में सूजन आ जाना।
- स्राव और लार: आँख और नाक से पानी/स्राव गिरना तथा मुँह से अत्यधिक लार बहना।
- उत्पादन में गिरावट: पशु की भूख में अचानक कमी आना, चलने–फिरने में कठिनाई होना और दूध उत्पादन का तेजी से गिरना।
संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत करें ये 4 काम
- पशु को अलग करें: बीमारी के लक्षण दिखते ही प्रभावित पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग (Isolate) कर दें।
- खुद से इलाज न करें: बिना किसी मान्यता प्राप्त पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) की सलाह के किसी भी प्रकार का देसी या मनमाना इलाज शुरू न करें।
- निकटतम केंद्र को सूचित करें: तत्काल अपने जनपद के विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) कार्यालय या नजदीकी पशु चिकित्सालय में सूचना दें।
- टोल–फ्री हेल्पलाइन पर कॉल करें: पशुपालक विभाग के टोल–फ्री नंबर 1800180141 पर कॉल करके तुरंत जानकारी दे सकते हैं।
सूचना मिलने पर विभाग करेगा तुरंत कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, सूचना प्राप्त होते ही पशु चिकित्सा टीमों द्वारा प्रभावित स्थल पर पहुंचकर जाँच, सटीक उपचार और रोग–नियंत्रण (Disease Control) की आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
विभाग ने सभी पशुपालकों से आग्रह किया है कि वे अपने मवेशियों के स्वास्थ्य पर नियमित नज़र रखें और किसी भी संदिग्ध लक्षण को बिल्कुल भी नज़रअंदाज न करें।