मध्य प्रदेश में किसानों के लिए संचालित उद्यानिकी, संरक्षित खेती, फसल बीमा, खाद्य प्रसंस्करण और कोल्ड चेन से जुड़ी 8 योजनाएं अगले पांच वर्षों तक जारी रहेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में इन योजनाओं की निरंतरता के लिए 491 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दी गई है।
ये योजनाएं 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालित की जाएंगी। इसके अलावा उज्जैन, सिंगरौली और अशोकनगर की सिंचाई परियोजनाओं के लिए भी 2,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं से कुल मिलाकर 1.27 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
मंत्रि-परिषद की बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कुल 42 हजार 490 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
किसानों के लिए उद्यानिकी की 8 योजनाओं पर खर्च होंगे ₹491 करोड़
मंत्रि-परिषद ने उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की आठ प्रमुख राज्य पोषित योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की स्वीकृति दी है। इन योजनाओं के लिए कुल 491 करोड़ रुपये का वित्तीय आकार मंजूर किया गया है। इनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र और गुणवत्ता बढ़ाना तथा खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।
फल पौध रोपण और मसाला खेती के लिए ₹100-100 करोड़
स्वीकृत राशि में सबसे बड़ा प्रावधान फल पौध रोपण और मसाला क्षेत्र विस्तार योजना के लिए किया गया है। दोनों योजनाओं के लिए अलग-अलग 100 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा संरक्षित खेती प्रोत्साहन योजना के लिए 85 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे फल, मसाला और संरक्षित खेती से जुड़ने वाले किसानों के लिए इन योजनाओं की निरंतरता बनी रहेगी।
फसल बीमा और फूड प्रोसेसिंग के लिए ₹53-53 करोड़
किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से सुरक्षा देने के उद्देश्य से संचालित फसल बीमा योजना के लिए 53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसी तरह खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के लिए भी 53 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
प्रदेश में एकीकृत शीत श्रृंखला यानी कोल्ड चेन अधोसंरचना विकसित करने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषक प्रशिक्षण और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए अलग-अलग 25-25 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
65 हजार हेक्टेयर में सिंचाई के लिए चितावद परियोजना
किसानों के लिए कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसलों में सिंचाई परियोजनाएं भी शामिल हैं। उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के पास क्षिप्रा नदी पर स्थित चितावद वृहद सिंचाई परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 1,846 करोड़ 5 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के तहत बांध का निर्माण कर संचित जल से करीब 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
सिंगरौली में 34,500 हेक्टेयर के लिए सिंचाई सुविधा
सिंगरौली जिले की गौंड वृहद सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए कैबिनेट ने 749 करोड़ 62 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य बांध निर्माण और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से जिले के करीब 34 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है।
चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना भी रहेगी जारी
अशोकनगर जिले में स्थित चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना को भी वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 11 करोड़ 49 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। परियोजना के माध्यम से करीब 28 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
इस तरह इन तीनों सिंचाई परियोजनाओं से संयुक्त रूप से 1 लाख 27 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
MARKFED को मिलेगा ₹2,220.62 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण
मंत्रि-परिषद ने मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) से जुड़ा भी एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रबी विपणन वर्ष 2024-25 के खाद्यान्न साख-सीमा ऋण की शेष 2,220.62 करोड़ रुपये की राशि का 30 सितंबर 2026 तक पुनर्भुगतान सुनिश्चित करने के लिए मार्कफेड को इतनी ही राशि का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। ऋण की राशि राज्य की नकद तरलता और राजकोषीय घाटे की सीमा को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध कराई जाएगी।
किसानों को इन क्षेत्रों में मिलता रहेगा योजनाओं का लाभ
उद्यानिकी विभाग की योजनाओं को पांच वर्षों तक जारी रखने के फैसले से प्रदेश में फल पौध रोपण, मसाला खेती, संरक्षित खेती, फसल बीमा, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन और कृषक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों को निरंतरता मिलेगी।
योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और नियम जारी करने के लिए संबंधित विभाग को अधिकृत किया गया है। इसलिए किसानों को मिलने वाले विशिष्ट अनुदान, पात्रता और आवेदन संबंधी शर्तें संबंधित योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित होंगी।