उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार/UPCAR) के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप वर्ष 2026-27 की सातवीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के मौसम की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों के लिए आगामी दो सप्ताह (4 से 17 सितंबर 2026) के लिए कृषि प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देश और महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए गए हैं।
दो सप्ताह का मौसम पूर्वानुमान (4 से 17 सितंबर 2026)
पहला सप्ताह (4 से 10 सितंबर 2026): प्रदेश के अधिकांश कृषि जलवायु अंचलों में औसत साप्ताहिक वर्षा सामान्य या सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। भाभर तराई, दक्षिण-पश्चिम अर्धशुष्क मैदान के पश्चिमी भाग, मध्य-पश्चिमी और पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से आंशिक अधिक रहने, जबकि अन्य अंचलों में सामान्य से आंशिक कम रहने का अनुमान है।
दूसरा सप्ताह (11 से 17 सितंबर 2026): इस दौरान प्रदेश के उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जबकि शेष अंचलों में बारिश सामान्य या सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
किसानों के लिए फसल प्रबंधन की मुख्य सलाह
- सिंचाई व कीटनाशक स्थगित रखें: भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए खरीफ फसलों में जल निकासी (Drainage) की समुचित व्यवस्था करें। फिलहाल सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव रोक दें।
- धान की फसल में नमी प्रबंधन: जिन क्षेत्रों में कम वर्षा हुई है, वहां धान में कल्ले और गांठ बनने की अवस्था में खेत में नमी बनाए रखें, ताकि जमीन में दरारें न पड़ें।
- कम पानी वाली सब्जियों की बुवाई: पर्याप्त वर्षा से वंचित क्षेत्रों के किसान कम अवधि व कम पानी वाली सब्जियों जैसे— पालक, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, मेथी और धनिया की खेती करें।
- पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण: अधिक तापमान और नमी के कारण कीट-रोगों का खतरा बढ़ता है। इसके लिए प्रकाश प्रपंच (Light Trap), बर्ड पर्चर, फेरोमोन ट्रैप और ट्राइकोडर्मा जैसे पर्यावरण-अनुकूल उपायों का प्रयोग करें। मौसम साफ और हवा स्थिर होने पर ही कीटनाशक का प्रयोग करें।
पशुपालकों के लिए भी जारी हुई महत्वपूर्ण सलाह
मौसम को देखते हुए पशुपालकों को पशुओं में बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से आवश्यक दवाओं का इस्तेमाल करने को कहा गया है। इसके अलावा पशुपालक अपने जनपद के पशु चिकित्सालय से खुरपका-मुंहपका (FMD) तथा गोवंशीय पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज (LSD) से बचाव के लिए चल रहे निःशुल्क टीकाकरण का लाभ ले सकते हैं।
मछली पालकों के लिए मत्स्य बीज संचय का अनुकूल समय
वर्तमान मौसम को मत्स्य संचय के लिए अनुकूल बताया गया है। मत्स्य पालकों को उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों से कतला, रोहू, नैन और ग्रास कॉर्प प्रजातियों के मत्स्य बीज का संचय करने की सलाह दी गई है।
आपदा से जनहानि पर 4 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान
एडवाइजरी में अधिसूचित आपदाओं के कारण जनहानि होने की स्थिति में पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की अहैतुक सहायता दिए जाने के प्रावधान का भी उल्लेख किया गया है। किसी आपात स्थिति में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम के 1070 और जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम के 1077 नंबर पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
17 सितंबर तक किसान मौसम देखकर ही करें कृषि कार्य
अगले दो सप्ताह के पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात स्थानीय मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाना है। अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में जल निकासी पर ध्यान देना होगा, जबकि कम वर्षा वाले इलाकों में विशेष रूप से धान की फसल में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है।
साथ ही अधिक तापमान और नमी के कारण संभावित कीट-रोगों की नियमित निगरानी करने तथा बिना आवश्यकता के कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है।