मशरूम की खेती से जुड़े कुछ सवाल एवं उनके जबाव

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मशरूम की खेती सवाल एवं उनके जबाब

समय समय पर किसान भाई मशरूम उत्पादन को लेकर कई सवाल करते हैं | किसानों के मन में मशरूम की खेती को लेकर कई शंकाएं रहती हैं जिन्हें दूर करने के लिए किसान समाधान किसानों के द्वारा पूछे गए सामान्य सवालों एवं उनके जबाब लेकर आया है | 

मशरूम की खेती कहाँ की जा सकती है ?

हां, मशरूम कहीं भी पैदा की जा सकती है बशर्ते वहां का तापमान तथा आर्द्रता जरूरत के अनुसार हो। मशरूम की अलग अलग किस्में होती हैं जिनकी खेती वर्ष भर की जा सकती है | मशरूम एक पौष्टिक गुणों से भरपूर प्राकृतिक प्रदत्त फसल है , जो बिना भूमि (उपजाऊ भूमि), कम रासायनिक खाद का उपयोग कर कम समय में कृषि अवशेषों पर उत्पादन किया जा सकता है | इसका उत्पदान एक कमरे / झोपडी में भी की जा सकती है | इसके अतिरिक्त मशरूम उत्पादन रोजगारोन्मुखी एवं प्रदूषण रहित है |

मशरूम के लिए कौन सी जलवायु उपयुक्त है?

मशरूम एक इंडोर फसल है। फसल के फलनकाय के समय तापमान 14-18°सेल्सियस व आर्द्रता 85 प्रतिशत रखी जाती है। तापक्रम के अनुसार मुख्यत: 03 प्रकार के मशरूम की खेती विभिन्न तापक्रमों पर उगाकर वर्ष भर भर मशरूम की खेती की जा सकती है | उदहारण स्वरूप ओयस्टर मशरूम (न्यूनतम 20 डिग्री एवं अधिकतम 30 डिग्री) | बटन मशरूम (न्यूनतम 15 डिग्री एवं अधिकतम 20 डिग्री फसल उत्पादन हेतु एवं बुआई के समय न्यूनतम 20 डिग्री एवं अधिकतम 25 डिग्री) तथा दुधिया मशरूम (न्यूनतम 30 डिग्री एवं अधिकतम 35 डिग्री) पर उगाया जा सकता है | 

उर्वरक की आवश्यकता ?

गेहूँ/पुआल की तूड़ी/मुर्गी की बीठ/गेहूँ की चैकर, यूरिया तथा जिप्सम का मिश्रण तैयार करके तैयार खाद पर मशरूम  उगाई जाती है। खुम्ब का बीज (स्पॅन) गेहूँ के दानों से तैयार किया जाता है।

मशरूम  की खेती के लिए कौन सी सामान्य आवष्यकता पड़ती है?

मशरूम  एक इंडोर फसल होने के कारण इसके लिए नियंत्रित तापमान और आर्द्रता की आवष्यता पड़ती है। (तापमान 14-18°सेल्सियस व आर्द्रता 85 प्रतिषत रखी जाती है। )

शाकाहारी अथवा मांसाहारी?

मशरूम एक शाकाहारी फसल है, मशरूम पौष्टिक होते हैं, प्रोटीन से भरपूर होते हैं, रेषा व फोलिक एसिड सामग्री होती है जो आमतौर पर सब्जियों व अमीनो एसिड में नहीं होती व मनुष्य के खाने योग्य अन्न में अनुपस्थित रहती है।

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 बाजार क्षमता क्या है?

मशरूम की खेती विश्व के 100 से अधिक देशों में की जाती है | इसका उत्पादन विश्व में 40 मिलियन मीट्रिक टन का है | चीन मशरूम उत्पादक देश में 33 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ अग्रिम स्थान रखता है , जो विश्व के कुल उत्पादन के 80 प्रतिशत से भी अधिक है | भारत में मशरूम का उत्पादन 2.10 लाख मीट्रिक टन है | जो दुनियाभर में उत्पादन का बहुत ही कम है जिससे यह कहा जा सकता है की भारत में मशरूम की बाजार में सम्भावना बहुत अधिक है | मशरूम अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं व अब इसकी बाजार संभावनाएं बढ़ गई है। श्वेत बटन खुम्ब ताजे व डिब्बा बंद अथवा इसके सूप और आचार इत्यादि उत्पाद तैयार कर बेचे जा सकते हैं। ढींगरी मशरूम सूखाकर भी बेचे जा सकते हैं।

क्या मशरूम में मक्खियों से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है?

आप स्क्रीनिंग जाल दरवाजे और कृत्रिम सांस के साथ नायलोन अथवा लोहे की जाली (35 से 40 आकार की जाली), पीले रंग का प्रकाष व मिलाथीन अथवा दीवारों पर साईपरमेथरीन की स्प्रे से मक्खियों छुटकारा पा सकते हैं।

प्रशिक्षण कहाँ मिलेगा ?

देश के राज्यों में कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से सरकार द्वारा प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है जिसमें अलग-अलग समय पर मशरूम उत्पादन सम्बंधित अलग-अलग विषयों पर विशेषज्ञों के द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है | इसके आलवा इच्छुक व्यक्ति अपने जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं | आप प्रशिक्षण के लिए देश भर में स्थित कृषि विश्वविद्यालयों की जानकारी दी गई लिंक पर देख सकते हैं | https://kisansamadhan.com/do-you-want-to-cultivate-mushrooms-if-yes-then-this-information-will-be-very-useful-for-you/

कौन-कौन से उत्पाद मशरूम से तैयार किए जा सकते हैं?

आप मशरूम से आचार, सूप पाउडर, केंडी, बिस्कुट, बड़िया, मुरब्बा इत्यादि उत्पाद तैयार कर सकते हैं। खाद्य प्रसंस्करण में मशरूम के उत्पाद तैयार करने के लिए व्यक्ति प्रशिक्षण ले सकते हैं | 

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क्या सरकार मशरूम  उत्पादन इकाई लगाने के लिए वित्तीय सहायता/सब्सिडी प्रदान करती है?

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के माध्यम से सरकार के द्वारा मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजना चलाई जा रही है | जिसके तहत अलग-अलग राज्य सरकारों के द्वारा किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए सब्सिडी दी जाती है | इच्छुक व्यक्ति अपने जिले के उधानिकी विभाग या कृषि विभाग से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं |  बैंक मशरूम उत्पादन इकाई, स्पाॅन उत्पादन इकाई और खाद बनाने की इकाई लगाने के लिए ऋण भी प्रदान करते हैं।

खाने की मशरूम कितने प्रकार के होते है?

श्वेत बटन खुम्ब, ढींगरी खुम्ब, काला चनपड़ा मशरूम , स्ट्रोफेरिया खुम्ब, दुधिया मशरूम , षिटाके इत्यादि कुछ खाने की मषरूमें हैं जो कि कृत्रिम रूप से उगाई जा सकती है। खाने वाली गुच्छी मशरूम  हिमाचल प्रदेश , जम्मू व कश्मीर तथा उत्तराखंड के ऊँचें पहाड़ों से एकत्रित की जाती है ।

क्या मशरूम में बीमारियां लगती हैं?

हाँ, अन्य फसलों की तरह ही मशरूम की फसल में कई प्रकार के रोग लगते हैं | इसकी जानकारी मशरूम उत्पादक को होना जरुरी है | मशरूम में होने वाले रोग इस प्रकार है :-

  • गीला बुलबुला रोग
  • सुखा बुलबुला रोग
  • हरा फफूंद रोग
  • जाला रोग
  • जैतूनी हरा फफूंद
  • बैक्टीरियल ब्लोच रोग
प्रतिस्पर्धी फफूंद
  • आभासी ट्रफल
  • पीला फफूंद
  • भुरालेप फफूंद
  • इंक केप
मशरूम की मक्खियाँ और सूत्र कृमि
  • फोरिड मक्खी
  • सेसिड मक्खी
  • सियारिड मक्खी

मशरूम की खेती से कितनी आय प्राप्त की जा सकती है ? 

यदि 2000 वर्ग फीट में तीनों मशरूम की खेती साल भर की जाये तो 50 – 60 क्विंटल मशरूम प्राप्त करके 30 – 35 हजार रूपये प्रति माह आमदनी प्राप्त की जा सकती है | इसके अलावा एक तरफ मशरूम खाने से कुपोषण दूर होता है तथा दूसरी तरफ आय का प्रमुख स्त्रोत है | इसके अलावा शिटाके मशरूम एवं हेरेशियम मशरूम की प्रजातियों में विभिन्न औषधीय गुण भी पाये जाते हैं |

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