क्या आप मशरूम की खेती करना चाहते हैं ? यदि हाँ तो यह जानकारी आपके बहुत काम आएगी

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mushroom ki kheti ki jankari

मशरूम की खेती हेतु महत्वपूर्ण जानकारी

मशरूम के प्रोटीन और औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इसकी मांग बढती जा रही है | जिसे लेकर देश भर में मशरूम की खेती का क्षेत्रफल तथा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है | कम समय तथा कम स्थान में अधिक उपज के साथ मुनाफा देने के कारण मशरूम की खेती किसानों के लिए लाभाकरी साबित हो रही है लेकिन मशरूम से जुड़े कई प्रकार की जानकारियों के नहीं होने के कारण या जानकारी के आभाव में किसान मशरूम उत्पादन कर नहीं पा रहे हैं | किसान समाधान मशरूम से जुड़े सभी सवालों का जवाब लेकर आया है जो अक्सर मशरूम उत्पादन के लिए यह सवाल पूछे जाते हैं |

मशरूम की कितनी प्रजातियाँ होती हैं ?

विश्वभर में मशरूम की लगभग 14,000 से अधिक प्रजातियां पायी जाती है, जिनमें से 3,000 खाने योग्य तथा 300 के लगभग औषधीय गुणों से युक्त हैं | पोषण एवं औषधीय मूल्यों के साथ–साथ आय का बेहतरीन स्रोत होने के कारण, मशरूम की 100 से अधिक देशों में खेती की जा रही है | भारत में भी कई प्रजाति के मशरूम की खेती की जा रही है, इनमें से कुछ मशरूम की प्रजाति प्रमुख है | जो इस प्रकार है :-

  • बटन मशरूम
  • ढिंगरी मशरूम
  • पुआल मशरूम
  • दुधिया मशरूम
  • शिटाके मशरूम

मशरूम का देश तथा विश्व में कुल कितना उत्पादन कितना होता है ?

मशरूम की खेती विश्व के 100 से अधिक देशों में की जाती है | इसका उत्पादन विश्व में 40 मिलियन मीट्रिक टन का है | चीन मशरूम उत्पादक देश में 33 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ अग्रिम स्थान रखता है , जो विश्व के कुल उत्पादन के 80 प्रतिशत से भी अधिक है | भारत में मशरूम का उत्पादन 2.10 लाख मीट्रिक टन है | विश्वभर में मशरूम की उपलब्धता प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 2–3 किलोग्राम जबकि चीन में 20–22 किलोग्राम है | भारत में मशरूम का सेवन प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 80–90 ग्राम है जो दुनियाभर के देशों की तुलना में बहुत कम है | जिससे यह कहा जा सकता है की अभी भारत में मशरूम के बाजार की काफी उपलब्धता है | 

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मशरूम की उन्नत किस्में कौन–कौन सी है ?

अलग–अलग प्रजाति के मशरूम के लिए अलग–अलग किस्में होती हैं | यह सभी किस्मों में जलवायु के आधार पर तथा उत्पादन में अन्तर पाया जाता हैं | मशरूम की खेती के लिए यह जरुरी ही की मशरूम की किस्मों की जानकारी होना चाहिए | मौसम के अनुसे मशरूम की खेती वर्ष भर की जा सकती है | मौसम के अनुसार मशरूम की खेती के लिए क्लिक करें

  1. सफेद मशरूम की किस्में

डीएमआर – बटन – 03, यू3 – 54

  1. ब्राउन बटन मशरूम की किस्में

डीएमआर–बटन – 06

  1. सफेद बटन मशरूम की किस्में

एनबीएस–1 और एनबीएस – 5

  1. धान के पुआल मशरूम की किस्में

डीएमआरओ–247 और डीएमआरओ–484

  1. शिटाके मशरूम की किस्में

डीएमआरओ–38 और डीएमआरओ–388

  1. दुधिया मशरूम की किस्में

डीएमआरओ – 334

  1. मैक्रोसाइबी मशरूम की किस्में

डीएमआरओ – मैक्रोसाइब – 01

भारत में कौन सी विशेष प्रजाति के मशरूम पाए जाते हैं ?

ये ऐसे मशरूम होते हैं, जो किसी विशेष क्षेत्र या देश में कम प्रचलित होते हैं | इनमें कुछ न कुछ अलग विशेषताएं होती है | दुनिया भर में कई विशेष मशरूम प्रजातियाँ पाई जाती है, लेकिन निम्नलिखित मशरूम की किस्मों को इसके तहत समूहीकृत किया जा सकता है | इसकी प्रजातियाँ इस प्रकार है :-

  1. प्लूरोटस एरंगी :- इस मशरूम की पोषाहार लकड़ी का बुरादा या गेहूं की भूसा होता है |
  2. फ्लेमुलिना वेलुटिप्स :- लकड़ी का बुरादा या गेहूं का भूसा इस मशरूम की पोषाहार होता है |
  3. एग्रोसीबे एगरिटा :- इस मशरूम की पोषाहार लकड़ी का बुरादा होता है |
  4. गनोडर्मा :- इस मशरूम की पोषाहार लकड़ी का बुरादा होता है |
  5. कार्डिसेप्स मिलिट्रिस :- लैब मिडिया में इसका उत्पादन किया जाता है |

मशरूम की खेती कितने प्रकार से की जाती है ?

मशरूम की खेत भारत में मुख्यत: तीन प्रकार से की जाती है | यह तीनों प्रणालियों में अलग – अलग प्रकार के मशरूम की खेती किया जाता है | यह तीनों प्रणाली इस प्रकार है :-

  • शैल्फ प्रणाली
  • पत्तियों की प्रणाली
  • पाँलीथिन बैग प्रणाली

इन तीनों प्रणाली में शैल्फ सबसे पुरानी समझी जाती है तथा ट्रे-प्रणाली बाहर के देशों में अब अधिक प्रचलित हो गई है |

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मशरूम में कितने प्रतिशत प्रोटीन या अन्य तत्व रहते हैं ?

मशरूम कई प्रकार के तत्व से बना है जिसमें प्रोटीन के साथ–साथ कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा पानी के अलावा अन्य पदार्थ रहते हैं जो शरीर के लिए काफी लाभदायक रहता है |

मशरूम की संरचना
  • पानी – 85 – 90 प्रतिशत
  • शुष्क पदार्थ – 10 प्रतिशत
  • वसा – 0.6 प्रतिशत
  • प्रोटीन – 2.5–3.0 प्रतिशत
  • कार्बोहाइड्रेट – 4 – 6 प्रतिशत
  • रेशा – 1.0 प्रतिशत
  • राख – 1.0 प्रतिशत

मशरूम की प्रशिक्षण (Training) कहाँ से प्राप्त कर सकते हैं ?

मशरूम का प्रशिक्षण देश के अलग–अलग राज्यों के केन्द्रीय विश्वविध्यालय के साथ ही राज्य विद्यालय में भी दिया जाता है इसके अतिरिक्त जिला स्टार पर इच्छुक व्यक्ति अपने जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं | किसान समाधान मशरूम पर दिये जाने वाले प्रशिक्षण केन्द्रों की जानकारी लेकर आया है |

भारतीय कृषि अनुसंधान आधारित प्रशिक्षण केंद्र
  1. भारतीय कृषि अनुसंधान प्रशिक्षण अनुसंधान प्रसार के उत्तर पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए, उमराओ सडक, वारापानी, मेघालय – 791013
  2. खुम्ब उत्पादन तकनीकी प्रषिक्षण खुम्ब अनुसंधान निदेषालय, चम्बाघाट, सोलन (हिमाचल प्रदेश)-173213
  3. बागवानी व कृषि वानिकी अनुसंधान कार्यक्रम (हार्प), प्लांडु, टाटा सडक, पी.यु. राजुलाटु, वाया नामकुम, रांची – 834010, झारखण्ड |
राज्य कृषि विश्वविध्यालय आधारित केंद्र
  1. पंजाब कृषि विश्वविध्यालय, लुधियाना – 141004 (पंजाब)
  2. तमिलनाडु कृषि विश्वविध्यालय, कोम्युटूर – 641003 (तमिलनाडु)
  3. मध्य प्रदेश कृषि विश्वविध्यालय, राहरी, पुणे – 4137१२ (महाराष्ट्र)
  4. गोबिंद वल्लभ पन्त कृषि व तकनीकी विश्वविध्यालय, पंतनगर – 263145
  5. इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविध्यालय, कृषिक नगर, रायपुर
  6. नारायण देव कृषि व तकनीकी विश्वविध्यालय, फेजाबाद – 29 (उत्तर प्रदेश)
  7. केरल कृषि विश्वविध्यालय, वलयानी, त्रिचुर, केरल
  8. महाराणा प्रताप कृषि व तकनीकी विश्वविध्यालय, उदयपुर – 313001
  9. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविध्यालय, हिसार – 125004 (हरियाण)
  10. उड़ीसा कृषि विश्वविध्यालय, भुवनेश्वर – 751003 (उड़ीसा)
  11. राजेन्द्र कृषि विश्वविध्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार
  12. केन्द्रीय कृषि विश्वविध्यालय, पासीघाट – 79112, (अरुणाचल प्रदेश)
सहकारिता केंद्र
  1. डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविध्यालय, नौणी, (सोलन)
  2. हरियाणा एग्रो – इंडस्ट्रीयल कारपोरेशन अनुसन्धान एवं विकास केंद्र, मुरथल, सोनीपत, (हरियाणा)

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