फसलों को दीमक से कैसे बचाएं

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फसलों को दीमक से कैसे बचाएं

दीमक पोलीफेगस कीट होता है ,यह सभी फसलो को बर्बाद करता है | भारत में फसलों को करीबन 45 % से ज्यादा नुकसान दीमक से होता है। वैज्ञनिकों के अनुसार दीमक कई प्रकार की होती हैं। दीमक भूमि के अंदर अंकुरित पौधों को चट कर जाती हैं। कीट जमीन में सुरंग बनाकर पौधों की जड़ों को खाते हैं। प्रकोप अधिक होने पर ये तने को भी खाते हैं। इस कीट का वयस्क मोटा होता है, जो धूसर भूर रंग का होता है और इसकी लंबाई करीब भ्.भ्म् मिलीमीटर होती है। इस कीट की सूड़ियां मिट्टी की बनी दरारों अथवा गिरी हुई पत्तियों के नीचे छिपी रहती हैं। रात के समय निकलकर पौधो की पत्तियों या मुलायम तनों को काटकर गिरा देती है। आलू के अलावा टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूल गोभी, पत्ता गोभी, सरसों, राई, मूली,गेहू आदि फसलो को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। इस कीट के नियंत्रण के लिए समेकित कीट प्रबंधन को अपनाना जरूरी है |

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दीमक की रोकथाम :

दीमक से बचाव के लिए खेत में कभी  भी कच्ची गोबर नहीं डालनी चाहिए। कच्ची गोबर दीमक का प्रिय भोजन होता है |

  1. बीजों को बिवेरिया बेसियाना फफूंद नाशक से  उपचारित किया जाना चाहिए। एक किलो बीजों को 20 ग्राम बिवेरिया बेसियाना फफुद नाशक से उपचारित करके बोनी चाहिए |
  2. 2 किग्रा सुखी नीम की बीज को कूटकर बुआइ से पहले 1 एकड़ खेत में डालना चिहिए |
  3. नीम केक 30 किग्रा /एकड़ में बुआइ से पहले खेत में डालना चिहिए |
  4. 1 किग्रा बिवेरिया बेसियाना फफूंद नासक और 25 किग्रा गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर बुआइ से पहले खेत में डालना चिहिए |
  5. 1 किग्रा/एकड़ बिवेरिया बेसियाना फफूंद नासक को आवश्यकतानुसार पानी में घोलकर मटके में भरकर ,निचले हिस्से में छिद्र करके सिचाई के समय देना चाहिए |

दीमक नि‍यंत्रण के लि‍ए रासायनिक दवा :

  1. लिंडेन पाउडर 1 किग्रा /10 लीटर पानी में घोलकर 1 एकड़ खेत में बुआइ से पहले करना चाहिए |
  2. एक किलो बीजों को चार मिलीलीटर क्लोरोपाइरीफास दवा से उपचारित किए जा सकते हैं |
  3. दीमक को नियंत्रित करने के लिए दो लीटर क्लोरोपाइरीफास दवा को 4 किलो रेत में मिलाकर प्रति हैक्टैयर बुवाई के समय खेत में डालना होता है |
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इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बुवाई करने से पहले पिछली फसल के अवशेषों को एकत्रित कर नष्ट करना बेहतर होता है |

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