पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार किसानों से खरीदेगी गोबर

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पशुपालकों से गोबर खरीदी

पशुपालक एवं किसानों को दूध के सही दाम नहीं मिल पाते हैं | ऐसे में किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है इसके लिए सरकार के द्वारा कई योजनाओं का क्रियान्वन भी किया जा रहा है | इन सब योजनाओं में छत्तीसगढ़ राज्य की योजना कुछ हट कर है | यहाँ पर अब राज्य सरकार पशुपालकों से गोबर खरीदेगी | इसके लिए राज्य सरकार ने राज्य में गोधन न्याय योजना की शुरुआत कर रही है | इसकी जानकारी मुख्यमंत्री ने आज अपने निवास कार्यालय के सभा कक्ष में ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस में राज्य सरकार की इस अभिनव योजना की जानकारी दी |

राज्य के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना के बारे में विस्तार से जानकरी देते हुए बताया कि इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में गौपालन को बढ़ावा देने के साथ ही उनकी सुरक्षा ओर उसके माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है | छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते डेढ़ सालों में छत्तीसगढ़ की चार आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है | इसके अलावा इस योजना से गाँव तथा शहरों में आवारा घूम रहे पशुओं के प्रबंधन एवं पर्यावरण की रक्षा होने कि उम्मीद ज्यादा होगी तथा गाँव आधारित रोजगार में वृद्दि होगी |

कब से ख़रीदा जाएगा गोबर

छत्तीसगढ़ राज्य में अपने आप में एक अलग योजना गोधन न्याय योजना कि शुरुआत कि घोषणा कर दी गई है | मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य मे हरेली पर्व से पशुपालकों एवं किसानों से गोबर निर्धारित दर पर क्रय किए जाने की शुरुआत होगी |

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गोबर किस रेट पर खरीदा जायेगा

गोधन योजना राज्य के पशुपालकों के आर्थिक हितों के संरक्षण की एक अभिनव योजना साबित होगी | पशुपालकों से गोबर क्रय करने के लिए दर निर्धारित की जाएगी | दर के निर्धारण के लिए कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय मंत्री मण्डलीय उप समिति गठित की गई है | इस समिति में वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री डा. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डा. शिव कुमार डहरिया, राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल शामिल किए गए है |

यह मंत्री मण्डलीय समिति राज्य में किसानों, पशुपालकों, गौ–शाला संचालकों एवं बुद्धिजीवियों के सुझावों के अनुसार आठ दिवस में गोबर क्रय का दर निर्धारित करेगी | मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी से लेकर उसके वित्तीय प्रबंधन एवं वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से लेकर उसके विक्रय तक कि प्रक्रिया के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिवों एवं सचिवों की एक कमेटी गठित की गई है |

गोठानो में होगी गोबर की खरीदी

छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते डेढ़ सालों में छत्तीसगढ़ की चरों चिन्हारियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया है | गावों में पशुधन के संरक्षण ओर संवर्धन के लिए गौठानों का निर्माण किया गया है | राज्य के 2200 गावों में गौठानों का निर्माण हो चूका है और 2800 गावों में गौठानों का निर्माण किया जा रहा है | आनेवाले दो – तीन महीने में लगभग 5 हजार गावों में गौठान बन जाएंगे | इन गठानों को आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है | जिससे ववर्मी कम्पोस्ट का निर्माण तथा महिला स्व – सहायता समूहों के माध्यम से शुरू किया जा रहा है |

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राज्य में खुले में चराई की परंपरा रही है। इससे पशुओं के साथ-साथ किसानों की फसलों का भी नुकसान होता है। शहरों में आवारा घूमने वाले मवेशियों से सड़क दुर्घटनाएं होती है, जिससे जान-माल दोनों का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि गाय पालक दूध निकालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। यह स्थिति इस योजना के लागू होने के बाद से पूरी तरह बदल जाएगी। पशु पालक अपने पशुओं के चारे-पानी का प्रबंध करने के साथ-साथ उन्हें बांधकर रखेंगे, ताकि उन्हें गोबर मिल सके, जिसे वह बेचकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सके।

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