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यह बिजनेस शुरू करने के लिए सरकार दे रही है 90 फीसदी लोन और 10 लाख रुपये तक का अनुदान

देश में किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए सरकार कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में बिजनेस शुरू करने के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं। इसके लिए इच्छुक व्यक्तियों को अनुदान के साथ ही बैंक ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कड़ी में अधिक से अधिक व्यक्तियों को योजना का लाभ दिया जा सके इसके लिए राजस्थान के प्रमुख शासन सचिव ने 22 फरवरी के दिन बैठक आयोजित की।

प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी वैभव गालरिया की अध्यक्षता में पंत कृषि भवन में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पी.एम.एफ.एम.ई.) की बैठक राज्य के प्रमुख बैंकों के स्टेट हैड के साथ आयोजित की गई। प्रमुख शासन सचिव द्वारा बैंक अधिकारियों को इस योजना के प्रति संवेदनशील रहते हुए योजना के लक्ष्य अर्जित करने के लिए निर्देशित किया गया।

यह बिजनेस शुरू करने के लिए दिया जाएगा अनुदान

सरकार द्वारा राज्य में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पी.एम.एफ.एम.ई.) का क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत आटा मील, दाल मील, प्रोसेसिंग यूनिट, ग्रेडिंग क्लिनिंग यूनिट, आचार व पापड़ के उद्योग, दूध व खाद्य पदार्थों से सम्बन्धित इकाइयों की स्थापना के लिए अनुदान दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य खाद्य से सम्बन्धित योजना में अनुदान प्रदान कर इकाइयों को बढ़ावा देना है।

बैंकों से दिया जा रहा है ऋण और सब्सिडी 

प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी ने जानकारी देते हुए बताया कि बैंकों द्वारा छोटे व मंझोले खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को अधिक से अधिक किस प्रकार लाभान्वित करवाया जा सकता हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना में नई व पुरानी खाद्य इकाईयों को स्थापित करने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा 35 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रूपये का अनुदान दिया जा रहा हैं तथा इस योजना के तहत विभिन्न बैंकों की ओर से खाद्य इकाई लगाने पर 90 प्रतिशत तक की ऋण सहायता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य में योजना को जन-जन तक पहुंचाने एवं आवेदकों की सहायता हेतु हेल्पलाइन नम्बर 9829026990 कार्यरत है। योजना में आवेदनों की संख्या बढ़ाने की दृष्टि से रोलिंग प्रक्रिया के द्वारा अधिक से अधिक डिस्टिक रिसोर्स पर्सन सूचीबद्ध किये जा रहे हैं। सामान्य प्रक्रिया के तहत डिस्टिक रिसोर्स पर्सन के लिए आवेदन पत्र पी.एम.एफ.एम.ई. राजस्थान पोर्टल पर उपलब्ध है।

निःशुल्क किया जा सकता है आवेदन

बैठक में राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड के जनरल मैनेजर श्रीमती आशु चौधरी ने बताया कि इस योजना का संचालन विपणन बोर्ड द्वारा विगत 3 वर्षो से किया जा रहा है जिसमें भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा सम्मिलित रूप से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य में एक प्रबंध यूनिट का संचालन भी किया जा रहा है। यह यूनिट इकाई को मशीन, आवेदन, ब्राण्डिंग व मार्केटिंग में भी सहयोग करती है। इस योजना में आवेदन पूर्ण रूप से निःशुल्क है तथा डिस्टिक रिसोर्स पर्सन को 20 हजार रूपये की राशि का भुगतान भी राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा किया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में बकरी पालन को लेकर कही यह बड़ी बात

देश में गाय, भैंस के साथ ही बकरी पालन भी पशुपालन का एक मुख्य हिस्सा है। बकरी पालन व्यवसाय को न केवल कम लागत में शुरू किया जा सकता है बल्कि कम समय में इससे अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है। बकरी पालन से लाभ को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 110वें एपिसोड में बकरी पालन का जिक्र किया। उन्होंने मन की बात में कहा कि जब हम पशुपालन की बात करते हैं तो अक्सर गाय-भैंस तक ही रुक जाते हैं लेकिन बकरी भी तो एक अहम पशुधन है, जिसकी उतनी चर्चा नहीं होती है।

मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने देश में अलग-अलग क्षेत्रों में बकरी पालन से जुड़े हुए लोगों के बारे में बात की। उन्होंने ओडिशा के कालाहांडी में किए जा रहे बकरी पालन के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया किस तरह यहाँ गोट बैंक की मदद से गाँव में बकरी पालन किया जा रहा है जिससे लोगों को रोजगार मिला है।

जॉब छोड़कर शुरू किया बकरी पालन फार्म

प्रधानमंत्री ने मन की बात में बताया कि उड़ीसा के कालाहांडी में बकरी पालन, गाँव के लोगों की आजीविका के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को ऊपर लाने का भी बड़ा माध्यम बन रहा है। इसके लिए इन्होंने जयंती महापात्रा और उनके पति बीरेन साहू को बताया। ये दोनों ही बेंगलुरु में जॉब करते थे लेकिन इन्होंने वह छोड़कर कालाहांडी के सालेभाटा गाँव आने का फैसला लिया। यह फैसला उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को दूर करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए किया। इन्होंने माणिकास्तु एग्रो की स्थापना की और किसानों के साथ काम शुरू किया।

Goat Bank की मदद से किया जा रहा है सामूहिक बकरी पालन

मन की बात में प्रधानमंत्री ने बताया कि जयंती और बीरेन ने यहाँ एक दिलचस्प माणिकास्तु Goat Bank भी खोला है। वे सामुदायिक स्तर पर बकरी पालन को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके Goat Farm में करीब दर्जनों बकरियां रखी हैं, जिससे किसानों के लिए के पूरा सिसिटम तैयार किया गया है। इसके जरिए किसानों को 24 महीने के लिए 2 बकरियां दी जाती हैं। 2 वर्षों में बकरियां 9 से 10 बच्चों को जन्म देती हैं। इनमें से 6 बच्चों को बैंक रखता है बाकी उसी परिवार को दे दी जाती है जो बकरी पालन करता है।

इतना ही नहीं बकरियों की देखभाल के लिए जरूरी सेवाएँ भी प्रदान की जाती हैं। आज 50 गाँव के 1000 से अधिक किसान इस दंपत्ति के साथ जुड़े हैं। उनकी मदद से गाँव के लोग पशुपालन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। मुझे ये देखकर बहुत अच्छा लगता है कि विभिन्न क्षेत्रों में सफल Professionals छोटे किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए नए-नए तरीक़े अपना रहे हैं। उनका यह प्रयास हर किसी को प्रेरित करने वाला हैं।

किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए दिया गया प्रशिक्षण

प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम

फसलों की लागत कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ ही आम जन को रसायन मुक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए सरकार द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही है जिनके तहत किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए अनुदान के साथ ही प्रशिक्षण दिया जाता है। इस क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र राजनांदगाँव में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण दिया गया।

भारत सरकार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग समन्वित पोषक तत्व संभाग नई दिल्ली द्वारा संचालित प्राकृतिक खेती योजना के अंर्तगत कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव के मृदा वैज्ञानिक श्रीमती अंजली घृतलहरे द्वारा जिले के ग्राम मगरलोटा एवं मनगटा में लगभग 100 महिला कृषकों को प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण दिया गया।

प्राकृतिक तरीके से दवाएँ बनाने का दिया गया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में किसानों को रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया गया। प्राकृतिक खेती के मुख्य घटक जैसे- बीजामृत, जीवामृत, पलवार, वापसा के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को कृषि में बीजों के उपचार के लिए बीजामृत एवं मृदा में पोषक तत्व एवं उर्वरकता बढ़ाने के लिए घनजीवामृत व खड़ी फसलों में पोषक तत्व के छिड़काव के लिए जीवामृत बनाने की सभी प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही स्फूर व जड़ों की मजबूती के लिए राख युक्त स्फूर खाद बनाया गया।

प्राकृतिक तरीके से कीटनाशक बनाने की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को खेती में कीड़े बीमारी से बचाव के लिए निमास्त्र, ब्रम्हास्त्र, अग्नि अस्त्र व मठा से उत्पाद बनाने संपूर्ण विधि एवं उपयोग की प्रायोगिक रूप से प्रशिक्षण दिया गया। मृदा की नमी एवं खरपतवार के नियंत्रण के लिए पैरा के पलवार को उपयोग करने के लिए किसानों को जागरूक किया गया।

वैज्ञानिक डॉ. अतुल डांगे ने प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि  अवयव का उपयोग कर वातावरण एवं मृदा की उपजाऊ क्षमता, मृदा में उपस्थित विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव एवं देशी केचुओं की संख्या में वृद्धि होती है। पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढ़ाने में मृदा में उपस्थित सूक्ष्म जीवों का बहुत महत्व है। इससे प्राप्त होने वाले उत्पाद रासायनिक मुक्त होने से मनुष्य के स्वास्थ्य भी सेहतमंद रहता है।

हरियाणा बजट 2024: पशुपालन, डेयरी और मछली पालन के लिए सरकार ने की यह घोषणाएँ

पशुपालन एवं डेयरी के लिए बजट

शुक्रवार 23 फरवरी के दिन हरियाणा सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपना बजट पेश कर दिया है। हरियाणा सरकार की ओर से यह बजट मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया है। हरियाणा सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों और सहकारिता के लिए 7,570.77 करोड़ रुपये का रखा है जो पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमानों की तुलना में 38.9 प्रतिशत अधिक है।

बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएँ की है। बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के 2.1 प्रतिशत दुधारू पशु हरियाणा में हैं लेकिन देश के दूध उत्पादन में राज्य का योगदान 5.19 प्रतिशत से अधिक है। राज्य की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध उपलब्धता 1098 ग्राम है जो राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसत दूध उपलब्धता 459 ग्राम का लगभग 2.4 गुणा है।

पशुपालकों को घर बैठे मिलेगी स्वास्थ्य सुविधाएं

सरकार ने अपने बजट में पशु पालकों को घर बैठे पशु चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध करवाने के लिए 8 नये पशु अस्पताल और 18 नये राजकीय पशु औषधालय खोलने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही राज्य में 70 नई मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के लिए अनुबंध किया गया है जिससे पशुपालकों को घर बैठे पशु स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें।

मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए तीन मोबाइल जल परीक्षण प्रयोगशाला वैन के माध्यम से किसानों को घरद्वार पर ही मिट्टी और जल परीक्षण की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त 4000 एकड़ भूमि को मत्स्य और झींगा पालन के अन्तर्गत लाया जाएगा।

हरियाणा बजट 2024: किसानों के कर्ज पर लगे ब्याज और जुर्माने को माफ करेगी सरकार

किसान कर्ज ब्याज माफी की घोषणा

शुक्रवार 23 फरवरी के दिन हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विधानसभा में अपने दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश किया। इस बजट में सीएम खट्टर ने कृषि सेक्टर के लिए अपना खजाना खोल दिया। खास बात यह है कि बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने हरियाणा के किसानों के लोन का ब्याज और जुर्माना माफ करने की घोषणा की। हरियाणा सरकार के इस फैसले से राज्य के लगभग 5 लाख 47 हजार किसानों को सीधा फायदा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं खुद एक किसान का बेटा हूँ इसलिए मुझे किसानों का दर्द मालूम है। हमने खेतों में खुद हल चलाया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए 7,276.77 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सीएम ने बताया कि बजट में 8 नए राजकीय पशु अस्पताल और 18 नए राजकीय पशु औषधालय खोलने का फैसला किया गया है।

ऋण जमा करने पर मिलेगी ब्याज एवं जुर्माने की माफी

बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से किसानों को ऋण दिये जा रहे हैं। जिसमें 30 सितंबर 2023 तक लिए गए फसली ऋण पर 31 मई 2024 तक मूलधन का भुगतान करने वाले किसानों का ब्याज एवं जुर्माना की राशि को माफ किया जाएगा। सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकृत होना होगा। इससे किसान खरीफ 2024 सीजन के लिए पैक्स के माध्यम से फसली ऋण प्राप्त करने के लिए पात्र हो जाएँगे।

अपने बजट में मुख्यमंत्री ने व्यापक बहुउद्देशीय गतिविधियाँ सहकारी समिति (सीएम-पैक्स) नामक एक नया सहकारी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है जिससे उद्यमिता और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा। सीएम-पैक्स में कृषि ऋण, फसल और खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन, भंडारण और परिवहन, भंडारण, बीमा और अन्य ग्रामीण आधारित सेवाओं सहित अन्य गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होगी। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष राज्य में 500 सीएम-पैक्स स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।

सरकार ने गन्ने के मूल्य में की 25 रुपये की बढ़ोतरी, अब किसानों को मिलेगा यह दाम

गन्ना मूल्य एफआरपी 2024

किसानों को उनके द्वारा लगाई गई गन्ने की फसल का उचित मूल्य मिल सके इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा हर साल गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य एफआरपी तय किया जाता है, जिस भाव पर किसान चीनी मिलों को गन्ना बेचते हैं। इस क्रम में केंद्र सरकार ने इस वर्ष के लिए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य में भारी बढ़ोतरी कर दी है। किसान आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में लगभग 8 फीसदी की बढ़ोतरी की है।

21 फरवरी के दिन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने चीनी मौसम 2024-25 के लिए चीनी की 10.25 प्रतिशत वसूली दर पर की गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य FRP 340 रुपये प्रति क्विंटल करने की मंजूरी दे दी है। संशोधित एफआरपी 01 अक्टूबर 2024 से लागू होगी। सरकार द्वारा की गई एफआरपी में वृद्धि से देश के लगभग 5 करोड़ से अधिक गन्ना किसानों और चीनी क्षेत्र से जुड़े लाखों अन्य लोगों को फायदा होगा।

किसानों को अब गन्ने का मूल्य क्या मिलेगा?

सरकार के इस फैसले से चीनी मिलें गन्ने की एफआरपी 10.25 प्रतिशत की वसूली पर 340 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करेंगी। वसूली में प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ, किसानों को 3.32 रुपये की अतिरिक्त कीमत मिलेगी। जबकि वसूली में 0.1 प्रतिशत की कमी पर समान राशि की कटौती की जाएगी। हालाँकि, गन्ने का न्यूनतम मूल्य 315.10 रुपये प्रति क्विंटल है जो 9.5 प्रतिशत की वसूली पर है। भले ही चीनी की वसूली कम हो, किसानों को 315.10 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एफआरपी का आश्वासन दिया जाता है।

कैबिनेट के फैसलों के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि चीनी मिलों द्वारा किसानों को गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आगामी गन्ना सीजन के लिए (1 अक्टूबर 2024 से 30 सितंबर 2025 की अवधि) संशोधित मूल्य निर्धारित करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2024-25 के लिए गन्‍ने का मूल्य 340 रुपये प्रति क्विंटल तय करने का निर्णय लिया गया है, पिछले वर्ष यह 315 रुपये था। इस तरह गन्‍ने की खरीद कीमत में प्रति क्विंटल 25 रुपये बढ़ाने की घोषणा की है।

पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब सब्सिडी के साथ ही पशु बीमा में देगी ज्यादा छूट

राष्ट्रीय पशुधन मिशन में सरकार ने इन कार्यों को किया शामिल

ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गारों के सृजन के साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाने और पशुओं के संरक्षण के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब पशुपालन के लिए सब्सिडी के साथ ही पशुओं के बीमा के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को और अधिक बढ़ा दिया है। 21 फरवरी के दिन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने अतिरिक्त कार्यों को शामिल करके राष्ट्रीय पशुधन मिशन में और संशोधन को मंजूरी दे दी है।

पशुपालन के लिए सरकार देगी 50 प्रतिशत सब्सिडी

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के अंतर्गत घोड़ा गधा, खच्चर, ऊंट के लिए उद्यमिता की स्थापना के लिए व्यक्तियों, एफपीओ, एसएचजी, जेएलजी, एफसीओ और धारा 8 कंपनियों को 50 लाख तक की 50 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया है। साथ ही घोड़े, गधे और ऊंट के नस्ल संरक्षण के लिए भी राज्य सरकार को सहायता दी जाएगी। केन्‍द्र सरकार योजना में अब घोड़े, गधे और ऊँट के वीर्य स्टेशन और न्यूक्लियस प्रजनन फार्म की स्थापना के लिए 10 करोड़ देगी।

इसके साथ ही सरकार अब निजी कंपनियों, स्टार्ट-अप/एसएचजी/एफपीओ/एफसीओ/जेएलजी/किसान सहकारी समितियां (एफसीओ), धारा 8 कंपनियां ग्रेडिंग प्लांट के साथ-साथ बीज भंडारण गोदाम सहित बुनियादी ढांचे की स्‍थापना जैसे भवन निर्माण, रिसीविंग शेड, ड्राईिंग प्लेटफॉर्म, मशीनरी आदि को 50 लाख रुपये तक की 50 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी के साथ चारा बीज प्रसंस्करण अवसंरचना जैसे कि प्रसंस्करण और ग्रेडिंग इकाई/चारा भंडारण गोदाम के लिए उद्यम स्थापित करने के लिए अनुदान देगी।

पशु बीमा के लिए अब देना होगा 15 फीसदी राशि

पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत अब सरकार ने किसानों के लिए प्रीमियम का लाभार्थी हिस्सा कम कर दिया है और यह मौजूदा लाभार्थी हिस्से 20 प्रतिशत, 30 प्रतिशत, 40 प्रतिशत और 50 प्रतिशत के मुकाबले 15 प्रतिशत कर दिया गया है। प्रीमियम की शेष राशि केंद्र और राज्य द्वारा सभी राज्यों के लिए 60:40, 90:10 के अनुपात में साझा की जाएगी। बीमा किए जाने वाले पशुओं की संख्या भी भेड़ और बकरी के लिए 5 मवेशी इकाई के बजाय 10 मवेशी इकाई तक बढ़ा दी गई है। इससे पशुपालकों को न्यूनतम राशि चुकाकर अपने बहुमूल्य पशुओं का बीमा कराने में सुविधा होगी।

चारा फसलों की खेती को भी दिया जाएगा बढ़ावा

सरकार ने देश में पशुओं के लिए चारा उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी बड़ा फ़ैसला लिया है। चारा खेती के क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए, राज्य सरकार को गैर-वन भूमि, बंजर भूमि/चरागाहों/गैर कृषि योग्य भूमि के साथ-साथ वन भूमि “गैर-वन बंजर भूमि/चरागाहों/गैर-कृषि योग्य भूमि” और “वन भूमि से चारा उत्पादन” के साथ-साथ निम्नीकृत वन भूमि में भी चारे की खेती के लिए सहायता दी जाएगी। 

क्या है राष्ट्रीय पशुधन मिशन

राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना की शुरूआत 2014-15 में की गई थी। इस योजना के अनुसार, पशुधन पालकों और किसानों, विशेष रुप से छोटे धारकों के पोषण और जीवन स्तर में सुधार करने का काम किया जाता है। सरकार द्वारा इस योजना के तहत किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आहार और चारे की मांग और उपलब्धता में अंतर को कम करना, स्वदेशी नस्लों का संरक्षण और उसमें सुधार करना, मांस, अंडा, बकरी का दूध, ऊन के उत्पादन में बढ़ोतरी करना शामिल है।

वर्तमान में नये सिरे से तैयार राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अन्तर्गत तीन उप-मिशन हैं। पहला पशुधन और पोल्ट्री के नस्ल सुधार पर उप-मिशन, दूसरा चारा और चारा का उप-मिशन और तीसरा नवाचार और विस्तार पर उप-मिशन। नये सिरे से तैयार एनएलएम में उद्यमिता विकास, चारा और चारा विकास, अनुसंधान और नवाचार, पशुधन बीमा की ओर 10 गतिविधियां और लक्ष्य हैं।

मौसम चेतावनी: 20 से 22 फरवरी के दौरान इन जिलों में हो सकती है बारिश एवं ओला वृष्टि

Weather Update: 20 से 22 फरवरी के लिए वर्षा का पूर्वानुमान

देश के कई राज्यों में मौसम ने एक बार फिर यूटर्न ले लिया है, इसके साथ ही एक बार फिर से देश के कई राज्यों में बारिश एवं  ओला वृष्टि का दौर शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग IMD के अनुसार तो देश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ WD सक्रिय हो गया है। जिसके प्रभाव के चलते उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के साथ ही मैदानी क्षेत्रों में बारिश एवं ओला वृष्टि की संभावना है।

मौसम विभाग की मानें तो 20 से 22 फ़रवरी के दौरान देश के जम्मू कश्मीर और लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, पूर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश एवं ओला वृष्टि होने की संभावना है।

राजस्थान के इन जिलों में हो सकती है बारिश एवं ओला वृष्टि

भारतीय मौसम विभाग के जयपुर केंद्र के द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार 20 फरवरी के दिन अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, दौसा, धौलपुर, जयपुर, करौली, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सिरोही, टोंक, बाड़मेर, जालौर, जोधपुर, नागौर, पाली जिलों में वहीं 21 फरवरी के दिन जयपुर, भरतपुर, उदयपुर और अजमेर संभाग में कई स्थानों पर गरज चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। वहीं इन जिलों में कई स्थानों पर ओला वृष्टि होने की भी संभावना है।

बिहार के इन जिलों में हो सकती है बारिश एवं ओला वृष्टि

भारतीय मौसम विभाग के पटना केंद्र के द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार 20 से 22 फरवरी के दौरान राज्य के पश्चिम चंपारण, सीवान, सारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी, मधुबनी, मुज़फ़्फ़रपुर, दरभंगा, वैशाली, शिवहर, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल, पटना, गया, नालंदा, शेख़पुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, जहनाबाद, भागलपुर, बाँका, जमुई, मुंगेर एवं ख़गड़िया जिलों में अधिकांश स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। वहीं कुछ स्थानों पर ओला वृष्टि भी हो सकती है।

पंजाब एवं हरियाणा के इन जिलों में हो सकती है बारिश एवं ओला वृष्टि

भारतीय मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार 20 से 22 फरवरी के दौरान पंजाब राज्य के पठानकोट, गुरुदासपुर, अमृतसर, तरण-तारण, होशियारपुर, नवाँशहर, कपूरथला, जालंधर, फिरोजपर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला एवं सास नगर जिलों में अधिकांश स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है साथ ही कुछ स्थानों पर ओला वृष्टि होने की सम्भावना है।

वहीं हरियाणा राज्य में 20 से 22 फ़रवरी के दौरान चंडीगढ़, पंचकुला, अम्बाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, महेंद्र गढ़, रेवारी, झज्जर, गुरुग्राम, मेवात, पलवल, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत जिलों में अनेक स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश एवं ओला वृष्टि होने की सम्भावना है।

झारखंड के इन जिलों में हो सकती है बारिश

मौसम विभाग के राँची केंद्र के अनुसार 21 फरवरी से लगातार तीन दिनों तक राज्य में बारिश होने की संभावना है। 21 फरवरी को राज्य के उत्तर पूर्वी जिले देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा, गिरिडीह और साहिबंज के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है।22 फरवरी को भी इन जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश देखने के लिए मिल सकती है। जबकि मौसम विभाग के अनुसार 23 तारीख को राज्य के दक्षिण पूर्व हिस्सों जैसे पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला खरसावां के अलावा पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लतेहार और लोहरदगा में कहीं कहीं पर हल्की बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान राज्य के कुछ स्थानों पर ओला वृष्टि भी होने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश के इन जिलों में हो सकती है बारिश एवं ओला वृष्टि

भारतीय मौसम विभाग के लखनऊ केंद्र के द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 20 से 22 फरवरी के दौरान उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद, अलीगढ़, एटा, हाथरस, कासगंज, अयोध्या, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर, अमेठी, आज़मगढ़, मऊ, बरेली, बंदायू, पीलभीत, शाहजहांपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, हमीरपुर, बहराइच, बलरामपूर, गोंडा, बाराबंकी, श्रावस्ती, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज ज़िलों में कहीं–कहीं कुछ स्थानों पर तेज हवा आंधी के साथ हल्की से मध्यम वर्षा एवं कुछ स्थानों पर ओला वृष्टि होने की संभावना है।

इसके अलावा झाँसी, जालौन, ललितपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, कन्नौज, फ़र्रुखाबाद, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गौतम बुद्ध नगर, ग़ाज़ियाबाद, हापुड़, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा, संभल, फतेहपुर, सहारनपुर, मुज्जफरनगर, शामली एवं जौनपुर ज़िलों में कहीं–कहीं कुछ स्थानों पर तेज हवा आंधी के साथ हल्की से मध्यम हो सकती है वहीं कुछ स्थानों पर ओला वृष्टि होने की संभावना है।

अब सरकार नीम की खेती से बढ़ाएगी किसानों की आमदनी, शुरू की जाएगी नई योजना

नीम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए योजना

भारत में प्राचीन काल से ही नीम का उपयोग कई कार्यों में किया जाता है, इसमें कृषि और स्वास्थ्य प्रमुख है। आज के समय में नीम विदेशों में भी अत्यंत अहम पौधा बन गया है। कृषि क्षेत्र में नीम का उपयोग यूरिया कोटिंग से लेकर कई तरह की कीट-रोगों से फसलों को बचाने में किया जा रहा है। नीम के महत्व को देखते हुए सरकार नीम उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस विषय पर चर्चा के लिए नीम शिखर सम्मेलन और वैश्विक नीम व्यापार मेले का आयोजन आईसीएआर-केंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी के सहयोग से नई दिल्ली में 19-20 फरवरी 2024 किया जा रहा है।

नीम शिखर सम्मेलन और वैश्विक नीम व्यापार मेले का मुख्य उद्देश्य नीम लेपित यूरिया, नीम पर आधारित कीटनाशक और नीम पर आधारित स्वास्थ्य उत्पादों को बढ़ावा देना है। इसके लिए देश में नीम का उत्पादन बढ़ाने और इसका लाभ देश के किसानों को दिया जाना है। इस कार्यक्रम में 10 विदेशियों सहित लगभग 250 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

नीम की व्यावसायिक खेती के लिए तैयार की जाएगी योजना

कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी के निदेशक डॉ.ए.अरुणाचलम ने बताया कि आज अपने देश में लगभग 2 करोड़ नीम के पेड़ हैं, जबकि देश में इसके पांच गुना नीम के पेड़ यानी 10 करोड़ लगाने की जरूरत है। ऐसे में, अब देश में इसकी व्यावसायिक खेती की योजना बनाने के लिए कृषि मंत्रालय, पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार, और नीति आयोग से चर्चा चल रही है।

इसके लिए नीम पर शोध किया जा रहा है और अच्छी गुणवत्ता वाले नीम के पौधों को देश में ज्यादा लोग लगा सकेंगे। डॉ. अरुणाचलम ने बताया कि देश में 275 तरह के नीम के पौधे हैं, जिनमें से 175 तरह की अच्छी क्वालिटी के नीम के पौधे उनका संस्थान जलवायु क्षेत्र के अनुसार ग्रेडिंग कर रहा है। कृषि, स्वास्थ्य, और पर्यावरण के लिए नीम लाभकारी है।

पर्यावरण को होगा लाभ

वर्ल्ड नीम आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएनओ) के अध्यक्ष डॉ. बी.एन व्यास ने नीम को प्रकृति का सबसे अनोखा उपहार बताया है, जो सभी मानव ,जानवरों और फसलों के लिए वरदान है। नीम के पौधों का प्रत्येक भाग मानव जीवन के लिए अहम है। जलवायु परिवर्तन में बढ़ते तापमान को कम करने में नीम का अहम योगदान हो सकता है। नीम के पेड़ के आसपास तापमान और ऑक्सीजन ज्यादा होती है, जो इंसान से लेकर पशु तक के लिए फायदेमंद है। नीम के पौधे फसलों और फलों की बागवानी के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग करने की जरूरत है। इससे हेल्दी फूड वाली खेती भी हेल्दी रहेगी। नीम के उत्पाद कृषि में लागत को कम करने के साथ पर्यावरण हितैषी हैं। इसके लिए सरकार और निजी संगठनों को काम करने की जरूरत है।

नीम शिखर सम्मेलन में नीम को वृक्षारोपण वानिकी के विकल्प के रूप में चिह्नित किया गया, जो उद्योग की कच्चे माल की आवश्यकताएँ पूरी करेगा। साथ ही इस कार्यक्रम में कार्बन खेती के लिए भी नीम के पेड़ों की वकालत की गई।

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कृषि यंत्र अनुदान हेतु आवेदन

देश में अधिक से अधिक किसान खेती में कृषि यंत्रों का उपयोग कर ज्यादा मुनाफा कमा सकें इसके लिए सरकार किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी अनुदान देती है। इसके लिए सरकार द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में किसानों को सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए आवेदन माँगे गये हैं, इच्छुक किसान योजना का लाभ लेने के लिए 23 फरवरी 2024 तक ऑनलाइन आवेदन कर कृषि यंत्र की बुकिंग कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा किसानों को कृषि यंत्र एवं कस्टम हायरिंग सेंटर पर अनुदान दिया जा है। इसके लिए सरकार द्वारा राज्य में एस.एम.ए.एम. (SMAM)-81 योजना के अंतर्गत अनुसूचित जन जाति के किसानों को कृषि यंत्र एवं कृषि रक्षा उपकरणों पर अनुदान देने के लिए किसानों से आवेदन माँगे गये हैं।

इन कृषि यंत्रों पर दिया जाएगा अनुदान

कृषि विभाग द्वारा अभी लेजर लैंड लेवलर, पोस्ट होल डीगर, पोटैटो डीगर, शुगर केन कटर प्लान्टर, शुगर केन थ्रेस कटर, शुगर केन रेटून मैनैजर, हैरो, कल्टीवेटर, पावर स्प्रैयर, मल्टीक्रॉप थ्रेसर, पावर चैफ कटर, स्ट्रॉ रीपर, ब्रश कटर, मिनी राइस मिल, मिनी दाल मिल, मिलेट मिल, सोलर ड्रायर, ऑयल मिल विद फ़िल्टर प्रेस, पेकिंग मशीन, रोटावेटर, ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर, बिक्रेट मेकिंग मशीन, यूरिया डीप प्लेसमेंट एप्लीकेटर, सेल्फ प्रोपेल्ड यंत्र, पॉवर टीलर, पॉवर वीडर, कम्बाइन हार्वेस्टर विद सुपर एस.एम.एस इत्यादी कृषि यंत्रों पर किसानों को अनुदान देने के लिए आवेदन माँगे गये हैं।

कृषि यंत्रों पर कितना अनुदान दिया जाएगा?

सरकार द्वारा एस.एम.ए.एम. (SMAM) योजना के अंतर्गत अलग-अलग कृषि यंत्रों पर अलग-अलग अनुदान दिया जाता है। अभी कृषि विभाग द्वारा जिन कृषि यंत्रों के लिए आवेदन माँगे गये हैं उन कृषि यंत्रों पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वहीं कस्टम हायरिंग केंद्र के लिये सरकार लाभार्थी किसान को 40 प्रतिशत तक का अनुदान देगी।

इच्छुक किसानों को कृषि यंत्रों के आवेदन के लिए बुकिंग (आवेदन के समय) 1 लाख तक अनुदान के यंत्र के लिए 2,500 रूपये एवं 1 लाख रूपये से अधिक के अनुदान के लिए 5,000 रुपये बुकिंग राशि जमा करनी होगा। चयन न होने पर बुकिंग राशि कृषक के बैंक खाते में वापस कर दी जायेगी।

कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन कहाँ करें?

कृषि विभाग द्वारा ऊपर दिये गये सभी कृषि यंत्रों की बुकिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। इच्छुक किसान योजना का लाभ लेने के लिए 23 फरवरी 2024 तक विभागीय पोर्टल agriculture.up.gov.in पर पंजीकरण कर यंत्र के लिए बुकिंग कर सकते हैं। लक्ष्यों से अधिक आवेदन होने की स्थिति में जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा ई-लॉटरी से लाभार्थी का चयन किया जाएगा। चयन होने बाद किसानों को मेसेज के माध्यम से सूचना दी जाएगी। जिसके बाद किसान को तय समय में यंत्र क्रय का बिल विभागीय पोर्टल पर अपलोड करना होगा। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने जनपद के उप-कृषि निदेशक कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

किसान इन बातों का रखें ध्यान

  • कृषि यंत्र खरीदने के बाद कृषि विभाग द्वारा इसका सत्यापन किया जाएगा उसके बाद ही लाभार्थी किसान के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से अनुदान का भुगतान किया जाएगा।
  • upyantratracking.in पोर्टल पर दर्ज कृषि यंत्र इंवेंटरी कृषि यंत्र से यंत्र खरीदने पर ही अनुदन दिया जाएगा।
  • कृषि यंत्र के क्रय हेतु विक्रेता फ़र्मों को कृषि यंत्र के मूल्य का 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान लाभार्थी के खाते से तथा कृषक अनपढ़ होने पर अपने परिवार (माता, पिता, भाई, बहन, पुत्री, पुत्र) के खाते से किया जाना अनिवार्य है।

किसानों को कृषि यंत्र बुकिंग के बाद मिलेगा OTP

कृषि यंत्रों के आवेदन हेतु बुकिंग किये जाने के लिए विभागीय पोर्टल पर पूर्व से उपलब्ध मोबाईल नंबर पर ओ.टी.पी. प्राप्त करने का विकल्प होगा, यदि पोर्टल पर उपलब्ध मोबाईल नंबर क्रियाशील नहीं हो तो लाभार्थी के नये मोबाईल नंबर पर ओ.टी.पी. प्राप्त कर आगे की प्रक्रिया पूर्ण करने का विकल्प दिया जाएगा। आवेदक द्वारा एक मोबाईल नंबर अपना अथवा ब्लड रिलेशन सदस्य (माता, पिता, भाई, बहन, पुत्री, पुत्र एवं पुत्र-वधु) के मोबाईल से ही आवेदन किया जा सकेगा। सत्यापन के समय इसकी पुष्टि भी की जायेगी।

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