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सिंचाई के लिए कूप और तालाब बनाने के लिए सरकार दे रही है अनुदान, किसान अभी करें आवेदन

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किसानों को सिंचाई के लिए सभी आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिसमें किसानों को बोरिंग, नलकूप और तालाब निर्माण के लिए भारी अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इस कड़ी में बिहार सरकार द्वारा राज्य में हर खेत तक सिंचाई का पानी योजना के अंर्तगत सर्वेक्षित स्थानों पर निजी और सामुदायिक भूमि पर नलकूप तथा निजी भूमि पर जल संचयन तालाब एवं फार्म पौण्ड बनाने के लिए योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत किसान आवेदन कर अनुदान पर कूप और तालाब का निर्माण करा सकते हैं।

बिहार सरकार द्वारा इस योजना को 16 जिलों में लागू किया गया है। योजना के तहत 16 जिलों में सर्वेक्षण के बाद चयनित स्थानों पर 158 तालाब तथा 91 कूप कुल 249 संरचना के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। जिसके विरुद्ध इच्छुक किसान 20 जुलाई 2024 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

कूप और तालाब निर्माण पर कितना अनुदान (Subsidy) मिलेगा?

योजना के तहत किसानों को निजी भूमि पर 10 फीट व्यास एवं 30 फीट गहराई के एवं सामुदायिक/ सरकारी भूमि पर 15 फीट व्यास एवं 30 फीट गहराई के सिंचाई कूप का निर्माण कराना होगा तथा निजी भूमि पर जल संचयन तालाब 150*100*8 एवं फार्म पौंड 100*66*10 का निर्माण कराना होगा। निजी भूमि पर कराये जाने वाले सिंचाई कूप निर्माण पर 80 प्रतिशत अनुदान एवं सामुदायिक भूमि पर कराये जाने वाले सिंचाई कूप निर्माण पर 100 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वहीं निजी भूमि पर कराये जाने वाले जल संचयन तालाब एवं फार्म पौंड के निर्माण पर 90 प्रतिशत का अनुदान लाभार्थी किसानों को दिया जाएगा।

इन जिलों के किसान कर सकते हैं आवेदन?

हर खेत तक सिंचाई का पानी योजना के तहत कूप और तालाब निर्माण का लाभ राज्य के 16 जिलों के किसानों को मिलेगा। इनमें बांका, मुंगेर, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, रोहतास, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, पटना, शेखपुरा, लखीसराय, भागलपुर, भोजपुर एवं बक्सर शामिल है। सरकार ने इन जिलों को हर खेत तक सिंचाई का पानी सिंचाई निश्चय योजना अंतर्गत सर्वेक्षित स्थलों में शामिल किया है।

किसान कूप और तालाब निर्माण के लिए आवेदन कहाँ करें?

निजी भूमि पर सिंचाई कूप निर्माण, जल संचयन तालाब एवं फार्म पौंड के लिए इच्छुक किसानों को सीधे ऑनलाइन आवेदन करना होगा। वहीं सामुदायिक भूमि पर सिंचाई कूप निर्माण के लिए लाभूक समूह के मुख्य व्यक्ति को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। किसान यह आवेदन कृषि विभाग सरकार की वेबसाइट पर दिए गए लिंक पर या bwds.bihar.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए किसान के पास DBT in Agriculture के 13 अंकों का पंजीयन संख्या होना आवश्यक है।

योजना का लाभ किसानों का जिलेवार एवं मदवार निर्धारित भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य के अनुसार पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा। विशेष जानकारी के लिए किसान संबंधित ज़िला के उपनिदेशक, भूमि संरक्षण एवं सहायक निदेशक (शस्य), भूमि संरक्षण से संपर्क कर सकते हैं।

किसान इस तरह करें फसलों में कातरा लट कीट का नियंत्रण

देश के अधिकांश स्थानों पर खरीफ फसलों की बुआई का काम पूरा हो गया और फसलें अभी बढ़वार की अवस्था में हैं। ऐसे में इस समय फसलों पर खरपतवार के साथ ही कई तरह कीट एवं रोग लगने संभावना रहती है। जिसमें खरीफ फसलों में कातरे के प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा एडवायजरी जारी की गई है। इस संबंध में चूरु जिले के संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार डॉ. जगदेव सिंह ने बताया कि खरीफ की फसलों में खासतौर से बाजरा व दलहनी फसलों में कातरे का प्रकोप होता है। इस कीट की लट वाली अवस्था नुकसान करती है।

संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार ने कहा कि सामान्यतः मानसून की पहली बरसात के समय इसके प्रौढ़ कीट (मोथ/पतंगा) जमीन से निकलते हैं तथा प्रत्येक मादा कीट द्वारा अलग-अलग समूह में 600-700 अंडे फसल या खरपतवार के पत्ते की निचली सतह पर दिए जाते हैं। इन अंडों से 2-3 दिवस में छोटी-छोटी लटें (इल्ली) निकलती हैं जो कि 40-50 दिन तक फसलों को नुकसान पहुंचाती है। इस लट को ही आमतौर पर कातरा कहा जाता हैं। लट अपनी पूर्ण अवस्था प्राप्त करने के बाद जमीन में प्यूपा अवस्था में सुषुप्तावस्था में चली जाती है जो कि आगामी वर्ष की बरसात में पुनः प्रौढ़ कीट के रूप में मानसून के समय निकलती है।

किसान इस तरह करें कातरा कीट का नियंत्रण

मानसून की वर्षा होते ही कातरे के पतंगों का जमीन से निकलना शुरू हो जाता है। इन पतंगों को नष्ट कर दिया जाये तो फसलों में कातरे की लट का प्रकोप बहुत कम हो जाता है, इसकी रोकथाम प्रकाश पाश क्रिया से संभव है। पतंगों को प्रकाश की ओर आकर्षित करें। खेत की मेड़ों, चारागाहों व खेतों में गैस, लालटेन या बिजली का बल्ब जलायें (जहां बिजली की सुविधा हो) तथा इनके नीचे कीटनाशक मिले पानी की परात रखें ताकि रोशनी पर आकर्षित होकर एवं जलकर कीट नष्ट हो जायें।

खेतों के पास उगे जंगली पौधे एवं जहां फसल उगी हो, वहां पर अंडों से निकली लटों पर इसकी प्रथम व द्वितीय अवस्था में क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण का 6 किलो प्रति बीघा की दर से भुरकाव करें। बंजर जमीन चरागाह में उगे जंगली पौधों से खेतों पर कातरे की लट के आगमन को रोकने के लिए खेत के चारों तरफ खाई खोदें एवं खाइयों क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत में चूर्ण भुरक दीजिये ताकि खाई में गिरकर आने वाली लटे नष्ट हो जायें। क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 6 किलो का प्रति बीघा भुरकाव करें। जहां पानी की सुविधा हो वहां क्यूनालफॉस 25 ई.सी 250 मि.ली. प्रति बीघा छिड़काव करें।

सरकार मशरूम किट पर देगी 90 प्रतिशत का अनुदान, यहाँ करें आवेदन

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मशरूम एक ऐसी सब्जी है जिसे कम क्षेत्र में लगाकर किसान अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, इसके साथ ही यह रोज़गार का  अच्छा साधन भी है। मशरूम की उपयोगिता को देखते हुए बिहार सरकार राज्य में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं। इसके लिए इच्छुक व्यक्तियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी शासन ने की है। इस कड़ी में बिहार सरकार राज्य के युवाओं और किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए अनुदान पर मशरूम किट उपलब्ध करा रही है।

बाजार में मशरूम की मांग तेज़ी से बढ़ी है। कम लागत और कम जगह में मशरूम की खेती कर किसान, बेरोजगार युवक और युवतियाँ बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं। बिहार सरकार बगैर खेतिहर भूमि वाले लोगों के लिए मशरूम किट योजना चला रही है। इससे जुड़कर किसान, युवक, युवतियाँ व महिलाएँ स्वरोजगार स्थापित कर सकते हैं।

मशरूम किट पर मिलेगा 90 प्रतिशत अनुदान

बिहार सरकार मशरूम उत्पादन किट पर 90 प्रतिशत अनुदान मुहैया करा रही है। उद्यानिकी विभाग द्वारा मशरूम की एक कीट की लागत 60 रुपये तय की गई है जिस पर लाभार्थी को अधिकतम 90 प्रतिशत यानि की एक कीट पर 54 रुपये का अनुदान मिलेगा। इस योजना अंतर्गत एक आवेदक को न्यूनतम 25 और अधिकतम 100 किट दिया जाएगा। एक मशरूम किट का वजन 5 किलोग्राम होगा जिसमें 100 ग्राम उच्च गुणवत्ता का मशरूम स्पॉन मिला होगा। साथ ही इस योजना की ख़ास बात यह है कि इसके लिए आवेदक के पास जमीन नहीं होगी तब भी योजना का लाभ ले सकता है। इस योजना का लाभ लेने हेतु आवेदक को प्राधिकृत संस्थान द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य है।

छोटे कमरे में कर सकते हैं मशरूम का उत्पादन

बता दें कि मशरूम का उत्पादन एक छोटे से कमरे में भी किया जा सकता है। इसके लिए खेत की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यही वजह है कि इसमें प्राकृतिक आपदा का जोखिम नहीं के बराबर रहता है। जिनके पास खेतिहर भूमि नहीं है वह भी एक छोटे से कमरे में मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं। कम लागत, कम जगह और कम समय में मशरूम का उत्पादन कमाई का बेहतर ज़रिया साबित हो रहा है। पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज़ पर इस योजना का लाभ आवेदकों को दिया जाएगा।

मशरूम किट के लिए आवेदन कहाँ करें

इच्छुक व्यक्ति को मशरूम किट योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इच्छुक किसान बिहार सरकार की उद्यानिकी विभाग की विभागीय वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल पर किसानों को मशरूम से संबंधित योजना पर क्लिक करना होगा इसके बाद मशरूम किट वितरण पर क्लिक करना होगा। आवेदन के लिए किसान के पास कृषि विभाग से प्राप्त डीबीटी संख्या होना आवश्यक है। आवेदन के साथ मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण का प्रमाण-पत्र, किसान रजिस्ट्रेशन, पासपोर्ट साइज फोटो संलग्न करना पड़ेगा।

इंदौर के सांसद ने ड्रोन से लगाये बीज

खेती में ड्रोन का उपयोग बढ़ता जा रहा है। किसान ड्रोन की मदद से ना केवल नैनो उर्वरकों एवं दवाओं का छिड़काव फसलों पर कर सकते हैं बल्कि बीज लगाने में भी ड्रोन का उपयोग कर सकते हैं। इस कड़ी में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी इंदौर को हरित बनाने के लिए अब ड्रोन की मदद ले रहे हैं। सांसद लालवानी ने विभिन्न क्षेत्रों में पीपल के बीजों का रोपण किया है। इंदौर के ड्रोन बनाने वाले स्टार्टअप पाइज़र्व टेक्नोलॉजी द्वारा अनोखा ड्रोन तैयार किया है।

सांसद ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत इंदौर ने विश्व रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही कई इलाके ऐसे होते हैं जहां पर प्रत्यक्ष रूप से पेड़ लगाना संभव नहीं होता इसलिए इंदौर के स्टार्टअप के बारे में जब मुझे जानकारी मिली तो हमने पीपल के बीजों का रोपण ऐसी जगह पर किया जहां पेड़ लगाना मुश्किल काम है।

सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला पेड़ है पीपल

इंदौर के सांसद लालवानी ने कहा कि बारिश का मौसम बीजारोपण के लिए सबसे अनुकूल होता है। पीपल सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला वृक्ष माना गया है इसलिए पीपल लगाने की कोशिश की गई है। सांसद लालवानी ने बताया कि ड्रोन से बीज लगाने की तकनीक के माध्यम से इंदौर के आसपास कई क्षेत्रों को हरा-भरा किया जा सकता है और कृषि के क्षेत्र में भी इसकी अथाह संभावनाएँ है।

पाइज़र्व टेक्नोलॉजी के सीटीओ अभिषेक मिश्रा ने बताया की ड्रोन से सीधे बीजरोपण करने का प्रयोग भारत में पहली बार हुआ है। इससे पहले सीड बॉल गिराने के प्रयोग हुए हैं। साथ ही ये पूरी तरह से मेड इन इंडिया ड्रोन है और हमने उसे बीजारोपण के लिए अपग्रेड किया है।

सोलर पैनल कूलिंग चैंबर लगाने के लिए सरकार दे रही है 12.5 लाख रुपये की सब्सिडी

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किसान अपनी फल और सब्जियों को जल्दी खराब होने के डर से मंडी में ले जाते हैं। जिसके चलते उन्हें इन फसलों के उचित दाम नहीं मिल पाते हैं और उन्हें मुनाफा नहीं होता है। यदि किसान सोलर पैनल माइक्रो कूल चैम्बर बनवा लें तो लंबे समय तक अपनी फल-सब्जियों को सुरक्षित रख सकते हैं, साथ ही कोल्ड स्टोरेज में सौर ऊर्जा की स्थापना करने से बिजली की खपत भी कम होगी और बिजली बिल पर आने वाली लागत में कमी आएगी।

सोलर पैनल कूलिंग चैम्बर पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?

बिहार सरकार ने राज्य में फल व सब्जियों के भंडारण की सुविधा के लिए सोलर पैनल माइक्रो कूलिंग चैम्बर तैयार करने के लिए स्वीकृति दे दी है। इसके लिए किसान अपनी इच्छानुसार सूचीबद्ध कंपनी का चयन कर काम करा सकते हैं। शासन की और से सोलर कूलिंग चेंबर तैयार करने की लागत 25 लाख रुपये निर्धारित की गई है। जिस पर विभाग की और से लाभार्थी व्यक्ति को 50 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। लाभार्थी का चयन पहले आओ पहले पाओ के तहत किया जाएगा।

उद्यानिकी विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में 10 यूनिट लगाये जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिये वित्तीय लक्ष्य 10 करोड़ रुपये है। किसानों को सस्ती दर पर भंडारण की सुविधा प्राप्त कराने व बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए कोल्ड स्टोरेज में से 50 इकाइयों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। इसके प्रति कोल्ड स्टोरेज 35 लाख रुपये की लागत तय की गई है। जिसमें से 15.50 लाख का अनुदान विभाग देगा। विभाग ने 87.5 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य रखा है। हालाँकि इसका लाभ लेने वाले कोल्ड स्टोरेजों के मालिकों को वर्तमान दर से न्यूनतम 25 फीसदी कम सर पर किसानों के उत्पाद का भंडारण करना होगा।

किसान आवेदन कहाँ करें?

राज्य के इच्छुक किसान जो सब्सिडी पर सोलर पैनल कूलिंग चैम्बर बनवाना चाहते हैं, वे किसान उद्यानिकी विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को विभागीय वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाना होगा। जिसके बाद किसान योजना से जुड़ी जानकारी के साथ ही आवेदन भी कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने प्रखंड या जिले के उद्यानिकी विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

सोलर पैनल माइक्रो कूलिंग चैम्बर एक तरह से फ्रिज की तरह होता है, जिसमें करीब 10 टन तक जल्दी खराब होने वाली उपज को लंबे समय तक ताजा रख सकते हैं। यह सोलर ऊर्जा से चलता है जिससे बिजली की बचत भी होती है।

सब्सिडी पर खेतों की तारबंदी कराने के लिए आवेदन करें

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फसलों को आवारा पशुओं, नीलगाय और जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए खेतों की तारबंदी होना बहुत जरुरी है। लेकिन इसकी लागत अधिक होने के चलते किसान अपने खेतों की तारबंदी नहीं करा पाते हैं, जिसको देखते हुए राजस्थान सरकार द्वारा राज्य में किसानों को खेतों की तारबंदी कराने के लिए राजस्थान एग्री इन्फ्रा मिशन के तहत कांटेदार-चैनलिंक तारबंदी करने के लिए अनुदान उपलब्ध करा रही है। इसके लिए सरकार ने राज्य के सभी जिलों हेतु लक्ष्य जारी कर दिए हैं।

योजना की जानकारी देते हुए कृषि विभाग अजमेर के संयुक्त निदेशक शंकर लाल मीणा ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से किसानों के आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। ज़िले के अब 835 किसान योजना के तहत आवेदन कर चुके हैं। इस योजना का लाभ सभी श्रेणी के कृषकों को दिया जाएगा। व्यक्तिगत आवेदन होने कि स्थिति में किसान के पास न्यूनतम 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि एक स्थान पर होना आवश्यक है तथा कृषक समूह होने कि स्थिति में एक कृषक समूह में न्यूनतम 2 कृषक एवं 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि एवं सामुदायिक रूप से तारबंदी करने पर न्यूनतम 10 कृषक एवं 5 हेक्टेयर कृषि भूमि एक स्थान पर होना अनिवार्य है।

ताराबंदी Fencing के लिए कितना अनुदान (Subsidy) मिलेगा?

योजना के तहत राज्य के किसानों को तारबंदी के लिए पेरीफरी (परिधि) पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि 40 हजार रुपये जो भी कम हो प्रति कृषक 400 रनिंग मीटर अधिकतम तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं तारबंदी कार्यक्रम अंतर्गत लघु एवं सीमान्त कृषकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान 8 हजार रुपये अर्थात राज्य योजना से कुल 48 हजार रुपये दिए जाएंगे।

10 या 10 से अधिक कृषकों द्वारा सामुदायिक स्तर पर तारबंदी के लिए आवेदन करने पर लागत का 70 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि 56 हजार जो भी कम हो प्रति कृषक 400 रनिंग मीटर अधिकतम तक अनुदान दिया जाएगा। साथ ही 400 मीटर से कम होने की स्थिति पर प्रोरेटा बेसिस पर गणना के आधार पर अनुदान देय होगा। यदि पति-पत्नी दोनों द्वारा आवेदन करने तथा स्वयं के नाम कृषि भूमि होने की स्थिति में नियमानुसार पात्रता रखने पर दोनों को अनुदान का लाभ प्राप्त हो सकेगा।

किसान तार फेंसिंग के लिए आवेदन कहाँ करें?

राज्य के किसान स्वयं या नजदीकी ई-मित्र केन्द्र पर जाकर राज-किसान साथी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। किसान ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा किये जाने की प्राप्ति रसीद ऑनलाइन ही प्राप्त कर सकेंगे। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज जैसे जन आधार कार्ड, जमाबंदी की नकल (जो छः माह से अधिक पुरानी नहीं हो) तथा ट्रेस नक्शा जो की सक्षम स्तर से प्रमाणित हो आवश्यक है। लघु एवं सीमान्त श्रेणी कृषकों के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र संलग्न होना तथा जन आधार कार्ड में सीडिंग होना आवश्यक है।

तारबंदी अनुदान के लिए आवेदनों का निस्तारण पहले आओ पहले पाओ के आधार पर अथवा डेढ़ गुना से अधिक आवेदन होने की स्थिति पर लॉटरी द्वारा किया जाएगा। तारबन्दी किए जाने से पहले और काम पूरा होने बाद स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक द्वारा जियोटेगिंग (भौतिक सत्यापन) कार्य अपने मोबाईल पर अपलोड राज किसान सत्यापन एप द्वारा किया जाएगा। इसमे कार्मिक के साथ आवेदित कृषक की उपस्थिति अनिवार्य है। विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशानुसार तारबंदी करने पर अनुदान राशि कार्यालय को बजट उपलब्धता अनुसार वित्तीय स्वीकृति जारी करते हुए संबंधित कृषक के जनआधार से लिंक बैंक खाते में सीधे डीबीटी प्रक्रिया के तहत ही जमा होगी तथा किसी भी प्रकार के ऑफलाइन आवेदन स्वीकार्य नहीं होंगे।

छत्तीसगढ़ में किसान इस तरह करायें अपनी फसलों का बीमा

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मौसम खरीफ वर्ष 2024 के क्रियान्वयन हेतु फसलों का बीमा कराने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य के किसान 31 जुलाई 2024 तक सभी महत्वपूर्ण फसलों का बीमा करा सकते हैं। जिसमें  धान सिंचित, धान असिंचित, उड़द, मूंग, मूंगफली, कोदो, कुटकी, मक्का, अरहर /तुअर, रागी एवं सोयाबीन आदि फसलें शामिल हैं।

फसल बीमा योजना से किसानों को प्रतिकूल मौसम सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई में मदद मिलेगी। ऐसे में अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ा जा सके इसके लिए सरकार द्वारा फसल बीमा प्रचार-प्रसार हेतु जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है।

किसान इन कंपनियों से करा सकते हैं फसल बीमा

छत्तीसगढ़ सरकार ने फसलों के बीमा के लिए राज्य के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग कंपनियों चयन किया गया है। जिसमें बेमेतरा, बस्तर, कोरिया, बीजापुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, कबीरधाम, जांजगीर.चांपा, गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, सक्ती और कांकेर जिला के किसान बजाज जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।

वहीं राजनांदगांव, धमतरी, कोरबा, जशपुर, नारायणुर, खैरागढ-छुईखदान-गंडई, महासमुन्द, रायगढ़, सूरजपुर और कोण्डागांव जिला के किसान एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड कंपनी से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं। इसके अलावा दुर्ग, बिलासपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सुकमा, मुंगेली, सरगुजा, बलौदाबाजार, भाटापारा, बालोद, रायपुर, दंतेवाड़ा, बलरामपुर एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला के किसान एचडीएफसी जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।

किसान कैसे करायें फसलों का बीमा

योजना में ऋणी और अऋणी किसान जो भू-धारक व बटाईदार हैं वे शामिल हो सकते हैं। ऐसे किसान जो अधिसूचित ग्राम में अधिसूचित फसल के लिए बीमा कराना चाहते हैं वे नियत तिथि के पूर्व अपना फसल बीमा करा सकते हैं। इसके लिए किसान अपना आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका, बी-1 पंचशाला खसरा, बैंक पासबुक की छायाप्रति एवं बोनी प्रमाण पत्र के साथ पंजीयन कराना होगा। किसान बैंक अथवा चॉईस सेंटरों के माध्यम से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।

फसल बीमा पोर्टल पर बिना आधार प्रमाणीकरण के बीमा मान्य नहीं होगा। फसल लगाने वाले सभी अऋणी किसानों को प्रस्ताव पत्र के साथ नवीनतम आधार कार्ड की छायाप्रति, नवीनतम भूमि प्रमाण-पत्र (बी-1, खसरा) की कॉपी, बैंक पासबुक के पहले पन्ने की कॉपी जिस पर एकाउंट, आईएफएससी कोड, बैंक का पता साफ-साफ दिख रहा हो, फसल बुवाई प्रमाण-पत्र अथवा प्रस्तावित फसल बोने का आशय का स्व-घोषणा पत्र, किसान का वैध मोबाईल नंबर एवं बटाईदार, कास्तकार, साझेदार किसानों के लिये फसल साझा, कास्तकार का घोषणा पत्र इत्यादि दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा

अब रेशम के धागे से बनेंगी दवाइयाँ, क्रीम और ड्रेसिंग बैंडेज: किसानों को मिलेगा फायदा

देश में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग खोलने के साथ ही किसानों के द्वारा उपजाए जाने वाले कच्चे माल का उद्योगों में इस्तेमाल करना है। इस कड़ी में रेशम उत्पादक किसानों को लाभ मिल सके इसके लिए सरकार ने रेशम से दवाइयाँ, क्रीम और ड्रेसिंग बैंडेज बनाने का निर्णय लिया है।

मध्यप्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने नर्मदापुरम संभाग में जारी रेशम विकास गतिविधियों के अवलोकन के दौरान निर्देश दिये थे कि रेशम उत्‍पादों का प्रयोग कर रेशम धागे से दवाईयों के उत्पादन में भी किया जाये। जैसा कि फिलहाल रेशम के वस्‍त्रों का उपयोग सदियों से किया जा रहा है।

रेशम के धागों का इस्तेमाल होगा दवाइयाँ बनाने में

अब रेशम के धागों का उपयोग दवाईयां एवं सर्जिकल ड्रैसिंग बनाने के लिये किया जायेगा। इसके लिये किसानों का सारा का सारा ककून क्रय कर लिया जाएगा। इससे रेशम से समृद्धि योजना के तहत रेशम उत्पादों, के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। अब रेशम धागे से क्रीम, बैंडेज, पावडर, प्रोटीन, सौंदर्य उत्‍पाद भी बनाए जाएंगे। सिल्‍क बैंडेज होने से ऑप्टिमाइज हीलिंग होगी और इससे 30 प्रतिशत व्‍यय भार भी कम आयेगा और रिकवरी भी जल्द होगी।

उल्लेखनीय है कि ड्रग्स कंट्रोलर, भारत सरकार द्वारा गत 16 नवंबर 2020 को आईंटमेन्ट्स, जैल, एजीफोम, फाइब्रोहिल उत्‍पादों को मान्‍यता दे दी गयी है। मान्यता मिलने से एम्स एवं गांधी चिकित्‍सा महाविद्यालय, भोपाल द्वारा इसका अधिकाधिक उपयोग किया जा रहा है।

कंपनियों को भेजा जाएगा कच्चा माल

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री श्री जायसवाल के निर्देश पर नर्मदापुरम संभाग से रेशम से दवाईयां एवं सर्जिकल ड्रेसिंग बनाने के लिये अधिकाधिक कच्चा माल कम्पनियों को भेजा जायेगा। इससे रेशम उत्पादक किसानों को भी विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। भोपाल के प्रख्‍यात सर्जन डॉ. अभिजीत देखमुख द्वारा इस संबंध में मेंटर के रूप में कार्य किया जा रहा है। इस तरह के उत्‍पाद आने से अब रेशम उत्पादक किसानों और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग दोनों को लाभ मिलेगा।

महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण, दी जाएगी यह जानकारी 

महिला किसानों की कृषि में भागीदारी सुनिश्चित करने एवं खेती-बाड़ी से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार महिला किसानों को प्रशिक्षण देने जा रही है। महिला किसानों को यह प्रशिक्षण एक दिन के लिए दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए सभी जिलों हेतु लक्ष्य जारी कर दिया हैं। इस संबंध में दौसा जिले के संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. प्रदीप कुमार अग्रवाल ने बताया कि जिले को प्राप्त एक दिवसीय महिला कृषक प्रशिक्षण के भौतिक लक्ष्य सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षकों को ग्राम पंचायतवार आवंटित कर विभागीय दिशा निर्देश अनुसार प्रशिक्षण आयोजित करने हेतु निर्देश प्रदान किए गए हैं।

प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए क्या करना होगा?

ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले एक दिवसीय महिला कृषक प्रशिक्षण में भाग लेने वाली महिला किसान स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक एवं सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क कर प्रशिक्षण में भाग लेने हेतु अपना नाम प्रशिक्षण आयोजन तिथि से 07 दिन पहले लिखवा सकती हैं। प्रशिक्षण में भाग लेने वाली सभी महिलाओं का साक्षर होना आवश्यक है एवं कृषि कार्य करने हेतु भूमि होना आवश्यक है। प्रशिक्षण का आयोजन ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा, एक प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत क्षेत्र की कुल 30 साक्षर महिला किसानों को शामिल किया जाएगा। प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा खेती-बाड़ी से जुड़ी नवीनतम तकनीकी जानकारी एवं कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

महिला किसानों को प्रशिक्षण में दी जाएगी यह जानकारी

कृषि अधिकारी (प्रशिक्षण) दौसा अशोक कुमार मीना ने बताया कि राज्य योजना के अन्तर्गत आयोजित होने वाले एक दिवसीय महिला कृषक प्रशिक्षण में विभाग के अधिकारियों द्वारा महिला किसानों को किचन गार्डन, खरीफ व रबी फसलों में लगने वाले प्रमुख कीट-रोगों के नियंत्रण की जानकारी, खरीफ एवं रबी फसलों की उन्नत कृषि विधियों की जानकारी व कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा संचालित अनुदान की योजनाओं यथा कांटेदार तारबंदी, फार्म पौंड, सिंचाई पाइप लाइन, कृषि यंत्र, नेपियर घास, परंपरागत कृषि विकास योजना, चाफ कटर, रिज एंड बेड मेकर, फव्वारा संयंत्र, पोली हाउस, शेड नेट हाउस, सोलर संयंत्र, नवीन फलदार बगीचा स्थापना एवं सुपर कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट, गर्मी की गहरी जुताई के बारे में जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण में महिलाओं को कृषि से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी देकर कृषि के क्षेत्र में महिलाओं को और अधिक जागरूक किया जाएगा। जिससे कृषि विभाग की योजनाओं से जिले की अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा सके। प्रशिक्षण के बाद महिला किसानों द्वारा योजनाओं को खेती-बाड़ी में अपनाया जाएगा, जिससे महिला किसानों की कृषि आय में भी बढ़ोतरी हो सकेगी।

शौक पूरा करने के लिए महिला ने शुरू किया मशरूम उत्पादन, साल भर में ही हो गई लाखों रुपये की कमाई

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सरकार ने महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की है, जिनका लाभ लेकर महिलाएँ अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर रही है। ऐसी ही छत्तीसगढ़ की एक महिला ने मशरूम की खेती कर साल भर में ही लाखों रुपये की कमाई की है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की इस महिला ने दो विषयों में पोस्टग्रेजुएट और बी.एड. की डिग्री प्राप्त की है। दुर्ग जिले के छोटे से गाँव मतवारी में रहने वाली जागृति साहू की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है।

एक साल में बेचा 33 लाख रुपये का मशरूम

मशरूम उत्पादन का सुझाव जागृति साहू के पति चंदन साहू ने दिया था क्योंकि उनकी बेटी को मशरूम बहुत था। बेटी के शौक़ को पूरा करने के लिए ही जागृति साहू ने मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। बेटी की पसंद की वजह से जागृति ने यह कार्य प्रारंभ किया। साल 2019 में, जागृति ने 33 लाख रुपये का मशरूम बेचा। जागृति ने अपने साथ और महिलाओं को भी मुनाफ़ा दिलाया। वे अपने आस-पास के गाँव की दीदियों को भी प्रशिक्षण देकर स्वावलंबन की राह दिखा रही हैं।

जागृति का सफर यहीं नहीं रुका। जागृति ने शासन की योजनाओं का लाभ लिया और एक सामान्य महिला से अपनी अलग पहचान बनाई। मशरूम की खेती से नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करने पर उन्हें मशरूम लेडी ऑफ़ दुर्ग कहा जाने लगा। जागृति का सफ़र एक सामान्य महिला से लेकर लखपति दीदी बनने और आज ड्रोन दीदी के रूम में कृषि को उन्नति की ओर ले जा रहा है।

अब बनी ड्रोन पायलट

जागृति साहू ने अब नमो ड्रोन दीदी में चयनित होकर ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। आज वह एक प्रमाणित ड्रोन पायलट हैं और ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं। ड्रोन के माध्यम से वह खेतों में दवाइयों का छिड़काव करती हैं और इस नई तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाती हैं। इससे किसानों का समय तो बचता है साथ ही श्रम और खर्च भी कम होता है।