इस पोर्टल पर पंजीयन कर किसान एक साथ ले सकेंगे कई योजनाओं का लाभ

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ekikrat kisan portal

एकीकृत किसान पोर्टल

सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनओं का लाभ किसानों तक पारदर्शिता एवं आसानी से पहुँचाने के लिये योजनाओं को अब ऑनलाइन किया जा रहा है | अभी तक किसानों को विभिन्न योजनओं का लाभ लेने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और प्रत्येक योजना के लिए अलग-अलग आवेदन करना पड़ता है जिससे उन्हें समय पर योजना का लाभ नहीं मिल पाता | योजनाओ के डिजिटलीकरण से किसान पारदर्शिता से समय पर योजना का लाभ ले सकेंगे | छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने किसानों के लिए एक पोर्टल विकिसत किया है जिस पर पंजीयन कर किसान कई योजनाओं का लाभ ले सकते हैं |

छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों को शासन के विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने हेतु अलग-अलग योजनाओं/विभाग में पंजीयन करना होता है जिससे कृषकों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है | इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के कृषकों का एक ही बार पंजीयन होगा जो कि शासन द्वारा निर्धारित विभिन्न योजनाओं हेतु उपयोग किया जा सकेगा |

मुख्यमंत्री ने लांच किया “एकीकृत किसान पोर्टल”

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय में कैबिनेट की बैठक के पहले एकीकृत किसान पोर्टल लॉन्च किया। कृषि विभाग के सहयोग से एनआईसी द्वारा तैयार एकीकृत किसान पोर्टल पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना तथा कोदो-कुटकी, रागी उपार्जन योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को एक बार ही पंजीयन कराना होगा।

किसान आसानी से कर सकेंगे पंजीयन

कृषि उत्पादन आयुक्त एवं कृषि विभाग की सचिव डॉ.एम.गीता ने एकीकृत पोर्टल के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न योजनाओं के लिए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया का इस पोर्टल के माध्यम से सरलीकरण किया गया है, इससे विभिन्न योजनाओं के लिए किसानों का सुगमतापूर्वक पंजीयन हो सकेगा। एकीकृत पोर्टल के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रबंधन, पर्यवेक्षण एवं रिपोर्टिंग में आसानी होगी। एकीकृत किसान पोर्टल में भूमि एवं गिरदावरी के भुइंया पोर्टल से ऑनलाईन सत्यापन होगा तथा सटीक एवं त्वरित डाटा प्राप्त किया जा सकेगा। किसानों की जमीन के भौतिक सत्यापन तथा योजनाओं के तहत किसानों को दी जाने वाली राशि की गणना में भी पोर्टल से आसानी से होगा। इस पोर्टल पर उपलब्ध डाटा को आवश्यकतानुसार कैरी फार्वर्ड भी किया जा सकेगा।

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30 सितम्बर तक करें राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत आवेदन

राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों का खसरावार, फसलवार पंजीयन एकीकृत पोर्टल में सहकारी समिति के माध्यम से 30 सितम्बर तक किया जाएगा। कृषक के आवेदन तथा दस्तावेज का प्रारंभिक परीक्षण ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किया जाएगा। वर्ष 2020-21 में धान उपार्जन हेतु पंजीकृत किसानों को पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं है। इन पंजीकृत किसानों के डाटा को एकीकृत पोर्टल में उपयोग किया जाएगा। एकीकृत पोर्टल को भुंईयां पोर्टल से लिंक किया गया है। पंजीयन के समय सहकारी समिति द्वारा कृषक के खसरावार भूमि का विवरण भुंईयां से मिलान किया जाएगा।

भूमि विवरण एवं गिरदावरी आंकड़े का भुंईयां पोर्टल से स्वमेव ऑनलाईन सत्यापन होगा। राजीव गांधी किसान न्याय योजना तथा धान उपार्जन के लिए वन पट्टाधारी कृषकों का पंजीयन एकीकृत पोर्टल से सहकारी समिति के माध्यम से किया जाएगा। कृषक के आवेदन तथा दस्तावेज का प्रारंभिक परीक्षण ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किया जाएगा। संस्थागत, लिजी, अधिया, रेगहा, बटाईदार, डूबान क्षेत्र हेतु धान उर्पाजन से संबंधित कृषकों के पंजीयन की कार्यवाही खाद्य विभाग द्वारा सहकारी समिति के माध्यम से की जाएगी। इस हेतु पृथक से लिंक एकीकृत पोर्टल पर दिया जाएगा।

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फसल उपार्जन के लिए भी किया जायेगा पंजीयन

धान उर्पाजन हेतु नवीन पंजीयन, संशोधन राजीव गांधी किसान न्याय योजना के एकीकृत पोर्टल में किया जाएगा। गत वर्ष में धान पंजीकृत एवं विक्रय रकबे में धान के बदले अन्य वैकल्पिक फसल व वृक्षारोपण करने वाले कृषकों का पंजीयन एकीकृत पोर्टल में किया जाएगा। वन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना अंतर्गत वन अधिकार पट्टाधारक, ग्राम पंचायतों एवं संयुक्त वन समिति के पंजीयन हेतु विकसित पोर्टल एकीकृत पोर्टल से लिंक किया गया है, ताकि आवेदकों को पंजीयन हेतु सिंगल विंडो प्रदाय किया जा सके।

वृक्षारोपण का पंजीयन 30 नवम्बर तक होगा। आवेदन पत्र को संबंधित वन परिक्षेत्र कार्यालय में जमा किया जाएगा। परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा दस्तावेज सत्यापन उपरांत पोर्टल में दर्ज किया जाएगा। स्थल सत्यापन जी.पी.एस. के माध्यम से वन मंडलाधिकारी द्वारा किया जाएगा। राजीव गांधी किसान न्याय योजनांतर्गत कोदो-कुटकी एवं रागी फसल भी सम्मिलित है। अनुसूचित क्षेत्र के कृषकों से कोदो-कुटकी एवं रागी का उपार्जन एकीकृत पोर्टल में पंजीकृत कृषकों के डॉटा के अनुसार लघु वनोपज संघ द्वारा उपार्जन किया जाएगा।

एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकरण हेतु क्लिक करें

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