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रविवार, जून 23, 2024
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आम के अच्छे उत्पादन के लिए अभी करें इन दवाओं का छिड़काव

मंजर के समय करें आम की दवा

आम के पेड़ों में मंजर (बौर) आना शुरू हो गए हैं,  अब समय आ गया है कि मंजरों की देख–भाल ठीक ढंग से की जाए | इस समय देश में मौसम परिवर्तन की स्थिति रहती है जिसके चलते आम पर कीट एवं रोग बढ़ने की सम्भावना अधिक होती है | कभी–कभी ऐसा देखा गया है कि भरपूर मंजर आने के बावजूद आम के मंजरों की सुरक्षा नहीं हो पाने के कारण फलन बहुत कम हो जाता है या कभी–कभी नहीं हो पता है | आम के मंजरों पर मुख्य रूप से मधुआ कीट, धिया कीट, मृदारोमिल (पाउडरी मिल्ड्यू) आदि जैसे कीट व्याधियों का आक्रमण होता है | इससे आम के मंजरों की सुरक्षा के लिए अनुशंसित दवाओं का तीन बार छिडकाव सही समय पर करने से इन कीट–व्याधियों पर नियंत्रण किया जा सकता है, जिससे आम का अच्छा उत्पादन प्राप्त होगा |

कीट नियंत्रण के लिए कब करें कीटनाशक का प्रयोग

आम में पहला छिडकाव मंजर निकलने के पहले किसी एक अनुशंसित कीटनाशक से किया जाता है, जिसे किसान पेड़ को धोना कहते हैं | पहला छिडकाव इस तरह करना चाहिए कि कीटनाशी पेड़ की छाल के दरारों में छुपे मधुआ कीट तक दवा पहुंचे, क्योंकि वायुमंडल का तापमान बढने के साथ–साथ इनकी संख्या में वृद्धि होने लगती है | आम के मंजरों पर दूसरा छिडकाव सरसों के बराबर दाना लग जाने पर कीटनाशी के साथ–साथ किसी एक फफूंदनाशी को मिलाने की अनुशंसा है, जो मंजर को पाउडरी मिल्ड्यू आदि रोग से बचाता है तथा आम के टिकोले को गिरने से रोकता है | आम के टिकोले मटर के दाने के बराबर हो जाने पर तीसरा छिडकाव किया जाना चाहिए | फ़रवरी माह में आम के पौधों पर लीफमाइनर कीड़ों का प्रकोप होता है |

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आम के मंजर(बौर) बचाने के लिए करें इस दवा का प्रयोग

  1. आम के मंजर को कीट से बचाने के लिए डायमेथोइड या मेटासिस्टाक 1.5 एम.एल.प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिडकाव करें |
  2. या लमीडाक्लोपरिड 17.8 SL को 0.4 मिली. प्रति लीटर पानी में मिलकर छिडकाव करें |

इस कीटनाशक का प्रयोग आम के अलवा अमरुद तथा नींबू के पौधों पर भी कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त आम में लगने वाले कीट एवं रोगों से बचाने के लिए कृषक भाई अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर वैज्ञानिकों से जानकारी ले सकते हैं |

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14 टिप्पणी

    • जब भुनगा की संख्या 5-10 प्रति बौर हो, इमिडाक्लोप्रिड का पहला छिड़काव 1 मिली. प्रति 3 ली. पानी में (जब पुष्प गुच्छ 7-10 सेमी. का हो) करें। दूसरा छिड़काव पुष्प गुच्छ खिलने से पूर्व या फल बैठने के बाद (आवश्यकतानुसार) प्रोफेनोफ़ॉस 50 ई.सी. (1.5 मी.ली. प्रति ली. पानी में) या थायामेथोक्जाम 25 डब्लू.जी. (0.5 ग्रा. प्रति ली.पानी में) का करें। ध्यान रहे की फूल पूरे खिलने के अवस्था में छिड़काव नहीं किया जाए अन्यथा परागण करने वाले कीट भी नष्ट हो जायेंगे। यदि आवश्यकता हो तो कार्बरिल (2 ग्रा. प्रति ली. पानी में) का तीसरा छिड़काव फल बड़े होने के बाद करें।

    • मधुआ छोटे आकार का सिलेटी गहरे एवं भूरे रंग का फुदकने वाला कीट है इसकी पहचान बेहद आसान है। आम के बगानों से गुजरने पर भनभनाहट की आवाज के साथ उड़ते हुए यह आदमी के अंगों से टकरा जाता है। किसान इसी से इसके प्रकोप का अनुमान लगाते हैं। कीटनाशी रसायन के रूप में इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल कि एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मात्रा । इसके अलावा एसिफेट 75 प्रतिशत एसपी एक ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा सल्फर 80 प्रतिशत डब्ल्यूपी तीन ग्राम प्रति लीटर के साथ मिलाकर मंजर में छिड़काव कर सकते है। मंजर में सरसों के बराबर दाना बन जाने पर इमिडाक्लोप्रिड के प्रति तीन लीटर पानी के साथ कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण का तीन ग्राम अथवा कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण एक ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ फल गिरने से बचाने के लिए प्लानोफिक्स का एक मिलीलीटर सवा दो लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना जरूरी है।

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