अच्छे फल के लिए गर्मी में आम के पौधों की इस तरह करें देखभाल

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mango monthwise

गर्मी में आम के पौधों की देखभाल

अभी आम का सीजन है और भारत आम उत्पादक तथा उपभोगता में पहले स्थान पर है | अभी आम में फूल (बोर,मंजर) लगा हुए  है , इसकी देख – भाल करना जरुरी है | इससे पौधे में आम ज्यादा से ज्यादा लगेंगे | इसकेलिए आम के पौधों तथा मंजर की विशेष रूप से रख – रखाव करना जरुरी है | किसान समाधान आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए विशेष रूप से जानकारी लेकर आया है |  

मार्च

चूर्णी फफूंद के नियंत्रण के लिए ट्राइडेमार्फ़ (कैलिक्सीन की दर 0.1 अर्थात 1 मि.ली./ली.) का दूसरा छिड़काव करें | इस बात का ध्यान भी रखा जाना चाहिए की दूसरा छिड़काव फूलों के निकलने से पहले कर दिया जाए | माह के तीसरे अथवा चौथे सप्ताह में, डाइनोकैप अथवा ट्राइडेमाफोन (काराथेन अथवा बेलेटान) 0.1% (1 मि.ली. अथवा 1 ग्रा./ली.) का छिड़काव किया जाता है | तीसरा छिड़काव तब किया जाता है जब फल समूह उग चुके हों | इस मास के दौरान, आम के टिड्डों का संयुक्त रूप से नियंत्रण करना चाहिए |

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अप्रैल

यदि पुष्प गुच्छों पर ब्लासम बलाइट अथवा एंथ्राकनोज दिखाई पड़े तो कार्बेनडेजीम (बेविस्टन) का 0.1% (1 ग्रा./लीटर) की दर से छिड़काव किया जाना चाहिए | साथ ही साथ प्रभावित पत्तियों और टहनियों को हटाकर जला देना चाहिए ताकि इस को नियंत्रण में रखा जा सके |

मई

इस अवधि के दौरान ब्लैक टिप अथवा आंतरिक नेक्रोसिस के नियंत्रण के लिए बोरेक्स के 1 प्रतिशत की दर से तिन छिड़काव वांछनीय है | चूंकि बोरेक्स साधारण ठंडे पानी में आसानी से नहीं घुलता इसलिए इसे पहले गुनगुने पानी की थोड़ी मात्र में घोलना चाहिए और बाद में वांछित मात्रा के अनुसार मात्रा बढायी जानी चाहिए |

संक्रमण के नियंत्रण के लिए थायोफेनेट मिथाइल अथवा कार्बेनदेजीम (टाप्सीन एम. अथवा बेवीस्टीन) का 0.1 (1 ग्रा./लि.) की दर से 1 – 2 छिड़काव किया जा सकता है ताकि आम के फलों की तुडाई – उपरांत रोगों से रक्षा की जा सके | कज्जली फफूंद के नियंत्रण हेतु वेटेबल सल्फर + मोनोक्रोटोफ़ोस + कीकर गौंद (क्रमश: 0.2, 0.05 और 0.3%) के मिश्रण का छिड़काव किया जा सकता है | कज्जली फफूंद के निय्न्त्रंके लिए 3% सांद्रता वाला इंडियन आयल फारम्यूलेशन (ट्री स्प्रे आयल) भी प्रभावकारी है | इस तरह से आप अपनी आम की सुरक्षा कर सकते हैं तथा अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं |

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आम के फूल (मंजर) में कीट तथा रोग

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