क्या आधुनिक तरीके से खेती करने से मुनाफा बढ़ जाता है, क्या कहते हैं आकडे ?

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आधुनिक खेती

आधुनिक खेती फायदे का सौदा है या घाटे का

कृषि में लगातार नुकसान झेलने के बाद किसान को यह समझ नहीं आ रहा है की खेती कैसे किया जाए की कृषि में मुनाफा हो सके | किसानों को लगातार नुकसानी के कारण कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है | लेकिन इस मुद्दे पर जिस किसी से बात करें तो सीधा सा जवाब देते हैं की वैज्ञानिक तरह से खेती करने पर मुनाफा बढ़ जायेगा | अब तो केंद्र सरकार ने भी यह कहना शुरू कर दिया है की किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुना कर दिया जायेगा | इस नारे में सच्चाई कम दिखती है क्योंकि सरकार के आमदनी दुगना करने की फार्मूला उन्नत तरह से खेती करना को बताते हैं | लेकिन एसा नहीं हो सकता है क्योंकि किसानों की आय उत्पादन से नहीं बल्कि अच्छी कीमत नहीं मिलने के कारण है |

अब बात यह आती ही की कैसा कहा जा सकता है की किसानों की उन्नत तरीके से खेती करने से ज्यादा मुनाफा नहीं हो सकता है | पहले यह समझते हैं की उन्नत तरह से खेती किसे कहते हैं |

आधुनिक खेती के मापदंड ?

इसके लिए कुछ मापदंड रखते हैं | जैसे :-
  • खेती के लिए मल्चिंग , ड्रीप, या किसी और तरह से खेती करना |
  • उन्नत बीज
  • मशीन से जुताई अधिक मात्र या फसल के अनुसार उर्वरक
  • खरपतवार नियंत्रण
  • रासायनिक दवा से रोग तथा कीट की रोकथाम
  • सिंचाई के लिए नये – नये उकरण (ड्रिप विधि) का उपयोग

यह सभी तरह के उपकरण , कीटनाशक, उर्वरक उपयोग करने के लिए सरकार , कृषि वैज्ञानिक उपयोग करने को कहते हैं लेकिन कभी यह नहीं जोड़ा जाता है की इसकी लागत कितनी है तथा इससे फसल उत्पादन पर कितना खर्च बढेगा |

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क्या कहते हैं आकड़ें ?

अब कुछ आकड़ों से समझने की कोशिश करते हैं | केंद्र सरकार की एक संस्था है कृषि खर्च एवं मूल्य आयोग (CACP) जो केंद्र सरकार को प्रति वर्ष किसानों के फसल का मूल्य तय करता है तथा कृषि की समिक्षा करती है | यह संस्था यह बताती है की उन्नत तरह से खेती करने से उत्पादन तो ज्यादा होता है लेकिन आमदनी नहीं बढती है |

इसके लिए दो राज्य का उदाहरण लेते हैं ,बिहार और पंजाब |  बिहार में प्रति हेक्टयर गेंहू की उत्पादन 30 क्विंटल है जबकि पंजाब में गेंहू की उपात्दन प्रति हेक्टयर 46.4 किवंटल या इससे ज्यादा है | अब इसे आकड़ें को देखने से यह मालूम चलता है की पंजाब के किसानों को बिहार से ज्यादा मुनाफा होता होगा |

लेकिन दूसरी तरफ यह है की बिहार के किसानों को प्रति किवंटल उत्पादन लागत 1552 रुपया है , जबकि पंजाब के किसानों को प्रति किवंटल लागत 2458 रुपया है | अब इस बात को एसे समझे की प्रति हेक्टयर लागत दोनों राज्यों का कितना होगा | तो बिहार के किसानों को प्रति हेक्टयर लागत 46,560 रुपया है , जबकि पंजाब के किसानों की प्रति हेक्टयर उत्पादन लागत 1,14051 रुपया है |

तो अब जानते हैं आधुनिक खेती से कितना फायदा हुआ ?

अब यहाँ पर किसानों की मुनाफा को निकालना होगा | तो इस वर्ष केंद्र सरकार ने गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रूपये रखा है | अगर यह मान लेते हैं की किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता है तो बिहार के किसान को प्रति हेक्टयर 55,200 रुपया मिलेगा | जबकि पंजाब के किसान को प्रति हेक्टयर 85,376 रुपया मिलेगा | अब दोनों राज्यों के किसानों की कुल बचत को निकलते हैं | बिहार के किसान को प्रति हेक्टयर उत्पादन लागत 46,560 रुपया है और गेंहू बेचने पर 55,200 रुपया प्राप्त हुआ | जिससे बिहार के किसान को प्रति हेक्टयर 8640 रुपया का मुनाफा हुआ | दूसरी तरफ पंजाब के किसानों का गेंहू का प्रति हेक्टयर उत्पादन लागत 1,14051 रुपया है तथा उसी गेंहू को बेचने पर 85,376 रुपया प्राप्त हुआ | जिससे पंजाब के किसान को प्रति हेक्टयर 28,675 रुपया है |

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इसका सारांश यह निकला की पंजाब के किसान उन्नत तरह से खेती करने के बाबजूद भी कोई मुनाफ तो नहीं कम रहा है बल्कि उन्हें घाटा ही हो रहा है | दूसरी तरफ बिहार के किसान उन्नत तरह से खेती नहीं करने के कारण उत्पादन तो कम है लेकिन आमदनी तो हो रही है | सरकार और किसान इस बात पर ध्यान कम दें की वैज्ञानिक तरह से खेती करने में मुनाफा ज्यादा होगी बल्कि इस बात का ज्यादा धयान देना चाहिए की किसान को उसकी फसल का सही मूल्य कैसे मिलेगा |  यह डाटा को ध्यान में रखकर ही जैविक खेती की और अधिक जोर दिया जा रहा है और जीरो बजट खेती का कांसेप्ट पर ध्यान दिया जा रहा है जिससे लागत को कम से कम किया जा सके |

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