जानिए क्या है टर्बो हैप्पी सीडर कृषि यंत्र, किसान कैसे इसके उपयोग से कर सकते कम लागत में गेहूं की बुआई

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टर्बो हैप्पी सीडर कृषि यंत्र

आधुनिक खेती में कृषि यंत्रों के बढ़ते महत्व को देखते हुए नए-नए तरह के कृषि यंत्र विकसित किए जा रहे हैं | किसान इन कृषि यंत्रों को अपनाकर कम समय एवं कम लागत से अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं | बढ़ते वायु प्रदुषण के चलते सरकार द्वारा फसल अवशेष को जलाने पर पाबन्दी लगा दी गई है | ऐसे में सरकार द्वारा किसानों को ऐसे कृषि यंत्रो के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे किसानों को पराली एवं फसल अवशेष जलाने की आवश्यकता न पड़े और फसल अवशेष का उपयोग खाद के रूप में किया जा सके | आज हम आपको ऐसे ही कृषि यंत्र के बारे में जानकारी देंगे जिससे न केवल फसल अवशेष जलाने से बचा जा सकता है बल्कि इससे फसलों की पैदावार भी बढ़ती है |

कम्बाइन द्वारा कटाई के बाद धान के फसल अवशेषों को किसान जला देते है जो मिट्टी और वायु दोनों के लिए हानिकारक है | मिट्टी और वायु प्रदुषण रोकने के लिए अब ऐसे कृषि यंत्र विकसित किए जा रहे हैं जिसमें किसान फसल अवशेषों में ही आने वाली दूसरी फसल की बुआई कर सकते हैं एवं फसल अवशेष का उपयोग खाद के रूप में हो जाता है | ऐसे ही कृषि यंत्र हैं जीरो ट्रिल ड्रिल, हैप्पी सीडर आदि |

क्या है टर्बो हैप्पी सीडर

टर्बो हैप्पी सीडर यंत्र में दो इकाइयाँ होती है – एक फसल अवशेष प्रबन्धन के लिए तथा दूसरी बुआई के लिए | फसल अवशेष प्रबन्धन के लिए ही टर्बो हैप्पी सीडर का विकास किया गया है | हैप्पी सीडर में ही संशोधन करके टर्बो हैप्पी सीडर विकसित किया गया है | इसके उपयोग से सम्पूर्ण धान अवशेष (6-8 टन/हैक्टर) में आसानी से बुआई की जा सकती है | इस मशीन द्वारा कम्बाइन हार्वेस्टर से कटे खेत में फसल अवशेष में गेहूं की बुआई की जाती है | इससे किसानों द्वारा फसल अवशेष का उपयोग मल्चिंग के रूप में किया जाता है |

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इस मशीन द्वारा 22 से.मी. पंक्ति से पंक्ति की दुरी पर 9 पंक्ति व 11 पंक्तियों में बुआई एक साथ बिना जूते खेत में की जाती है | इसके साथ में धान के फसल अवशेषों को पंक्तियों के बीच में पीटीओ द्वारा चलित रोटरी ब्लेड समान रूप से फैला देता है | इसके साथ-साथ बुआई की जाने वाली पंक्तियों को फसल अवशेष रहित (पुआल) करते हुए बीज एवं खाद को उचित गहराई में स्थापित करने में सहायता करता है | इससे फसल का जमाव समान रूप से होता है |

गेहूं की हैप्पी सीडर से बुआई

शून्य जुताई की श्रेणी में हैप्पी सीडर तकनीक हाल में अधिक प्रचलित हो गई है | हार्वेस्टर द्वारा धान की कटाई के बाद पारंपरिक तरीके से गेहूं की बुआई करने पर क्षेत्र क्षमता लगभग 45 प्रतिशत जबकि हैप्पी सीडर की 65 प्रतिशत तक पाई गई है | हैप्पी सीडर द्वारा बुआई किए जाने से दो बार की जुताई एवं प्रथम सिंचाई की बचत होती है और फसल अवशेषों को जलाने से रोका जा सकता है | इस विधी को अपनाने से समय की बचत, इंधन की खपत को कम करके कार्बन उत्सर्जन में कमी की जा सकती है |

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टर्बो हैप्पी सीडर की विशेषताएं

  • इस मशीन का उपयोग करने के लिए 10 से 12 लीटर/हैक्टर डीजल की खपत तथा 5 से 6 घंटे समय की आवश्यकता होती है | इसके साथ ही किसानों को जुताई पर आने वाले खर्च में कमी होती है |
  • इस मशीन से बुआई करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाये रखने में मदद मिलती है साथ-साथ फसल अवशेष न जलने से वातावरण के लिए अच्छी है | हैप्पी सीडर से बोई फसल की पंक्तियों के बीच में अवशेषों को फैला देता है, इससे मृदा की नमी सरंक्षित रहती है तथा अवशेषों को न जलाने से वायु में प्रदुषण कम हो जाता है | अवशेष सड़कर खाद बनकर फसल की उत्पादकता में वृद्धि करते हैं |
  • मशीन के प्रयोग से सही बीज दर, उचित पंक्ति एवं बीज व पौधे की दुरी, उचित गहराई में बीज एवं खाद पड़ने से फसल की पैदावार अच्छी होती है |

टर्बो हैप्पी सीडर की कीमत क्या है ?

इस मशीन के उपयोग के लिए 45 से 50 हार्स पॉवर ट्रेक्टर की आवश्यकता होती है | इस प्रकार से लगभग 6 टन/हैक्टर फसल अवशेष का प्रबंधन करके 5 से 10 प्रतिशत अधिक उत्पादन, 50-60 प्रतिशत कम लागत पर प्राप्त की जा सकती है | टर्बो हैप्पी सीडर मशीन 9 टाईन की कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये के आसपास है |

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