किसान सलाह

धान की पत्तियां हो रही पीली और बालियां सफेद? इस कीट का हो सकता है प्रकोप, जानें नियंत्रण का तरीका

धान की फसल में तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क किया है। जानें कीट की पहचान, प्रमुख लक्षण, दवा और नियंत्रण के उपाय।

Paddy Stem Borer and Leaf Folder Control

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए जरूरी खबर है। धान की फसल में तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और कीटों के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाने को कहा गया है।

कृषि विभाग के अनुसार समय रहते कीटों की पहचान कर नियंत्रण करने से फसल में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वहीं आवश्यकता से अधिक उर्वरक का इस्तेमाल और खेत में लंबे समय तक ज्यादा पानी भरा रहना कीटों के प्रकोप को बढ़ा सकता है।

धान में तना छेदक कीट की ऐसे करें पहचान

तना छेदक धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों में से एक है। शुरुआती अवस्था में किसान कुछ खास लक्षणों को देखकर इसके प्रकोप की पहचान कर सकते हैं। प्रभावित पौधों की पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगती हैं। तने के निचले हिस्से में छोटे-छोटे छेद दिखाई दे सकते हैं और मुख्य तना अंदर से खोखला हो जाता है। इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर किसानों को प्रभावित पौधों की तत्काल जांच करनी चाहिए।

धान की बालियां सफेद पड़ना गंभीर प्रकोप का संकेत

तना छेदक का प्रकोप अधिक बढ़ जाने पर धान की बालियां सफेद होकर सूख सकती हैं। इससे दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और उपज में कमी आने का खतरा रहता है। इसलिए खेत में कुछ पौधों की पत्तियां अचानक पीली पड़ने, तने में छेद दिखाई देने या बालियां सफेद होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए क्या करें?

कृषि विभाग ने तना छेदक की रोकथाम के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत + साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत) का उपयोग करने की सलाह दी है। विभागीय सलाह के अनुसार इसकी 50 मिलीलीटर मात्रा प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है। किसान किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल करते समय उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देश, स्थानीय कृषि विभाग की सलाह और आवश्यक सुरक्षा सावधानियों का पालन करें।

पत्ती मोड़क यानी ‘सांवा कीट’ भी पहुंचाता है नुकसान

धान की फसल में पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे ‘सांवा कीट’ भी कहा जाता है। इसकी हरी इल्ली धान की पत्ती को मोड़कर उसके अंदर छिप जाती है और पत्तियों के हरे हिस्से को खाना शुरू कर देती है। इससे पौधे की पत्तियों को नुकसान पहुंचता है और फसल की सामान्य वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

पत्तियों पर सफेद-पारदर्शी धारियां दिखें तो रहें सतर्क

पत्ती मोड़क कीट के हमले की एक महत्वपूर्ण पहचान धान की पत्तियों पर दिखाई देने वाली सफेद या पारदर्शी धारियां हैं। कीट द्वारा पत्ती के हरे भाग को खाने से पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है। यदि खेत में मुड़ी हुई पत्तियों के साथ ऐसी धारियां दिखाई दें तो किसानों को सावधानी से पौधों का निरीक्षण करना चाहिए। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर कीट को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

पत्ती मोड़क कीट के लिए कृषि विभाग ने बताए ये विकल्प

कृषि विभाग ने पत्ती मोड़क के नियंत्रण के लिए दो विकल्प बताए हैं किसान इनमें से किसी एक का भी उपयोग कर सकते हैं।

  • क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (Chlorantraniliprole 18.5% SC): 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर
    अथवा
  • एमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (Emamectin Benzoate 5% SG): 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर

किसानों को कीटनाशक का इस्तेमाल वास्तविक प्रकोप और विभागीय अनुशंसा के अनुसार ही करना चाहिए।

कृषि विभाग कि किसानों के लिए जरूरी सलाह

सावधानी

विवरण

संतुलित उर्वरक प्रयोग

नाइट्रोजन (यूरिया) का अत्यधिक प्रयोग न करें; आवश्यकतानुसार ही संतुलित खाद दें।

उचित जल प्रबंधन

खेत में लगातार अधिक जलभराव न रहने दें, बीचबीच में पानी निकासी की व्यवस्था करें।

नियमित निरीक्षण

पत्तियों के मुड़ने या पीला पड़ने पर तुरंत बताए गए अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें।

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