धान की फसल लगभग 45 दिन या उससे अधिक की हो चुकी है। किसान खरपतवार नियंत्रण, निंदाई-गुड़ाई और संतुलित उर्वरक प्रयोग जैसे प्रमुख कृषि कार्य पूरे कर चुके हैं, जिससे फसल की वृद्धि अच्छी दिख रही है। हालांकि, आगामी दिनों में बदलते मौसम के कारण फसल में लीफ फोल्डर (पत्ती मोड़क) और पीला तना छेदक (Yellow Stem Borer) जैसे विनाशकारी कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका जताई गई है।
इसे देखते हुए रायपुर स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM) के वैज्ञानिकों ने किसानों को बिना सोचे-समझे कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव से बचने और समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने की अपील की है।
धान की पत्तियां मुड़ने लगें तो हो सकता है लीफ फोल्डर का हमला
आईसीएआर के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा के मुताबिक लीफ फोल्डर धान को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों में शामिल है। इसकी सूंडियां धान की पत्तियों को लंबाई में मोड़ देती हैं और फिर उसी मुड़ी हुई पत्ती के अंदर रहकर हरे ऊतकों को खुरचकर खाती हैं। इसके कारण पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देने लगती हैं। पत्ती का हरा हिस्सा प्रभावित होने के कारण पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता कम हो सकती है।
पत्ती मोड़क की पहचान कैसे करें?
किसान खेत का निरीक्षण करते समय मुख्य रूप से तीन संकेतों पर ध्यान दे सकते हैं—
- लंबाई में मुड़ी हुई धान की पत्तियां
- मुड़ी हुई पत्तियों के अंदर मौजूद सूंडियां
- पत्तियों पर खुरची हुई सफेद धारियां
यदि इसका प्रकोप अधिक हो जाता है तो पौधे की सामान्य वृद्धि प्रभावित हो सकती है और आखिर में उपज पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि केवल कुछ मुड़ी हुई पत्तियां देखते ही कीटनाशक का छिड़काव करना उचित नहीं है। विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रकोप अनुशंसित आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाया जाए।
इसके बाद पीला तना छेदक बन सकता है बड़ा खतरा
धान की फसल आगे बढ़ने के साथ पीला तना छेदक (Yellow Stem Borer) भी महत्वपूर्ण समस्या बन सकता है। इसके भूरे रंग के अंड समूह सामान्यतः पत्ती के सिरे के आसपास देखे जा सकते हैं। अंडों से निकलने वाली सूंडियां पौधे के तने में प्रवेश करती हैं और अंदर के ऊतकों को नुकसान पहुंचाती हैं। इस वजह से फसल की अलग-अलग अवस्थाओं में दो प्रमुख लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
धान की वानस्पतिक अवस्था में तना छेदक के हमले से बीच की कोंपल सूख सकती है। इसे “डेड हार्ट” कहा जाता है। ऐसे पौधों की समय पर पहचान करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि तने के अंदर मौजूद सूंडी लगातार नुकसान पहुंचा सकती है।
सफेद बालियां दिखना ‘व्हाइट ईयर’ का संकेत
फसल की बाद की अवस्था में तना छेदक का प्रकोप होने पर धान की बालियां सफेद दिखाई दे सकती हैं। इस स्थिति को “व्हाइट ईयर” कहा जाता है। इससे दाना बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और गंभीर प्रकोप की स्थिति में उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए सफेद बालियां दिखाई देने तक इंतजार करने के बजाय शुरुआती अवस्था से निगरानी करना ज्यादा उपयोगी है।
खेत में अंड समूह दिखें तो करें नष्ट
पीला तना छेदक नियंत्रित करने के लिए किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करने की सलाह दी गई है। पत्तियों पर इसके अंड समूह दिखाई देने पर उन्हें एकत्र कर नष्ट किया जा सकता है। प्रभावित और अत्यधिक क्षतिग्रस्त पौधों अथवा कोंपलों को खेत से निकालकर नष्ट करने से भी कीट की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।
फेरोमोन ट्रैप और ट्राइको-कार्ड का भी कर सकते हैं उपयोग
तना छेदक के वयस्क कीटों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। आवश्यकता के अनुसार जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइको-कार्ड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ये उपाय समेकित कीट प्रबंधन का हिस्सा हैं और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकते हैं।
कीटनाशक का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें किसान
ICAR विशेषज्ञों ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि किसान केवल कीट दिखाई देने के आधार पर अनावश्यक कीटनाशकों का प्रयोग न करें। कीटनाशक की वास्तव में आवश्यकता होने पर ही अनुशंसित दवा, सही फसल अवस्था, उत्पाद के लेबल और स्वीकृत मात्रा के अनुसार प्रयोग किया जाना चाहिए। अंधाधुंध कीटनाशक इस्तेमाल करने से खेती की लागत बढ़ने के अलावा प्राकृतिक शत्रु एवं मित्र कीट भी प्रभावित हो सकते हैं।
धान में समेकित कीट प्रबंधन पर दें जोर
किसानों को धान में कीट नियंत्रण के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय Integrated Pest Management (IPM) अपनाने की सलाह दी गई है। इसमें नियमित निगरानी, यांत्रिक उपाय, जैविक नियंत्रण, प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण और आवश्यकता पड़ने पर ही अनुशंसित कीटनाशक का इस्तेमाल शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले सप्ताह धान की फसल के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए किसान खेतों की नियमित निगरानी करें। मुड़ी हुई पत्तियां, सफेद धारियां, डेड हार्ट या सफेद बालियां जैसे असामान्य लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं।