धान की खेती करने वाले किसानों को इस समय फसल में लगने वाले कीट और रोगों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पनागर विकासखंड में कृषि अधिकारियों द्वारा किए गए खेतों के निरीक्षण के दौरान धान की विभिन्न किस्मों में ब्राउन प्लांट हॉपर (Brown Plant Hopper) का प्रकोप पाया गया है। कुछ खेतों में अन्य कीट एवं रोगों के लक्षण भी देखने को मिले हैं।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि बिना कीट या रोग की सही पहचान किए दवाओं का छिड़काव न करें। प्रकोप अधिक होने पर कृषि अधिकारी की सलाह के अनुसार ही अनुशंसित कीटनाशक या फफूंदनाशी और उसकी निर्धारित मात्रा का इस्तेमाल करें।
धान के खेतों में मिला ब्राउन प्लांट हॉपर का प्रकोप
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, जबलपुर उमेश कटहरे के नेतृत्व में कृषि अधिकारियों ने पनागर विकासखंड के कई गांवों में धान की फसल का निरीक्षण किया। टीम ने जुनवानी, कालाडूमर, बम्हनौदा और उर्दुआ कलां में किसानों के खेतों पर जाकर फसल की मौजूदा स्थिति देखी।
निरीक्षण के दौरान धान की विभिन्न किस्मों में ब्राउन प्लांट हॉपर का प्रकोप पाया गया। इसके अलावा कुछ खेतों में दूसरे कीट और रोगों के लक्षण भी सामने आए। अधिकारियों ने किसानों से कहा कि वे धान के पौधों के केवल ऊपरी हिस्से को देखकर कीट का अनुमान न लगाएं, बल्कि पौधों के निचले हिस्से और तने के आसपास नियमित निरीक्षण करें।
ब्राउन प्लांट हॉपर दिखे तो खेत में लगातार पानी न रखें
ब्राउन प्लांट हॉपर की स्थिति में किसानों को खेत में अनावश्यक रूप से लगातार पानी भरा नहीं रखने की सलाह दी गई है। आवश्यकता होने पर 3 से 4 दिनों के लिए खेत से पानी निकालकर उसे सुखाने की व्यवस्था की जा सकती है।
कृषि अधिकारियों के मुताबिक अत्यधिक नत्रजन का इस्तेमाल, बहुत घनी फसल और खेत में लगातार पानी भरा रहना इस कीट के प्रकोप को बढ़ा सकता है। इसलिए किसानों को सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन पर भी ध्यान देना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में समेकित कीट प्रबंधन के तहत नीम आधारित उत्पाद या नीम तेल जैसे जैविक विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रकोप ज्यादा होने पर ही करें कीटनाशक का इस्तेमाल
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि कीट दिखाई देते ही बिना आवश्यकता के रासायनिक दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। ब्राउन प्लांट हॉपर का प्रकोप अधिक होने की स्थिति में विभाग की अनुशंसा के अनुसार पाइमेट्रोजिन आधारित उत्पाद अथवा अन्य अनुशंसित कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि किसान दवा और उसकी मात्रा का चुनाव स्वयं करने के बजाय संबंधित कृषि अधिकारी से सलाह लेकर ही करें। इससे अनावश्यक रसायनों के इस्तेमाल और गलत दवा से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।
तना छेदक और लीफ फोल्डर से ऐसे करें बचाव
धान में ब्राउन प्लांट हॉपर के अलावा तना छेदक और लीफ फोल्डर जैसे कीट भी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके प्रबंधन के लिए किसानों को खेत की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने आवश्यकता के अनुसार फेरोमोन ट्रैप और जैविक नियंत्रण उपायों को भी समेकित कीट प्रबंधन में शामिल करने की सलाह दी है। इससे कीटों की स्थिति का समय रहते पता लगाने और रासायनिक कीटनाशकों पर अनावश्यक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
धान में ब्लास्ट रोग दिखाई दे तो क्या करें?
धान की फसल में ब्लास्ट रोग से बचाव के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन और खेत की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण है। रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित फफूंदनाशी का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
इसी तरह शीथ ब्लाइट की स्थिति में खेत में अत्यधिक नमी और बहुत घनी फसल से बचना चाहिए। रोग के लक्षण मिलने पर किसान संबंधित कृषि अधिकारी की सलाह से अनुशंसित फफूंदनाशी का प्रयोग कर सकते हैं।
एक ही दवा का बार-बार इस्तेमाल न करें किसान
कृषि अधिकारियों ने किसानों को एक ही रसायन का बार-बार इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है। कीटनाशक और फफूंदनाशी का प्रयोग केवल अनुशंसित मात्रा में किया जाना चाहिए तथा आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग रसायन समूहों का क्रमवार उपयोग किया जा सकता है।
जैविक विकल्प के तौर पर नीम आधारित उत्पाद, ट्राइकोडर्मा और अन्य अनुशंसित जैव-नियंत्रण एजेंटों को भी समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि फसल में किसी भी तरह का असामान्य लक्षण दिखाई देने पर किसान बिना पहचान के कीटनाशक या फफूंदनाशी का छिड़काव न करें। पहले समस्या की पहचान कराएं और उसके बाद कृषि अधिकारी की सलाह से ही सही दवा और मात्रा का चुनाव करें।