किसान सलाह

मूंग की फसल में तेजी से फैल रहा पीला मोजेक रोग! तुरंत करें यह उपाय, नहीं तो हो सकता है भारी नुकसान

मूंग, मोठ, उड़द और चंवला की फसल में पीला मोजेक वायरस (YMV) का खतरा बढ़ गया है। जानें रोग के लक्षण, फैलने का कारण, सफेद मक्खी से बचाव और कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताए गए प्रभावी नियंत्रण उपाय।

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खरीफ सीजन में मूंग की खेती करने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की गई है। कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान समय में मूंग की फसल में पीला मोजेक रोग (Yellow Mosaic Virus – YMV) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। यह वायरस जनित रोग केवल मूंग ही नहीं, बल्कि मोठ, उड़द और चंवला जैसी अन्य दलहनी फसलों को भी प्रभावित करता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया, तो किसानों को उत्पादन में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पीला मोजेक रोग क्या है और कैसे फैलता है?

ग्राह्य परीक्षण केंद्र, अजमेर के उप निदेशक कृषि (शस्य) मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि पीला मोजेक एक वायरस जनित रोग है। यह रोग मुख्य रूप से सफेद मक्खी (Whitefly) जैसे रस चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैलता है और तेजी से पूरी फसल को संक्रमित कर सकता है। पीला मोजेक रोग का वायरस मुख्य रूप से सफेद मक्खी द्वारा एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैलता है। इसलिए केवल रोगग्रस्त पौधों का उपचार ही नहीं, बल्कि सफेद मक्खी का नियंत्रण भी अत्यंत आवश्यक है।

पीला मोजेक रोग के प्रमुख लक्षण

कार्यालय के सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. सुरेश चौधरी के अनुसार, इस रोग की पहचान इसके विशिष्ट लक्षणों से की जा सकती है:

  • पत्तियों पर चितकबरे पीले और हरे धब्बे दिखाई देना।
  • पत्तियों का सिकुड़ जाना और आकार बिगड़ जाना।
  • पौधों पर फलियों की संख्या कम होना और फलियों का विकृत होना।
  • यदि संक्रमण फसल की शुरुआती अवस्था में हो जाए, तो पौधों की वृद्धि पूरी तरह रुक जाती है।

कृषि विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय

ग्राहृय परीक्षण केन्द्र के उप निदेशक कृषि (शस्य) मनोज कुमार शर्मा ने किसानों को इस रोग से फसल बचाने के लिए निम्नलिखित वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह दी है:

  • संक्रमित पौधों को खेत से उखाड़कर नष्ट कर दें।
  • खेत में सफेद मक्खी की नियमित निगरानी करें।
  • समय पर अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें।

अनुशंसित कीटनाशक दवाएं

रोग वाहक सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए कृषि रसायनों का छिड़काव करें। प्रति हेक्टेयर के हिसाब से निम्नलिखित में से किसी एक दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें

  • इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL – 150 मिलीलीटर
  • फ्लोनीकामिड 50% WG – 200 ग्राम
  • डायमिथोएट 30 EC – 1 लीटर

दूसरा छिड़काव 15 दिन बाद अवश्य करें, ताकि रोग फैलाने वाले कीटों पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।

छिड़काव करते समय रखें ये सावधानियां

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि—

  • दस्ताने, मास्क और पूरे सुरक्षा वस्त्र पहनकर ही दवा का छिड़काव करें।
  • केवल शांत और साफ मौसम में ही छिड़काव करें।
  • अनुशंसित मात्रा से अधिक दवा का उपयोग न करें।
  • बच्चों और पशुओं को छिड़काव वाले क्षेत्र से दूर रखें।

समय पर नियंत्रण से बचाया जा सकता है उत्पादन

विशेषज्ञों के अनुसार यदि पीला मोजेक रोग की पहचान शुरुआती अवस्था में कर ली जाए और सफेद मक्खी का समय पर नियंत्रण किया जाए, तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। नियमित निगरानी और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार दवा का उपयोग ही इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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