जानिए मध्यप्रदेश में किसान कब से बेच सकेंगे समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना, मसूर एवं सरसों

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गेहूं, चना, मसूर एवं सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद

किसानों की रबी सीजन की फसलें खेतों में पककर तैयार होने को है ऐसे में राज्य सरकारों के द्वारा किसानों से रबी फसलों को मंडियों में खरीदने की तैयारी भी शुरू की जा चुकी है | इसके लिए राज्य सरकारों के द्वारा किसानों के पंजीकरण भी शुरू कर दिए गए हैं | मध्यप्रदेश में भी रबी फसलों की खरीदी के लिए किसानों के पंजीकरण चल रहे हैं | इस वर्ष राज्य सरकार ने किसानों से गेहूं, चना, मसूर एवं सरसों समर्थन मूल्य पर खरीदने की घोषणा की है |

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंत्रालय में रबी उपार्जन तैयारियों की समीक्षा की उन्होंने कहा कि गेहूँ के उपार्जन कार्य में किसानों को उपार्जन केंद्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जायें। समय पर उनकी फसल का उपार्जन हो तथा उपार्जन के बाद भुगतान में विलंब न हो। मेरे लिए एक-एक किसान महत्वपूर्ण है। किसी का भुगतान नहीं रुकना चाहिए। उपार्जित फसल के तुरंत परिवहन की व्यवस्था की जाये।

22 मार्च से होगी गेहूँ की समर्थन मूल्य पर खरीद

प्रदेश में इस बार गेहूँ का उपार्जन 22 मार्च से इंदौर एवं उज्जैन संभाग में तथा 1 अप्रैल से शेष संभागों में किया जाएगा। उपार्जन के लिए पंजीयन अभी चल रहे है, जो 20 फरवरी तक चलेंगे। इस बार भी गत वर्ष की तरह 4,529 उपार्जन केंद्र बनाये जा रहे हैं। इस बार 125 लाख मैट्रिक टन गेहूँ उपार्जन का अनुमान है। अभी तक 4 लाख 13 हज़ार किसानों ने गेहूँ बेचने के लिए पंजीयन कराया है। पिछले वर्ष 19 लाख 47 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 15 लाख 81 हज़ार किसानों ने गेहूँ बेचा। उपार्जन के लिए इस बार सिकमी/बटाईदारों के अधिकतम 5 हेक्टेयर रकबा के पंजीयन की सुविधा प्रदान की जा रही है।

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इस वर्ष गेहूँ का समर्थन मूल्य 1,975 रुपये प्रति क्विंटल है जो कि पिछले वर्ष 1,925 रुपये की तुलना में 50 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। इस बार गेहूँ की बोनी का रकबा 98 लाख 20 हजार हेक्टेयर है। इस बार लगभग 20 लाख किसानों के पंजीयन का अनुमान है।

चना, मसूर एवं सरसों की खरीदी 15 मार्च से

चना, मसूर एवं सरसों का उपार्जन 15 मार्च से प्रारंभ होगा, जो 15 मई तक चलेगा। इस बार इनका पूरा उपार्जन मार्कफेड द्वारा किया जाएगा। चने का समर्थन मूल्य 5,100 रूपये, सरसो का समर्थन मूल्य 4,650 रूपये और मसूर का समर्थन मूल्य 5,100 रूपये प्रति क्विंटल है। चने का उपार्जन 14.51 लाख टन, मसूर का 1.37 लाख टन तथा सरसो का 3.90 लाख टन अनुमानित है।

स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी उपार्जन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गत बार की तरह इस बार भी स्व-सहायता समूहों तथा कृषि उत्पादक समूहों को उपार्जन कार्य दिया जाएगा। पिछले वर्ष 39 उपार्जन केंद्रों पर स्व-सहायता समूहों एवं कृषि उत्पादक समूहों द्वारा 9 लाख 78 हज़ार 526 क्विंटल गेहूँ उपार्जित किया गया, जो कुल उत्पादन का 3% था।

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किसान को भुगतान न करना होगा अपराध

मुख्यमंत्री चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक भी किसान की उपज का भुगतान न होना अपराध है। दोषियों की संपत्ति कुर्क करें। उन्हें जेल भेजें तथा किसानों को भुगतान करायें। जितने किसानों का भुगतान बकाया है, उनकी सूची उन्हें तुरंत उपलब्ध कराई जाये। जिन सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता संदिग्ध हो, उन्हें इस बार उपार्जन का कार्य न दिया जाये।

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