इन राज्यों में सोयाबीन की फसल में लग सकते हैं यह कीट एवं रोग, इस तरह करें नियंत्रण

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राज्यवार सोयाबीन कीट-रोग नियंत्रण

सोयाबीन की बुवाई किये हुए 45 से 60 दिन हो गए हैं | इस बीच कहीं अधिक बारिश एवं कहीं कम बारिश के अलावा लम्बे समय तक सूरज की रोशनी न मिलने से सोयाबीन की फसल पर कीट रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है | मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र के कुछ जिलों में बारिश नहीं होने के कारण 15 से 20 दिनों तक सूखे की स्थिति बनी हुई थी | जिससे कई जगह फसल का विकास अच्छे से नहीं हो पाया है | सूखे के बाद बारिश से सोयाबीन की फसल पर कई प्रकार के कीट-रोगों की संभावना बढ़ जाती है |

राज्यों के अलग-अलग जिलों में वर्षा की स्थिति के अनुसार सोयाबीन की फसल पर कीटों तथा इल्लियों का प्रकोप अलग-अलग देखने को मिल रहा है | देश भर में सोयाबीन की फसल पर इल्ली तथा कीट का प्रकोप बढने की संभावना को देखते हुए वैज्ञानिकों ने सोयाबीन किसानों के लिए सलाह जारी की है | किसान समाधान राज्यों एवं जिलों के अनुसार कीट तथा इल्ली के प्रकोप की जानकारी लेकर आया है |

तम्बाकू इल्ली (एकल) :-

तम्बाकू इल्ली का प्रकोप कुछ राज्यों में सोयाबीन की फसल पर होने की संभावना है | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा राजस्थान तम्बाकू इल्ली से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्य हैं |

  • मध्य प्रदेश के छिंदवाडा, धार, मंडला और खरगोन जिला है |
  • महाराष्ट्र के अकोला, अमरावली, जलगाँव, नागपुर, नांदेड, नाशिक, रायगढ़, रत्नागिरी, सांगली, सोलापुर और वर्धा है |
  • राजस्थान के भीलवाडा, चित्तौडगढ़ और उदयपुर है |

अर्ध कुंडलक हरी इल्ली :-

इस कीट का प्रकोप देश के कई राज्यों के सोयाबीन की फसल पर होने की संभावना है | कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान राज्य के कई जिलों में अर्ध कुंडलक हरी इल्ली का प्रकोप हो सकता है |

  • कर्नाटक राज्य के चित्रदुर्गा, दक्षिण कन्नड़, धारवाड़ और उत्तर कन्नड़ जिले शामिल है |
  • मध्य प्रदेश के छतरपुर, धार, गुना, इंदौर, जबलपुर, मंडला, रायगढ़, रतलाम, रीवा, सतना, सीधी, सिवनी, टीकमगढ़, उज्जैन और उमरिया जिले शामिल है |
  • महाराष्ट्र राज्य के अकोला, अमरावती, गोंदिया, कोलाह्पुर, नागपुर, नाशिक, परभानी, पुणे, रायगढ़, रत्नागिरी, सांगली, सतारा और वर्धा शामिल है |
  • राजस्थान राज्य के भरतपुर, भीलवाडा, चितौडगढ़ और उदयपुर शामिल है |
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चने के इल्ली :-

इस इल्ली का प्रकोप इस समय कई राज्यों के सोयाबीन की फसल पर देखा जा रहा है | इसके प्रकोप बढने की संभावना है | इस कीट से महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक तथा मध्य प्रदेश राज्य प्रभावित हो सकते हैं |

  • महाराष्ट्र के नाशिक, रायगढ़, रत्नागिरी, सांगली और सतारा जिलों में चन्ने के इल्ली का प्रकोप हो सकता है |
  • राजस्थान के उदयपुर जिले में रोग का प्रकोप हो सकता है |

चक्रभ्रंग :-

इस कीट का प्रकोप इस समय महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश तथा आंध्रप्रदेश के जिलों में देखा जा सकता है | इस कीट का प्रकोप बढने की संभावना है |

  • कर्नाटक के सिक्मंग्लुर और गुलबर्गा जिले में इल्ली का प्रकोप हो सकता है |
  • मध्य प्रदेश के दतिया, धार, इंदौर, सिवनी, उज्जैन और खरगौन जिले में चने के इल्ली का प्रकोप हो सकता है |
  • महाराष्ट्र के अकोला, अमरावती, नांदेड, नाशिक, रायगढ़, सांगली, वर्धा और वाशिम में कीट का प्रकोप हो सकता है |
  • राजस्थान के अजमेर, भीलवाडा, चुरू, जयपुर और टोंक में कीट का प्रकोप हो सकता है |
  • आंध्र प्रदेश के पूर्व गोदावरी और गुंटूर जिलों में इस कीट का प्रकोप हो सकता है |
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सोयाबीन में इन कीट-रोगों का नियंत्रण इस तरह करें

इल्लियों तथा कीटों को रोकने के लिए परम्परिक उपाय करें | सोयाबीन की फसल में पक्षियों के बैठने हेतु “T” आकार के बड़े–पर्चेस लगाये, इससे कीट–भक्षी पक्षियों द्वारा भी इल्लियों की संख्या कम करने में सहायता मिलती है |

रासायनिक उपचार
  • चक्र भृंग तथा पत्ती खाने वाली इल्लियों के एक साथ नियंत्रण हेतु पूर्वमिश्रित कीटनाशक नोवाल्युरौन + इंडोक्साकार्ब (850 मिली/हे.) या बीटासायफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) या पुर्वमिश्रित थायमिथोकसम + लैम्बडा सायहेलोथ्रिन (125 मिली./हे.) का छिडकाव करें | इनके छिडकाव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है |
  • चक्र भृंग नियंत्रण हेतु थायक्लोप्रिड 21.7 एस.सी. 750 मिली/हे. या प्रोफेनोफाँस 50 ई.सी. (1250 मिली./हे.) या पुर्वमिश्रित बीटासायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./है.) या पूर्वमिश्रित थायमिथोकसम + लैम्बडा सायहेलोथ्रिन (125 मिली./हे.) या इमामेक्टीन बेन्जोएट (425 मिली.हे.) का 500 लीटर पानी के साथ 1 हेक्टेयर में छिडकाव करें | यह भी सलाह दी जाती है कि इसके फैलाव की रोकथाम हेतु प्रारंभिक अवस्था में ही पौधे के ग्रसित भाग को तोड़कर नष्ट कर दें |
  • जहाँ पर केवल चने की इल्ली (हेलिकोवेर्पा अर्मिजेरा) का प्रकोप हो, इसके नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप (हेलिल्पुर) लगाए तथा अनुसंशित कीटनाशक इंडोक्साकार्ब 15.8 ई.सी. (333 मि.ली./हे.) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एस.सी. (150 मि.ली./हे.) या क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मि.ली./ हे.) का छिडकाव करें |

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