बिहार में बाढ़ से किसानों की फसलों और ग्रामीण क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाजीपुर, वैशाली, मुंगेर और भागलपुर के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
दौरे के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार कई इलाकों में खेत 10 दिनों से अधिक समय तक पानी में डूबे रहे, जिससे विशेष रूप से मक्का और केले की फसल को गंभीर नुकसान हुआ है।
केंद्र सरकार की ओर से आगे एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) भेजे जाने की बात कही गई है, जो कृषि फसलों के साथ सड़कों, पुल-पुलियों, मकानों और पशुधन को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करेगा।
2016 की बाढ़ से भी करीब एक फीट ऊपर पहुंचा पानी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि स्थानीय लोगों और राज्य सरकार से मिली जानकारी के अनुसार इस बार कई प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर 2016 की बाढ़ के स्तर से भी करीब एक फीट ऊपर पहुंच गया।
लंबे समय तक खेतों में पानी भरा रहने का सीधा असर खड़ी फसलों पर पड़ा है। दी गई जानकारी के मुताबिक 10 दिनों से अधिक समय तक पानी में डूबे रहने के कारण केले और मक्के की फसलें खराब हो गई हैं।
किसानों के लिए यह नुकसान इसलिए भी गंभीर है क्योंकि फसल तैयार करने में लगाई गई लागत और मेहनत दोनों प्रभावित हुई हैं।
करीब 50 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी
केंद्रीय मंत्री के अनुसार बाढ़ की इस स्थिति से करीब 50 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए हैं। कई लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। मकानों को नुकसान पहुंचने के साथ पशुधन की क्षति की जानकारी भी सामने आई है।
ऐसे में बाढ़ से हुए कुल नुकसान का आकलन केवल कृषि फसलों तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्रीय दल द्वारा ग्रामीण बुनियादी ढांचे और अन्य संपत्तियों को हुई क्षति का भी आकलन किए जाने की बात कही गई है।
नाव और ट्रैक्टर से खेतों तक पहुंचकर देखा फसल नुकसान
केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति देखने के लिए अलग-अलग माध्यमों से दौरा किया। हाजीपुर के वैशाली क्षेत्र में तेरसिया और सरायपुर गांवों में मोटरबोट और नाव से जलमग्न इलाकों एवं खेतों का निरीक्षण किया गया।
दुर्गम क्षेत्रों में ट्रैक्टर से भी स्थिति का जायजा लिया गया। इसके अलावा राघोपुर सिक्स लेन ब्रिज से बाढ़ के फैलाव और जलस्तर को देखा गया।
मुंगेर में नवागढ़ी राहत शिविर और कोजीकरैया बांध का निरीक्षण किया गया, जबकि भागलपुर में राहत शिविरों में रह रहे प्रभावित लोगों से मुलाकात की गई।
फसलों के नुकसान का विस्तृत आकलन करेगा केंद्रीय दल
बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए अब नुकसान का आकलन महत्वपूर्ण होगा। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक कृषि एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी प्राथमिक स्थिति का जायजा ले रहे हैं। इसके बाद अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) बिहार के प्रभावित जिलों का दौरा करेगा।
यह दल मुख्य रूप से:
- कृषि फसलों को हुए नुकसान
- मकानों की क्षति
- सड़कों और पुल-पुलियों का नुकसान
- पशुधन की हानि
- ग्रामीण बुनियादी ढांचे की क्षति का विस्तृत आकलन करेगा।
आकलन और राज्य की ओर से भेजे जाने वाले औपचारिक प्रस्ताव के आधार पर केंद्र से अतिरिक्त सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्रभावित परिवारों को ₹7,000 की तात्कालिक सहायता का उल्लेख
दी गई जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को तात्कालिक सहायता के तौर पर 7,000 रुपये की राशि बैंक खातों में DBT के माध्यम से भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता के लिए डॉक्टर और पैरामेडिकल टीमें भेजे जाने के साथ प्रभावित परिवारों के लिए आश्रय, पेयजल, सूखा राशन और गर्म भोजन उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई है।
यह ₹7,000 की सहायता फसल नुकसान के अंतिम मुआवजे के समान नहीं समझी जानी चाहिए। कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुए नुकसान के विस्तृत आकलन की प्रक्रिया अलग से की जानी है।
किसानों को फसल नुकसान पर कब मिलेगी सहायता?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रति एकड़/हेक्टेयर फसल मुआवजे की कोई निश्चित राशि घोषित नहीं की गई है। इसलिए किसानों को कितनी राशि मिलेगी, इसका दावा अभी करना उचित नहीं होगा।
पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल और अन्य नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव और लागू आपदा सहायता नियमों के अनुसार आगे की वित्तीय सहायता तय होगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराएगी और व्यापक पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सहयोग किया जाएगा।