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बिहार में खाद खरीदने का नया नियम: 1 सितंबर से 19 जिलों में ऑनलाइन बिक्री, Farmer ID से मिलेगा खाद

बिहार में 1 सितंबर 2026 से 19 जिलों में खाद की ऑनलाइन बिक्री शुरू होगी और 2 अक्टूबर से सभी जिलों में व्यवस्था लागू होगी। Farmer ID और QR Code से किसान उर्वरक खरीद सकेंगे।

Bihar Online Fertilizer Sale FSAS

बिहार में किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में उर्वरक की बिक्री को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जा रहा है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार 1 सितंबर 2026 से बिहार के 19 जिलों में उर्वरक की ऑनलाइन बिक्री शुरू होगी, जबकि 2 अक्टूबर 2026 से राज्य के सभी जिलों में खाद की ऑनलाइन बिक्री लागू करने की तैयारी है।

नई व्यवस्था में किसान की पहचान, जमीन और फसल से जुड़ी जानकारी के आधार पर उर्वरक की आवश्यकता तय की जाएगी। इसके बाद किसान को QR कोड उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके जरिए वह निर्धारित अधिकृत विक्रेता से खाद खरीद सकेगा। यह QR कोड तीन दिनों तक वैध रहेगा।

1 सितंबर से 19 जिलों में ऑनलाइन मिलेगी खाद

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 31 अगस्त को पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ विषयक कार्यशाला में नई व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उर्वरक की ऑनलाइन बिक्री का पायलट प्रोजेक्ट पहले वैशाली और शेखपुरा जिलों में शुरू किया गया था। पायलट के बाद अब इसका विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत 1 सितंबर से 19 जिलों में ऑनलाइन व्यवस्था लागू होगी और इसके बाद 2 अक्टूबर से इसे राज्य के सभी जिलों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

Farmer ID से मिलेगी किसान और जमीन की जानकारी

खाद वितरण व्यवस्था को डिजिटल और किसान-केंद्रित बनाने के लिए कृषि विभाग ने FSAS (उर्वरक बिक्री आवेदन प्रणाली ढांचा) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की है। इसमें iFMS और AgriStack को एकीकृत कर उर्वरक की खरीद-बिक्री को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

जिन किसानों की भूमि संबंधी जानकारी किसान रजिस्ट्री में पहले से उपलब्ध है, उनके जरूरी विवरण Farmer ID के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। इससे किसान की पहचान और उपलब्ध भूमि संबंधी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से जोड़ा जा सकेगा।

Farmer ID में जानकारी नहीं होने पर भी मिल सकेगी खाद

नई व्यवस्था का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिन किसानों की आवश्यक भूमि संबंधी जानकारी किसान रजिस्ट्री में उपलब्ध नहीं है, उनके लिए भी व्यवस्था की गई है। ऐसे किसान FSAS पर पंजीकरण करके उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें संबंधित खेत की कुछ जानकारी देनी होगी, जिसमें खाता एवं खसरा संख्या, क्षेत्रफल और बोई गई फसल का विवरण शामिल होगा। इस तरह नई व्यवस्था में केवल पहले से डिजिटल रिकॉर्ड वाले किसानों तक खाद की बिक्री सीमित नहीं रखी गई है।

कितनी खाद मिलेगी? ICAR की अनुशंसा से तय होगी जरूरत

किसान को मिलने वाले उर्वरक की आवश्यकता का निर्धारण ICAR की अनुशंसाओं के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य फसल और कृषि भूमि की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराना है। इससे एक ओर किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर अनावश्यक खरीद एवं वितरण में होने वाली गड़बड़ियों पर नियंत्रण मजबूत किया जा सकेगा।

किसान को मिलेगा QR Code, 3 दिनों तक रहेगा वैध

ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान को एक QR कोड उपलब्ध कराया जाएगा। यह QR कोड तीन दिनों तक वैध रहेगा। किसान QR कोड में अंकित अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद खरीद सकेगा। इस प्रकार खाद की मांग से लेकर किसान द्वारा वास्तविक खरीद किए जाने तक की प्रक्रिया को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर होगी सख्त कार्रवाई

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खाद को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बेचने, कालाबाजारी, जमाखोरी या अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सभी उर्वरक विक्रेताओं को नई डिजिटल व्यवस्था का प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

किसानों को भी Farmer ID, FSAS पंजीकरण और ऑनलाइन खाद खरीदने की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

केवल ऑनलाइन डेटा नहीं, दुकानों की भी होगी जांच

नई व्यवस्था लागू होने के बाद निगरानी केवल ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर नहीं होगी। कृषि मंत्री ने जिला कृषि अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से व्यवस्था की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को फील्ड में जाकर उर्वरक की वास्तविक उपलब्धता, दुकानों पर मौजूद स्टॉक और बिक्री की स्थिति का नियमित निरीक्षण करना होगा। इससे डिजिटल रिकॉर्ड और जमीनी स्तर पर मौजूद खाद के स्टॉक के बीच अंतर जैसी अनियमितताओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

2 अक्टूबर से पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी

बिहार सरकार की योजना इस व्यवस्था को चरणबद्ध रूप से पूरे प्रदेश में लागू करने की है। वैशाली और शेखपुरा में पायलट के बाद 1 सितंबर से 19 जिलों में इसका विस्तार किया जा रहा है। इसके बाद 2 अक्टूबर 2026 से सभी जिलों में ऑनलाइन खाद बिक्री व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।

नई प्रणाली का उद्देश्य किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने के साथ उर्वरक वितरण को अधिक पारदर्शी बनाना और कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अधिक कीमत वसूली जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाना है।

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