देश के लाखों तोतापुरी आम (Totapuri Mango) उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर है। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में लगातार गिरती कीमतों और किसानों की कम होती आय को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तोतापुरी आम की खेती, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग व्यवस्था में बड़े सुधार करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन, नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में ICAR–CISH (केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ) के निदेशक डॉ. दामोदरन टी. द्वारा पेश की गई विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा हुई और नीति, तकनीक तथा बाज़ार तीनों स्तरों पर ठोस कदम उठाने का फैसला किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केवल रिपोर्ट बनाकर फाइल बंद नहीं होगी, बल्कि नीति, तकनीक और बाज़ार तीनों स्तरों पर ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि तोतापुरी आम उत्पादक किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।
मैंगो ड्रिंक्स में अनिवार्य होगा 22-25% असली गूदा, मिलेगा GST का लाभ
समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि इस साल तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण प्रोसेसिंग क्षमता में तालमेल की कमी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और शीतल पेयों में प्राकृतिक गूदे की कम मात्रा है।
- 22-25% गूदा अनिवार्य: आम पर आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत तक वास्तविक प्राकृतिक आम गूदा (Pulp) अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है।
- 5% GST दर की सिफारिश: जिन उत्पादों में निर्धारित मात्रा में असली गूदा होगा, उन्हें केवल 5% की रियायती GST दर में रखने का प्रस्ताव है, जबकि कम गूदे वाले ड्रिंक्स पर उच्च टैक्स लगाया जाएगा।
- अंतर-मंत्रालयी बैठक: FSSAI, GST परिषद, वित्त, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि और स्वास्थ्य मंत्रालय मिलकर जल्द ही इस कर संरचना और मानकों पर अंतिम फैसला लेंगे।
‘केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति’ का होगा गठन
तोतापुरी आम की मूल्य श्रृंखला को व्यवस्थित करने के लिए एक सर्वोच्च संस्थागत तंत्र (Apex Institutional Mechanism) के रूप में केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति बनाई जाएगी। इस समिति के मुख्य कार्य:
- फसल अनुमान: सीज़न की शुरुआत से पहले फसल उत्पादन, प्रोसेसिंग क्षमता और निर्यात मांग का आकलन करना।
- लाभकारी खरीद मूल्य: किसानों के लिए संकेतात्मक फार्म-गेट (Farm-Gate) खरीद मूल्य और मैंगो पल्प के लिए संदर्भ मूल्य (Reference Price) तय करना।
- SOP लागू करना: आंध्र प्रदेश सरकार से सिफारिश की गई है कि सभी पंजीकृत पल्प फैक्ट्रियों के लिए हर साल 15 मई से अनिवार्य खरीद और प्रोसेसिंग शुरू करने का SOP जारी करे।
पुराने आम के बागों का होगा कायाकल्प
आंध्र प्रदेश के चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों में तोतापुरी आम के बाग काफी पुराने हो चुके हैं, जिससे उत्पादकता घटी है। इसके समाधान के लिए:
- Top-Working (टॉप-वर्किंग): पुराने तोतापुरी पेड़ों पर नीलम, अल्फांसो, हिम्मायत और बंगनपल्ली जैसी उच्च मूल्य वाली किस्मों की कलम चढ़ाई जाएगी, जिससे 2-3 सालों में प्रीमियम फसल मिलना शुरू हो जाएगी।
- फ्रूट बैगिंग (Fruit Covers): प्रारंभिक चरण में 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट कवर्स दिए जाएंगे ताकि कीटों से सुरक्षा हो और फल की बाहरी रंगत व गुणवत्ता बेहतर बने, जिससे ऊंचे दामों वाली मंडियों में पहुंच आसान हो।
‘मैंगो बटर’ और निर्यात का नया प्लान
- उप-उत्पाद से कमाई: ICAR-CISH और IIHR की तकनीक से आम की गुठली (Seed Kernel) से “मैंगो बटर” और अन्य वैल्यू-एडेड प्रॉडक्ट्स बनाए जाएंगे, जिससे किसानों की अतिरिक्त आय होगी।
- समुद्री मार्ग से निर्यात: APEDA, ICAR और राज्य सरकारों के साथ मिलकर समुद्री रास्ते (Sea Route) से तोतापुरी आम और पल्प के निर्यात की लागत कम की जाएगी और नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाई जाएगी।
निष्कर्ष
तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने नीति, तकनीक और बाजार—तीनों स्तरों पर सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। यदि प्रस्तावित व्यवस्थाएं लागू होती हैं तो आने वाले वर्षों में किसानों को बेहतर मूल्य, स्थिर बाजार और निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं। यह पहल दक्षिण भारत के लाखों आम उत्पादक किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।