देश के किसानों के लिए पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM) के अगले चरण में एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी है। योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टिक्स (Agrivoltaics) यानी कृषि-वोल्टेइक ऊर्जा के लिए एक अलग समर्पित घटक शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जिसमें किसान अपनी जमीन पर खेती जारी रखते हुए उसी खेत में सौर ऊर्जा का उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकें।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 के पूर्व समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसान अब केवल ‘अन्नदाता’ ही नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी बन रहे हैं। सरकार का विशेष फोकस छोटे और सीमांत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और पंचायतों पर रहेगा।
PM–KUSUM के अगले चरण में Agrivoltaics के लिए अलग घटक
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि पीएम-कुसुम के अगले चरण में कृषि-वोल्टेइक ऊर्जा के लिए एक समर्पित घटक होगा। इसके माध्यम से किसानों को एक ही जमीन पर खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन करने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस मॉडल की खास बात यह है कि सोलर पैनल लगाने के बावजूद जमीन का स्वामित्व किसान के पास ही रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को नियमित अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है, विशेषकर ऐसे किसानों को जिनकी कृषि आय मानसून, फसल उत्पादन और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहती है।
एक एकड़ खेत से तीन तरह से कमाई का मॉडल
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि एग्री-वोल्टेइक तकनीक के माध्यम से छोटे और सीमांत किसान एक ही एकड़ भूमि से तीन अलग-अलग स्रोतों से आय अर्जित कर सकते हैं:
- फसल की बिक्री से आय: पैनलों के नीचे फसलों की सुचारू खेती जारी रहेगी।
- बिजली बिक्री से आय: सौर पैनलों से उत्पादित अतिरिक्त बिजली को डिस्कॉम (DISCOMs) को बेचकर कमाई।
- डीजल खर्च की बचत: सौर ऊर्जा चालित पंपों के इस्तेमाल से ईंधन पर होने वाले खर्च में सीधी बचत।
पीएम-कुसुम योजना की अब तक की बड़ी उपलब्धियां
भारत में विश्व की 18% जनसंख्या है लेकिन केवल 2.4% कृषि भूमि है, जिसमें से 85% से अधिक छोटे व सीमांत किसान (2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले) हैं। ऐसे में एग्रीवोल्टिक्स तकनीक फसल और बिजली में से किसी एक को चुनने की बाध्यता खत्म करती है।
- सौर पंप कवरेज: पीएम-कुसुम योजना के तहत अब तक 29 लाख से अधिक कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जा चुका है।
- विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा: पिछले वर्ष 16.3 गीगावाट विकेंद्रीकृत सौर क्षमता जोड़ी गई, जिसमें पीएम-कुसुम से 7.6 GW और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (छत पर सौर ऊर्जा) से 8.7 GW उत्पादन हुआ, जिससे 56 लाख लाभार्थियों को फायदा मिला।
- अंतरराष्ट्रीय तुलना: भारत ने पिछले वर्ष 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो नॉर्वे (40.6 GW), स्विट्जरलैंड (30 GW), ऑस्ट्रिया (34 GW) और बेल्जियम (33 GW) जैसे विकसित देशों की कुल स्थापित बिजली क्षमता से भी अधिक है।
एग्री-वोल्टेइक तकनीक पर शोध और ‘सूर्य मित्र’
विभिन्न फसलों, जलवायु और क्षेत्रों के अनुकूल तकनीक विकसित करने के लिए अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुणे स्थित बीएआईएफ (BAIF) के ग्रामीण नवाचार केंद्र में शोधकर्ता 30 फसलों पर 17 सौर प्रणालियों का परीक्षण कर रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में इस बदलाव को सुगम बनाने के लिए भारत अब तक ग्राम स्तर पर 70,000 ‘सूर्य मित्रों’ को प्रशिक्षित कर चुका है जो इन प्रणालियों के रखरखाव और तकनीकी संचालन में सहायता करेंगे।
भारत मंडपम में होगा 7वां एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026
समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने सम्मेलन के आधिकारिक लोगो और टीज़र का अनावरण किया। साथ ही “फार्म टू फोर्क इनोवेशन को बढ़ावा देना” विषय पर आधारित एग्रीवोल्टिक्स पिच हब (3F ढांचा: फूड, फ्यूल और फाइबर) की घोषणा की गई, जिसमें नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) ज्ञान भागीदार (Knowledge Partner) है।
- आयोजन तिथि: 21 से 23 अक्टूबर 2026
- स्थान: भारत मंडपम, नई दिल्ली
- सहभागिता: दुनिया भर के नीति निर्माता, शोधकर्ता, किसान, उद्योगपति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे।