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नया Seed Bill लाने की तैयारी, नकली बीज पर होगी सख्ती; किसानों के पारंपरिक बीज रहेंगे सुरक्षित

केंद्र सरकार नया Seed Bill लाने की तैयारी में है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20 शीर्ष किसान संगठनों के साथ संवाद किया। जानें पारंपरिक बीजों के अधिकार और नए कड़े प्रावधान।

New Seed Act 2026 Draft Farmer Consultation Shivraj Singh Chouhan

किसानों को नकली और घटिया बीजों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार नया Seed Bill लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित बीज कानून को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक चर्चा की। बैठक में किसानों के अधिकार, पारंपरिक बीज, बीज की गुणवत्ता, कंपनियों की जवाबदेही और नकली बीजों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुझाव लिए गए।

कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि नया कानून जल्दबाजी में नहीं लाया जाएगा। किसानों और किसान संगठनों से मिलने वाले सुझावों पर गहराई से विचार करने के बाद ही सरकार आगे बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा प्रभावी कानून तैयार करना है जिससे नकली और खराब बीजों की बिक्री पर अंकुश लगे, लेकिन किसानों के अपने पारंपरिक बीजों के उपयोग और आदान-प्रदान के अधिकार प्रभावित न हों।

क्यों लाया जा रहा है नया Seed Bill?

देश में अभी बीजों से संबंधित प्रमुख कानूनी व्यवस्था बीज अधिनियम, 1966 पर आधारित है, जबकि बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू किया गया था। सरकार का मानना है कि पिछले कई दशकों में बीज क्षेत्र और कृषि व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं, इसलिए मौजूदा कानून में कई ऐसी कमियां हैं जिन्हें दूर करने की जरूरत है।

  1. 70% बीज दायरे से बाहर: वर्तमान कानून के तहत लगभग 70% बीज इसके औपचारिक दायरे से बाहर हैं, जिससे नकली या घटिया बीज बेचने वालों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती।
  2. 18,000 सुझाव मिले: ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के दौरान मिले फीडबैक के बाद सरकार ने नवंबर-दिसंबर 2025 में इस बिल पर सार्वजनिक सुझाव मांगे थे, जिनमें 18,000 से अधिक इनपुट प्राप्त हुए थे।
  3. कोई डेडलाइन नहीं: सरकार सभी हितधारकों से परामर्श जारी रखेगी और बिना किसी जल्दबाजी के गहन सोच-विचार के साथ एक बेहद प्रभावी और कड़ा कानून बनाएगी।

क्या किसान अपने पारंपरिक बीज बेच और बांट सकेंगे?

किसानों की शंकाओं और अधिकारों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि नए कानून से किसानों के पारंपरिक अधिकारों पर कोई आंच नहीं आएगी।

  • पारंपरिक बीजों का संरक्षण: किसान अपने पारंपरिक एवं स्वदेशी किस्मों के बीजों का उपयोग, आपस में आदान-प्रदान और बिक्री करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगे।
  • पंजीकरण की बाध्यता नहीं: किसानों को खुद के इस्तेमाल, बीज उत्पादन या गांव में बांटने के लिए किसी भी डिजिटल रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होगी। यदि कोई किसान अपनी किस्म को पंजीकृत करवाना चाहता है, तो यह पूरी तरह ऐच्छिक (Optional) होगा।

नकली बीज बेचने वालों के खिलाफ कड़े दंड की तैयारी

नए Seed Bill में नियमों के उल्लंघन पर अधिक प्रभावी दंड व्यवस्था तैयार करने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव में अपराधों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की व्यवस्था रखी गई है।

छोटी चूक की स्थिति में पहली बार चेतावनी और दोबारा उल्लंघन होने पर अधिक जुर्माने जैसे प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है। गंभीर उल्लंघनों और नकली या घटिया बीज से जुड़े मामलों में व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर है।

हालांकि, प्रस्तावित दंड प्रावधानों का अंतिम स्वरूप कानून के अंतिम मसौदे और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

किसान संगठनों ने सरकार के सामने रखे सुझाव

बैठक में भारतीय किसान संघ, बीकेयू (विभिन्न घटक), अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (AIKCC), किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, गाँव किसान उन्नयन, SIFA, कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ, महाराष्ट्र का शेतकारी संगठन, गुजरात का खेदुत समाज, राजस्थान व बिहार की नेशनल किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन, तमिलनाडु का व्यवसाइगल संघम और झारखंड का प्रगतिशील कृषि मंच सहित कई राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कृषि मंत्री ने कहा कि इन सुझावों का गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा और जिन सुझावों को व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सकता है, उन्हें अंतिम मसौदे में शामिल करने पर विचार होगा।

Pesticide Act में बदलाव पर भी हो रहा विचार

बीजों के साथ सरकार ने घटिया कीटनाशकों की समस्या को भी महत्वपूर्ण माना है। विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान किसानों ने Seed Act के साथ Pesticide Act में भी बदलाव की मांग और सुझाव दिए थे।

कृषि मंत्री के अनुसार परिस्थितियों में हुए बदलाव को देखते हुए नया Seed Act और Pesticide Act लाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसका उद्देश्य बाजार में घटिया कृषि आदानों की पहचान और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करना है।

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