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खेती से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने के लिए किसान गन्ने के साथ करें सह-फसली खेती

गन्ने के साथ सह फसली खेती

खेती की नई तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इसमें सह-फसली खेती से भी किसान अच्छा मुनाफा ले सकते हैं। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश के तराई जिलों के किसान गन्ना की फसल के साथ मटर, मसूर समेत अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। गन्ने के साथ सहफ़सली खेती करने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान अपना सकते हैं।

मिट्टी के प्रकार और बाजार की उपलब्धता के आधार पर किसान सहफसली खेती के लिए फसलों का चयन कर सकते हैं। इसमें किसान गन्ने के साथ दलहन जैसे मटर, मसूर, चना तिलहन जैसे लाही, सरसों, अलसी के अलावा अन्य फसलें जैसे टमाटर, धनिया, मिर्च, सौंफ, आलू, लहसुन, फूलगोभी, पत्ता गोभी आदि की सहफ़सली ले कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

यह किसान कर रहे हैं गन्ने के साथ सह फसली खेती

गन्ना विकास परिषद मझोला के गाँव कटैया के किसान नरेंद्र सिंह मलकियत ने खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सहफ़सली का प्रदर्शन प्लॉट तैयार किया है, जिसमें गन्ने की किस्म CO-15023 के साथ सरसों की फसल ली गई है। गाँव पंडरी के किसान अमरवीर सिंह पुत्र अमरीक सिंह ने लगभग एक बीघा क्षेत्र में गन्ने कोलक-14201 के साथ लहसुन, धनिया, मेथी व पालक की सहफसल ली है। अपने ही दूसरे खेत में गन्ने के साथ मटर की सह फ़सली खेती कर रहे हैं, इसी तरह अलमापुर के किसान जसकरन सिंह-रवींद्र सिंह ने गन्ने के साथ मटर की सहफ़सली खेती शुरू की है।

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कुलारा के किसान गुरनाम सिंह-बख्तावार सिंह ने भी गन्ना प्रजाति कोलक 14201 के साथ पीली सरसों की सहफ़सली खेती अपनाई है, गाँव खिरका के अरमान सिंह-दलजीत सिंह ने करीब तीन एकड़ क्षेत्र में गन्ने की COS-13235 के साथ गेहूं की मिश्रित खेती की है।

किसानों की होती है अतिरिक्त आमदनी

डीसीओ खुशीराम ने गन्ने के साथ सहफ़सली कर रहे किसानों के खेतों का निरीक्षण कर किसानों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि सह फसली खेती से 15-20 प्रतिशत की अतिरिक्त आमदनी होती है। इसके साथ ही घरेलू एवं बाज़ार माँग की पूर्ति भी होती है। सह फसली खेती से पानी की बचत होने के साथ ही खरपतवारों का प्रकोप कम होने से फसल की लागत भी कम हो जाती है। डीसीओ ने बताया कि सह फ़सली खेती करने वाले किसानों को अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

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