सोमवार, फ़रवरी 26, 2024
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देसी कपास की इन किस्मों में नहीं लगते कीट एवं रोग, किसानों को अगले सीजन में उपलब्ध कराये जाएँगे बीज

देसी कपास की किस्में

देश में विभिन्न कीट एवं रोगों के प्रकोप से कपास की खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में सरकार अब देश में कपास की देसी किस्मों को विकसित करने और उनकी पहुँच किसानों तक बनाने के लिए काम कर रही। राज्य सभा में देसी कपास की किस्मों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि देसी कपास की किस्मों पर अध्ययन किया जा रहा है साथ ही देसी कपास स्टेपल फाइबर की लंबाई बढ़ाने के लिए अनुसंधान किए जा रहे हैं।

राज्‍यसभा में कृषि और किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री कैलाश चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि देसी कपास की किस्में गॉसिपियम आर्बोरियम कीड़ों, बीमारियों और सूखे के प्रति मज़बूत है। साथ ही हाल ही में देश के वैज्ञानिकों ने देसी कपास की 32 मिमी की किस्में उगाकर असंभव कार्य कर दिखाया है।

इन कीट रोगों के लिए प्रतिरोधी हैं देसी कपास की किस्में

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि देसी कपास की प्रजाति ‘गॉसिपियम आर्बोरियम’ कपास की पत्ती मोड़ने वाले वायरस रोग से सुरक्षित है। तुलनात्मक रूप से रस चूसने वाले कीटों जैसे कि सफ़ेद मक्खी, थ्रिप्स और जैसिड्स के प्रकोप को सहन कर सकती हैं। इसके अलावा अगर बीमारियों की बात की जाए तो ये बैक्टीरियल ब्लाइट और अल्टरनेरिया रोग के प्रभाव को भी सहन कर सकती हैं। लेकिन ग्रे-फफूंदी रोग के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि देसी कपास की प्रजातियां नमी को भी सहन कर सकती हैं।

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व्यावसायिक खेती के लिए जारी की गई कपास की किस्में

देश के विभिन्न कपास उत्पादक क्षेत्रों और राज्यों में व्यावसायिक खेती के लिए कुल 77 आर्बोरियम कपास क़िस्में जारी की गई है। इन किस्मों में से वसंतराव नाइक मराठवाड़ा के वैज्ञानिकों ने चार लंबी रोयेंदार किस्में विकसित की हैं जो पीए 740, पीए 810, पीए 812 और पीए 837 हैं। कृषि विद्यापीठ (वीएनएमकेवी), परभणी (महाराष्ट्र) की स्टेपल लंबाई 28-31 मिमी है, और बाकी 73 किस्मों की मुख्य लंबाई 16-28 मिमी की सीमा में है।

परीक्षणों में सफल पाई गई हैं किस्में

वसंतराव नाइक मराठवाड़ा, कृषि विद्यापीठ, परभणी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – ऑल इंडिया कॉटन रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन कॉटन के परभणी केंद्र ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन कॉटन टेक्नोलॉजी, नागपुर केंद्र में ऊपरी आधी औसत लंबाई, जिनिंग आउट टर्न, माइक्रोनेयर वैल्यू सहित कताई परीक्षणों के लिए देसी कपास की किस्मों का परीक्षण किया है। परीक्षणों में कताई की किस्‍मों को सफल घोषित किया गया है।

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देसी कपास स्टेपल फाइबर की लंबाई बढ़ाने के लिए अनुसंधान प्रयास जारी हैं 2022-23 के दौरान इन किस्मों के 570 किलोग्राम बीजों का उत्पादन किया गया था। कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि अगले बुआई सत्र में बुआई के लिए किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध है।

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