किसानों को मुफ्त में बांटे जा रहे हैं अधिक उपज देने वाली किस्मों के बीज

दलहन एवं तिलहन के अधिक उपज देने वाली किस्मों के बीज

सरकार द्वारा दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, इसमें बीजों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल उन्नत बीजों के उपयोग मात्र से ही फसलों की उत्पादकता को लगभग 20-25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। खेती के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता से उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होती है। ऐसे में कुछ राज्यों में अनिश्चित और कम वर्षा के कारण, रबी फसलों विशेषकर दलहन और तिलहन की शीघ्र बुवाई की आवश्यकता हो गई है। जिसके लिए सरकार द्वारा किसानों को उन्नत किस्मों के बीज मिनी किट वितरित किए जा रहे हैं।

रबी 2022-23 के लिए सरकार दलहन और तिलहन के बीज के नियमित वितरण के अलावा विभिन्न राज्यों के मानसून की कमी वाले क्षेत्रों को लक्षित करते हुए दलहन और तिलहन के बीज मिनीकिट उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए सरकार ने किसानों के लिए हाल में जारी की गई अधिक उपज देने वाली किस्मों के बीज के वितरण के लिए बड़े पैमाने पर बीज मिनीकिट कार्यक्रम को मंजूरी दी है।

बीज मिनी कीट वितरण योजना का उद्देश्य क्या है?

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देश में विभिन्न फसलों का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों के बीच नवीनतम फसल किस्मों को लोकप्रिय बनाना है। साथ ही इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के उन हिस्सों में दलहन और तिलहन का बीज मिनीकिट वितरित करना जहां कम वर्षा हुई है। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में रेपसीड और सरसों (आर एंड एम) के गैर-पारंपरिक क्षेत्र को कवर करना भी शामिल है।

किसानों को मुफ़्त में दिए जाएँगे बीज

तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगभग 8.3 लाख बीज मिनीकिट वितरित की जा रही है। विभिन्न फसलों पर 39.22 करोड़ रुपए की लागत है। इनमें सरसों के 10.93 करोड़ रुपये मूल्य की 5,75,000 मिनीकिट, मूंगफली के 16.07 करोड़ रुपये मूल्य की 70,500 मिनीकिट, सोयाबीन के 11.00 करोड़ रुपये मूल्य की 1,25,000 मिनीकिट, कुसुम के 0.65 करोड़ रुपये मूल्य की 32,500 मिनीकिट और अलसी के 0.57 करोड़ रुपए मूल्य की 26,000 मिनीकिट शामिल हैं, जो किसानों को मुफ्त दिए जाएँगे। 

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सरकार ने रबी 2021-22 के विशेष सरसों मिशन को लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप इसकी खेती के रकबे में 20 प्रतिशत और उत्पादन में 15 प्रतिशत वृद्धि हुई। इस वर्ष (2022-23), विशेष कार्यक्रम के तहत 18 राज्यों के 301 जिलों में रेपसीड और सरसों के 2653183 बीज मिनीकिट के वितरण के लिए 50.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

तुअर, मसूर और उड़द के बीज वितरण के लिए शुरू किया गया विशेष कार्यक्रम

सरकार ने 2022-23 के दौरान दलहन को बढ़ावा देने के लिए 11 राज्यों के लिए मसूर और उड़द के 4.54 लाख बीज मिनी किट और मसूर के 4.04 लाख बीज मिनी किट आवंटित किए हैं। इसका उद्देश्य विशेष रूप से बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में जल्दी बुवाई के को लेकर उत्तर प्रदेश में 1,11,563 नग, झारखंड में 12,500 नग और बिहार में 12,500 नग का वितरण किया जाना है। यह वर्षा की कमी वाले इन तीन राज्यों के लिए कुल आवंटन का 33.8 प्रतिशत और पिछले वर्ष की तुलना में 39.4 प्रतिशत अधिक है।

सरकार 2022-23 तक एक विशेष कार्यक्रम टीएमयू 370 ‘तूर मसूर उड़द – 370’ भी लागू कर रही है, जिसके माध्यम से मसूर के तहत 120 जिलों और उड़द के तहत 150 जिलों को अधिकतम कवर प्रदान करके इन लक्षित जिलों में दलहनी फसलों के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करने का लक्ष्य रखा जा रहा है।

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    • असर आप कृषि विश्वविद्यालय, बीज निगम या सोसायटी आदि जगहों से बीज क्रय कर सकते हैं। सरकार द्वारा प्रमाणित बीज ही दिए जाते हैं।

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