वैज्ञानिकों ने विकसित की गेहूं की रोगरोधी व बंपर पैदावार वाली नई उन्नत किस्म डब्ल्यूएच 1270

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new wheat variety wh 1270

गेहूं की नई उन्नत किस्म WH 1270

देश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि वज्ञानिकों के द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है | इसके लिए न केवल कृषि में आधुनिकता को बढाया जा रहा है बल्कि परम्परागत फसलों जैसे गेहूं एवं धान जिसकी खेती देश में सबसे अधिक होती है इसके लिए नई-नई रोग प्रतोरोधी किस्में विकसित की जा रही है जिसकी पैदावार भी बम्पर होती है | ऐसे ही गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है | अभी हाल ही में हरियाणा के चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के वैज्ञानिकों ने गेहूं की डब्ल्यूएच WH 1270 उन्नत किस्म विकसित की है।

गेहूं की इस नई विकसित किस्म को विश्वविद्यालय के अनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग के गेहूं अनुभाग द्वारा विकसित किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित इस किस्म को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं सहयोग विभाग की ‘फसल मानक, अधिसूचना एवं अनुमोदन केंद्रीय उप-समिति’ द्वारा नई दिल्ली में हाल ही में आयोजित बैठक में अधिसूचित व जारी कर दिया गया है।

डब्ल्यूएच WH 1270 उन्नत किस्म की विशेषताएं

इस किस्म की खास बात यह है कि यह गेहूं की मुख्य बिमारियां पीला रतुआ व भूरा रतुआ के प्रति रोगरोधी है। इसके अलावा गेहूं के प्रमुख क्षेत्रों में प्रचलित मुख्य बिमारियां जैसे पत्ता अंगमारी, सफेद चुर्णी व पत्तियों की कांगियारी के प्रति भी रोगरोधी है। यह किस्म 156 दिन तक पककर तैयार हो जाती है और इसकी औसत ऊंचाई भी 100 सेंटीमीटर तक होती है, जिसके कारण यह खेत में गिरती नहीं है। इस किस्म में प्रोटीन भी अन्य किस्मों की तुलना में अधिक है।

गेहूं की किस्म WH 3226 से प्राप्त उपज

गेहूं की इस किस्म को अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बिजाई के लिए अनुमोदित किया गया है। अगेती बिजाई करने पर इसकी पैदावार प्रति एकड़ 4 से 8 क्विंटल तक अधिक ली जा सकती है। इस किस्म में विश्वविद्यालय द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार बिजाई करके उचित खाद, उर्वरक व पानी दिया जाए तो इसकी औसतन पैदावार 75.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो सकती है और अधिकतम पैदावार 91.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक ली जा सकती है।

किन राज्यों के लिए उपयुक्त है गेहूं की WH 1270 किस्म

गेहूं की WH 1270 उन्नत किस्म को भारत के उत्तर-पश्चिम मैदानी इलाकों के लिए अनुमोदित किया गया है। इन क्षेत्रों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा व उदयपुर क्षेत्र को छोडकर), पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झांसी क्षेत्र को छोडकर), जम्मू-कश्मीर के कठुआ व जम्मू जिले, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला व पौंटा घाटी और उत्तराखण्ड का तराई क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।

अगले वर्ष से उपलब्ध होगा किसानों को बीज

पादप एवं पौध प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. छाबड़ा ने बताया कि रबी के मौसम के लिए सिफारिश की गई इस किस्म का बीज अगले वर्ष किसानों के लिए उपलब्ध करवा दिया जाएगा। यह किस्म किसानों के लिए वरदान साबित होगी।

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