वैज्ञानिकों ने विकसित की बाजरा की नई बायोफोर्टीफाइड किस्म एचएचबी-311

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bajra HHB 311 variety

बाजरा नई बायोफोर्टीफाइड उन्नत किस्म एचएचबी (HHB)-311

दुनियाभर में बाजरा और बाजरा उत्पादों की मांग लगातार बढती जा रही है, बाजरा आम तौर पर छोटे बीज वाली फसल हैं जो उच्च पोषक मूल्य के लिए जानी जाती हैं। कुपोषण से लड़ने के लिए देश में ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमें पोष्टिक पदार्थ- जैसे प्रोटीन, आयरन, जिंक आदि अधिक मात्रा में होते हैं इन्हें बॉयोफोर्टीफाइड वैरायटी कहा जाता है | अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने विभन्न फसलों के लिए 17 बायोफोर्टीफाइड किस्में जारी की गई थी जिससे देशभर में कुल 70 अलग-अलग फसलों के लिए विभिन्न किस्में देश के किसानों के लिए उपलब्ध हो गई हैं | अब चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय,हिसार के वैज्ञानिकों ने एचएचबी-311 नामक बाजरा की नई बायोफोर्टीफाइड किस्म विकसित की है।

इस किस्म को कृषि महाविद्यालय के आनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग के बाजरा अनुभाग के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं सहयोग विभाग की ‘फसल मानक, अधिसूचना एवं अनुमोदन केंद्रीय उप-समिति’ द्वारा नई दिल्ली में आयोजित बैठक में इस नई किस्म को अधिसूचित व जारी कर दिया गया है।

एचएचबी-311 बाजार की किस्म में पोषक तत्वों की मात्रा

बाजरा की इस किस्म में अन्य किस्मों के मुकाबले लौह तत्व एवं जिंक क्रमश: 83 व 42 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाया जाता है। सामान्य किस्मों में इनकी मात्रा क्रमश: 45-55 व 20-25 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम होती है। अच्छा रखरखाव करने पर एचएचबी 311 किस्म 18.0 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार देने की क्षमता रखती है।

बाजरे में मुख्य रूप से 12.8 प्रतिशत प्रोटीन, 4.8 ग्राम वसा, 2.3 ग्राम रेशे, 67 ग्राम कार्बोहाइड्रेट एवं खनिज तत्व जैसे कैल्शियम-16 मिली ग्राम, लौह-6 मिली ग्राम, मैग्नीशियम -228 मिली ग्राम, फॉस्फोरस-570 मिली ग्राम, सोडियम-10 मिली ग्राम, जिंक 3.4 मिली ग्राम, पोटैशियम 390 मिली ग्राम व कॉपर-1.5 मिली ग्राम पाया जाता है। इसमें गेहूं एवं चावल से अधिक आवश्यक एमिनो अम्ल पाए जाते हैं । बाजरे के दानों का सेवन सुजन रोधी, उच्च रक्तचाप रोधी, कैंसर रोधी होता है एवं इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक हृदयाघात के जोखिम एवं आंत्र के सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

बाजरे की नई किस्म एचएचबी-311 की विशेषताएं

यह किस्म जोगिया रोगरोधी है व अन्य किस्मों की तुलना में सूखा चारा व उपज अधिक देने की क्षमता है। यह 75 से 80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इस नई किस्म के बाजरा के दानों में ग्लूटेन लगभग न के बराबर होता है जबकि गेहूं में यह मुख्य प्रोटीन होता है जो सिलिअक, स्व.प्रतिरक्षित रोग, एथेरोस्क्लेरोसिस, एलर्जी और आंतों की पारगम्यता बिमारी का मुख्य कारण है, इसलिए उक्त बीमारी वाले लोगों को डॉक्टर द्वारा बाजरा खाने की सलाह दी जाती है। बाजरे का सेवन टाइप-2 डायबिटीज को रोकने में सहायक है। इनकी इन्ही विशेषताओं के कारण इसे न्यूट्री सीरियल नाम दिया गया है।

बाजरा में गेहूं, धान, मक्का एवं ज्वार की तुलना में शुष्क एवं निम्न उपजाऊ क्षमता, उच्च लवण युक्त भूमि एवं उच्च तापमान के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है। अत: इस फसल का उत्पादन ऐसी भूमि में भी किया जा सकता है जहां पर अन्य फसल लेना संभव न हो। उन्नत किस्मों, अच्छी सस्य क्रियाओं व रोग रोधी किस्मों के विकसित होने से बाजरा की पैदावार व उत्पादकता बढ़ रही है।

किन राज्यों के किसान कर सकते हैं बाजरा की नई किस्म एचएचबी-311 की खेती

अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत ने बताया कि इनकी उच्च अनाज और उपजाऊ क्षमता व लौह तत्व की मात्रा और रोग प्रतिरोधिकता को ध्यान में रखते हुए एचएचबी-311 को राष्ट्रीय स्तर पर खेती के लिए इसकी सिफारिश की गई है। इसके तहत जोन-ए जिसमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब और दिल्ली और जोन-बी में महाराष्ट्र और तमिलनाडु के लिए खरीफ सीजन के लिए इसकी सिफारिश की गई है।

विश्वविद्यालय द्वारा विकिसत अन्य बाजरा की किस्में

इसके अलावा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एच.एच.बी. 223, एच.एच.बी. 197,  एच.एच.बी. 67 (संशोधित), एच.एच.बी.-226, एच.एच.बी. 234, एच.एच.बी. 272 किस्में भी विकसित की हैं।

इन वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई यह किस्म

बाजरा की एचएचबी-311 किस्म को विकसित करने वाली टीम में डॉ. रमेश कुमार, डॉ. देवव्रत, डॉ. विरेंद्र मलिक, डॉ. एमएस दलाल, डॉ. केडी सहरावत, डॉ. योगेन्द्र कुमार और डॉ. एसके पाहुजा शामिल थे। इनके साथ डॉ. अनिल कुमार, डॉ. एलके चुघ, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. कुशल राज व डॉ. एम. गोविंदराज व डॉ. आनंद कनाति (हैदराबाद) का भी विशेष सहयोग रहा है।

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