2500 रुपये प्रति क्विंटल पर धान बेचने के लिए किसान पंजीयन करें

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धान खरीदी हेतु पंजीकरण

प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरकार द्वारा धान की खरीदी की जाएगी | केंद्र तथा राज्य की सरकारी एजेंसीयों ने इसके लिए तैयारी कर ली है | इस वर्ष भी धान कि खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही की जानी है | इसके बाबजूद भी कुछ राज्य अपने किसानों को अलग से बोनस दे रहें है | यह बोनस राशि उन किसानों को दिया जायेगा जिनकी धान कि खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी |

इसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य धान की खरीदी पर सबसे ज्यादा बोनस दे रही है | इस वर्ष राज्य के किसानों से धान की खरीदी 2500 रूपये प्रति क्विंटल पर किया जायेगा | धान का कटोरा कहे जाने वाले राज्य में धान का सबसे ज्यादा मूल्य दिया जा रहा है | इसकी पूरी जानकारी किसान समाधान लेकर आया है |

पंजीयन कब से कब तक हो रहा है ?

छत्तीसगढ़ राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 16 अगस्त से 31 अक्टूबर तक की  जाएगी | इसके लिए किसानों को पंजीयन करना जरुरी है | जो किसान अभी तक पंजीयन नहीं करवा पाएं हैं वह 31 अक्टूबर से पहले करवा लें |

धान की खरीदी किस रेट से किकी जाएगी ?

इस वर्ष जो केंद्र सरकार के द्वारा धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है वह सामान्य धान के लिए 1815 रु./क्विंटल तथा धान किस्म ए के लिए 1835 रु./क्विंटल है | यह भाव देश भर में एक समान है | लेकिन छत्तीसगढ़ में राज्य के किसानों से धान कि खरीदी 2500 रूपये / क्विंटल से किया जायेगा | यह केवल पंजीकृत किसानों के लिए रहेगा |

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किसान पंजीयन कैसे करें ?

छत्तीसगढ़ के किसानों को पंजीयन कराने के लिए समिति में आने कि जरूरत नहीं है | पिछले साल जिन किसानों ने समिति में अपना पंजीयन करा लिया है , उन्हें कैरी फारवर्ड किया जा रहा है | ऐसे किसान जो किसी कारण से पंजीयन में संशोधन करना चाहते हैं, उनके लिए समिति माडयूल के जरिए संशोधन की व्यवस्था भी की गई है | पंजीकृत किसान की दर्ज भूमि और धान के रकबे की जानकारी की सूचि साफ्टवेयर से प्रिंट कर समिति के संबंधित क्षेत्र के पटवारी को उपलब्ध कराई जाएगी | सूचि में दी गई जानकारी का पटवारी राजस्व रिकार्ड के आधार पर सत्यापन करेगा |

कृषक पंजीयन व्यवस्था में शामिल तहसील और सहकारी अमलों की मानिटरिंग के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी | कंप्यूटर के माध्यम से रेण्डम आधार पर किसानों के अंकित पंजीयन आकड़ों की सत्यता की जाँच की जाएगी | गत खरीफ वर्ष 2018 – 19 में जिन किसानों ने पंजीयन नहीं करवाया था , लेकिन इस साल धान बेचना चाहते हैं तो उन किसानों का तहसील माडयूल से तहसीलदार रजिस्ट्रेशन करेंगे | नये पंजीयन के लिए किसानों को समिति से आवेदन लेकर संबंधित दस्तावेजों के साथ तहसील दफ्तर में जमा करना होगा |

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जमीन और धान के रकबे का पटवारी राजस्व रिकार्ड के आधार पर सत्यापन करेगा | तहसीलदार सभी साक्ष्य को देखने और परीक्षण करने के बाद किसानों का पंजीयन करेंगे | यहाँ पर इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि किसानों का आधार नंबर उनकी सहमति से लिया जाएगा |

किसान के मौत पर खरीदी किया जायेगा ?

समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन में कृषि भूमि सीलिंग कानून के प्रावधानों का ध्यान रखा जाएगा | धान बिक्री से पहले पंजीकृत किसान की मौत हो जाती है तो तहसीलदार द्वारा परिवार के नामांकित व्यक्ति के नाम से धान खरीदी की जा सकेगी |

अगर भूमि किसान के नाम से नहीं या बटाईदार के नाम से है तो पंजीयन हो सकता है ?

राज्य सरकार ने यह प्रवधान किया है कि त्रस्त, मंडल, प्रा.लि.कंपनी, शाला विकास समिति, केंद्र एवं राज्य शासन के संस्थान, महाविद्यालय आदि संस्थाओं की जमीन धान बोने के काम में लाई जा रही , तो जमीन पर धान की खेती करने वाले किसान के नाम का ही पंजीयन होगा, जमीन मालिक का नहीं | इसके लिए संस्था के संचालक को समिति में काम कर रहे किसानों के नाम और बैंक खाता की जानकारी देनी होगी |

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