राजस्थान किसानों को जल्द मिलेगी ख़राब हुई फसल की राशि

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राजस्थान किसानों को जल्द मिलेगी ख़राब हुई फसल की राशि

आपदा राहत एवं प्रबन्धन मंत्री श्री गुलाब चंद कटारिया ने गुरुवार को विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार द्वारा काश्तकारों को फसल खराबे का पूरा मुआवजा शीघ्र ही उनके बैंक खाते में सीधे रूप से जमा कर दिया जाएगा। श्री कटारिया ने शून्यकाल में उठाए गए मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूर्व में विभाग मुआवजे का पैसा कॉपरेटिव बैंक में भेज देता था और वह पैसा बैंक में कई साल तक रखा रहता था। यह पैसा समय पर किसानों को वितरित नहीं किया जाता था, इसलिए अब यह निर्णय लिया गया है कि यह पैसा सीधे किसानों के बैंक खाते में भिजवाया जाएगा, जिससे उन्हें समय पर राहत मिल सके।

आपदा मंत्री ने बताया कि पाली जिले में संवत 2072 में विभाग ने 41 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि पाली में लगभग 19 करोड़ रूपये दिए गए एवं रोहट में लगभग 5 करोड़ रुपये दिए गए हैं। संवत 2073 में रोहट तहसील में 24 करोड़ 59 लाख रुपये का भुगतान कर दिया है। जिसमें से 16 हजार 437 किसानों के बैंक खातों में 16 करोड़ 40 लाख रुपये जमा करवा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन काश्तकारों के बैंक खातों की जानकारी मिल रही है, उनके खाते में पैसा सीधा जमा किया जा रहा है।

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फसल खराबा की एस्टीमेंट रिपोर्ट बनाकर भेजने में समय लगता है, परन्तु सड़क के एस्टीमेट रिपोर्ट आते ही जल्द कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि समय पर सूचना आने पर विभाग द्वारा ही कार्यवाही की जाती है, परन्तु रिपोर्ट देरी से आने पर सड़क मरम्मत का भुगतान करने में समस्या आती है।

कृषि मंत्री श्री प्रभूलाल सैनी ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में  प्रावधान किया गया है कि यदि फसल बुवाई या कटाई के समय नष्ट व खराबा हो जाए तो बीमा का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि खरीफ 2016 में पाली, जालौर, सिरोही एवं बाड़मेर के कुछ क्षेत्रों में खरीफ फसल के समय अधिक वर्षा से फसल नष्ट हुई थी। इन जिलों के प्रभावित बीमित किसानों को पहली बार 23 करोड़ 42 लाख रूपये मुआवजा के रूप में मिड टर्म क्लेम के रूप में दिए गए। पाली जिले की रोहट तहसील के 3 हजार 994 किसानों को 2 करोड़ 33 लाख रूपये मिड टर्म मुआवजे के रूप में दिए गए।

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उन्होंने बताया कि पाली जिले की रोहट तहसील में खरीफ 2016 में राजस्थान मरूधरा ग्रामीण बैंक ने जिन किसानों के बीमा का प्रीमियम काटा था, वह एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी को स्थानांतरित किया गया। परन्तु मार्च, 2017 तक पूरे किसानों की सूची इंश्योरेंस कम्पनी को उपलब्ध नहीं कराई, जिसकी वजह से लगभग 1600 किसानों को बीमे का लाभ नहीं मिला। इस पर कृषि मंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस विषय में काफी गम्भीर है। उन्होंने कहा कि बीमा कम्पनी या बैंक जिसकी भी खामी रही है, उसकी जांच करवाई जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग के आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जो इस प्रकरण की जांच करेगी। किसानों को उनके खराबे का मुआवजा शीघ्र मिले इसके लिए शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

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