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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: 100 जिलों में किसानों को मिलेगा लाभ, 6.90 लाख को मिला प्रशिक्षण

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के 100 जिलों में काम तेज हुआ। 6.90 लाख किसानों को प्रशिक्षण मिला है। जानें PM-DDKY में सिंचाई, कृषि ऋण, भंडारण और किसानों को मिलने वाले लाभ की पूरी जानकारी।

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केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) के तहत चिन्हित 100 जिलों में कृषि विकास की रफ्तार बढ़ाने पर फोकस तेज कर दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं के बेहतर समन्वय, जिला स्तर पर प्रदर्शन सुधारने और किसानों तक पहुंचने वाले वास्तविक लाभों को मापने पर जोर देने के निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों के आधार पर 100 जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 के 22.54 से बढ़कर जुलाई 2026 में 38.85 हो गया है। यानी इस अवधि में प्रदर्शन में 16.31 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। योजना के तहत जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 6,90,530 किसानों और 88,961 विस्तार कर्मियों को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना?

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के ऐसे 100 जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां कृषि उत्पादकता और फसल सघनता अपेक्षाकृत कम है तथा कृषि ऋण का वितरण भी कम है। योजना के माध्यम से इन जिलों में पहले से चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच समन्वय कर कृषि क्षेत्र के विकास में तेजी लाने का लक्ष्य है। PM-DDKY मुख्य रूप से छह उद्देश्यों पर काम कर रही है—

  • कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी
  • फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा
  • फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता का विस्तार
  • सिंचाई सुविधाओं में सुधार
  • किसानों के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाना
  • शासन और कृषि सेवाओं की डिलीवरी में सुधार

योजना में 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं के साथ राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी का भी समन्वय किया जा रहा है।

121 संकेतकों से मापा जा रहा 100 जिलों का प्रदर्शन

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की खास बात यह है कि जिलों की प्रगति को डेटा के आधार पर मापा जा रहा है। इसके लिए 36 योजनाओं में कुल 121 संकेतक निर्धारित किए गए हैं। इनमें 74 आउटपुट संकेतक और 47 परिणाम संकेतक शामिल हैं। आउटपुट संकेतकों के आधार पर जिलों के प्रदर्शन की PM-DDKY Dashboard पर हर महीने रैंकिंग की जाती है। वहीं परिणाम संकेतकों की मदद से यह देखा जाएगा कि जमीनी स्तर पर योजना लागू होने के बाद वास्तविक स्थिति में कितना सुधार हुआ।

अप्रैल से जुलाई के बीच ऐसे सुधरा प्रदर्शन

समीक्षा में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक छह प्रमुख उद्देश्यों में सुधार दर्ज किया गया है।

  • कृषि उत्पादकता: औसत स्कोर 2.53 से बढ़कर 6.70 हुआ।
  • फसल विविधीकरण एवं टिकाऊ कृषि: स्कोर 5.60 से बढ़कर 8.65 पहुंचा।
  • फसल कटाई के बाद भंडारण: स्कोर 2.61 से बढ़कर 3.82 हुआ।
  • सिंचाई अवसंरचना: स्कोर 1.65 से बढ़कर 4.20 हो गया।
  • कृषि ऋण तक पहुंच: स्कोर 2.81 से बढ़कर 5.59 पहुंचा।
  • शासन एवं सेवा वितरण: औसत स्कोर 7.94 से बढ़कर 10.33 हो गया।

इस तरह 100 जिलों का संयुक्त औसत स्कोर अप्रैल 2026 के 22.54 से बढ़कर जुलाई में 38.85 पहुंच गया।

सभी 100 जिलों की कार्य योजना तैयार

योजना के क्रियान्वयन में एक और महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। सभी 100 जिलों ने अपनी जिला कार्य योजना (DAP) अपलोड कर दी है और सभी योजनाओं पर फीडबैक भी प्राप्त हो चुका है। सभी जिलों ने जुलाई 2026 तक उत्पादन संकेतकों से संबंधित आंकड़े जमा कर दिए हैं। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के परिणाम संकेतकों के आंकड़े भी सभी 100 जिलों से प्राप्त हो चुके हैं। राज्य, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा एवं निगरानी समितियां बनाई गई हैं। इसके साथ ही केंद्रीय नोडल अधिकारी जमीनी स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे हैं।

अब सिर्फ खर्च नहीं, किसान को कितना लाभ मिला यह भी होगा ट्रैक

सरकार अब योजना की मॉनिटरिंग को केवल गतिविधियों और खर्च के आंकड़ों तक सीमित नहीं रखना चाहती। समीक्षा में इस बात पर जोर दिया गया कि यह भी मापा जाए कि योजनाओं से किस किसानों को और कितना वास्तविक लाभ मिला। PM-DDKY Dashboard का Financial Progress Module 31 अगस्त 2026 को लागू किया गया है।

इसके बाद सितंबर 2026 के मध्य तक Beneficiary Progress Module शुरू करने का लक्ष्य है। इससे लाभार्थी स्तर पर प्रगति को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि धन-धान्य जिलों में कितने संसाधन लगाए गए, कौन-सी गतिविधियां हुईं, कितने किसानों को फायदा मिला और उसके परिणाम क्या रहे।

6.90 लाख से अधिक किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में किसानों की क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान कुल 6,90,530 किसानों और 88,961 विस्तार कर्मियों को विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षित किया गया। इसके अलावा 2,20,683 किसानों और विस्तार कर्मियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है।

कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को तकनीकी साझेदार के रूप में जोड़ा गया है, ताकि किसानों तक नई कृषि तकनीक और बेहतर कृषि पद्धतियां जमीनी स्तर पर पहुंचाई जा सकें।

36 केंद्रीय योजनाओं का एक साथ मिलेगा लाभ

PM-DDKY की रणनीति नई योजनाएं अलग से चलाने के बजाय उपलब्ध सरकारी संसाधनों और कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय पर भी आधारित है। इसके तहत 11 मंत्रालयों एवं विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं, राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र के कार्यक्रमों के बीच समन्वय मजबूत किया जा रहा है।

लोक उद्यम विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की CSR गतिविधियों के लिए PM-DDKY जिलों को गोद लेने को भी शामिल किया है। इससे चिन्हित जिलों में विकास गतिविधियों के लिए अतिरिक्त सहयोग मिलने का रास्ता खुलेगा।

अक्टूबर में एक साल पूरा करेगी प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को इसका आधिकारिक शुभारंभ किया।
  • PM-DDKY Dashboard अक्टूबर 2025 के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुआ और नवंबर 2025 से मासिक आउटपुट संकेतक रैंकिंग शुरू की गई।
  • अब अक्टूबर 2026 में योजना के शुभारंभ का पहला वर्ष पूरा होने वाला है। इस मौके पर 100 धन-धान्य जिलों की प्रगति और प्रदर्शन को सामने रखने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
  • इसके अलावा प्रत्येक जिला धन-धान्य समिति में दो प्रगतिशील किसानों को शामिल करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया है, जिससे योजना के क्रियान्वयन में किसानों की भागीदारी और मजबूत हो सके।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है PM-DDKY?

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का असर केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके माध्यम से चिन्हित जिलों में सिंचाई, कृषि ऋण, फसल विविधीकरण, टिकाऊ खेती, भंडारण, प्रशिक्षण और सरकारी कृषि सेवाओं को एक साथ बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।

अब लाभार्थी स्तर की डिजिटल निगरानी शुरू होने के बाद सरकार यह भी आकलन कर सकेगी कि विभिन्न योजनाओं और निवेश का वास्तविक फायदा कितने किसानों तक पहुंचा और कृषि क्षेत्र में उसके क्या परिणाम सामने आए।

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