ज्वार (Sorghum) भारत की एक प्रमुख मोटे अनाज (Millets) की फसल है, जो कम पानी और शुष्क क्षेत्रों में भी किसानों को बेहतरीन मुनाफा देती है। इसे न केवल अनाज के लिए बल्कि पशुओं के उत्तम चारे के रूप में भी उगाया जाता है। यदि आप भी ज्वार की खेती से रिकॉर्ड तोड़ पैदावार लेना चाहते हैं, तो नीचे दी गई वैज्ञानिक विधि को अपनाएं।
ज्वार की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
ज्वार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खेती शुष्क और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बेहद सफलतापूर्वक की जा सकती है।
- तापमान: इसके पौधों के अच्छे विकास के लिए 25°C से 35°C का तापमान सबसे उत्तम माना जाता है।
- वर्षा: यह फसल 40 से 60 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आसानी से पककर तैयार हो जाती है।
- मिट्टी: अच्छी जल निकास वाली हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी ज्वार के लिए सर्वोत्तम है। ध्यान रहे कि खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए।
बुआई का सही समय और बीज की मात्रा
ज्वार की बुआई में सही समय और सही दूरी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
- सही समय: ज्वार की बुआई जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त रहता है। बारानी (वर्षा आधारित) क्षेत्रों में जैसे ही पहली अच्छी बारिश हो, तुरंत बुआई कर देनी चाहिए।
- बीज दर (प्रति हेक्टेयर):
- संकर (Hybrid) किस्में: 8 से 9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
- संकुल (Composite) किस्में: 10 से 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
- बुआई की दूरी: कतार से कतार (पंक्ति से पंक्ति) की दूरी 45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी रखनी चाहिए। इस दूरी से खेत में प्रति हेक्टेयर लगभग 1.5 लाख पौधों की आदर्श संख्या बनी रहती है।
महत्वपूर्ण टिप (बीज उपचार): बुआई से पहले बीजों को कार्बेंडाजिम, एग्रोसन जीएन या कैप्टान दवा से @ 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से जरूर उपचारित करें। इसके अलावा, एजोस्पिरिलम और पीएसबी (PSB) जैव उर्वरकों से बीज का टीका लगाने पर पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
ज्वार की टॉप उन्नत किस्में (Best Jowar Varieties)
अधिक मुनाफे के लिए हमेशा अपने क्षेत्र के अनुसार सही किस्म का चयन करें:
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प्रकार |
प्रमुख और अधिक उपज देने वाली किस्में |
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संकर किस्में (Hybrid) |
CSH-16, CSH-23, CSH-30, CSH-31R, CSH 32, CSH 33 एवं CSH 35 |
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संकुल किस्में (Composite) |
पूसा संकुल-701, पूसा संकुल-1201, वर्षा, CSV-24, CSV-26R, SS, CSV-29R |
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चारे के लिए उत्तम किस्में |
CSV-30F, CSV-32F, CSV-33 MF, पूसा चरी-6, पूसा चरी-9, पूसा चरी-23, हरियाणा चरी-171, SSG-5 एवं पन्नी संकर ज्वार-5 |
पोषक तत्व और खाद प्रबंधन (Fertilizer Management)
ज्वार की फसल से भरपूर उत्पादन लेने के लिए संतुलित मात्रा में खाद देना आवश्यक है। बुआई से 15-20 दिन पहले खेत में 10 टन गोबर की खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिला दें। इसके बाद रासायनिक खादों का प्रयोग इस प्रकार करें:
सिंचित अवस्था (Irrigated Condition)
- नाइट्रोजन: 100-120 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- फास्फोरस: 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- पोटाश: 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
असिंचित/बारानी अवस्था (Unirrigated Condition)
- नाइट्रोजन: 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- फास्फोरस: 30-40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- पोटाश: 30-40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव (Micro-nutrients)
ज्वार में जिंक और आयरन की कमी अक्सर देखी जाती है, जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। इसकी रोकथाम के लिए बुआई के 35-40 दिनों के बाद खेत में:
- 0.2% जिंक घोल और
- 0.15% आयरन घोल का खड़ी फसल पर पर्णीय छिड़काव करें। इससे पौधों का रंग गहरा हरा होता है और बालियां चमकदार व दानेदार बनती हैं।
ज्वार की खेती में अधिक उत्पादन के लिए अपनाएं ये उपाय
- समय पर बुवाई करें।
- प्रमाणित एवं उन्नत किस्मों का चयन करें।
- बीज उपचार अवश्य करें।
- संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें।
- अनुशंसित पौध दूरी बनाए रखें।
- जिंक एवं आयरन की कमी होने पर समय पर पर्णीय छिड़काव करें।
इन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी ज्वार की अच्छी एवं लाभदायक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।