अब किसान प्रशिक्षण के लिए हर जिले में लगाई जाएँगी किसान पाठशाला

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किसानों के प्रशिक्षण के लिए किसान पाठशाला

कृषि कार्यों में सलग्न देश के लगभग 15 करोड़ किसान परिवार है तथा देश की कुल आबादी का 60 प्रतिशत कृषि सम्बंधित कार्यों में लगी हुई है परन्तु देश की अधिकांश आबादी आज भी खेती किसानी के कार्य परंपरागत तरीके से ही कर रही है| जिसके चलते बदलते मौसम तथा जलवायु के अनुसार जानकरी नहीं होने के कारण किसानों को काफी हानि उठानी पड़ रही है | प्रत्येक वर्ष मौसम, रोग तथा कीट से होने वाले नुकसान से किसान की आर्थिक हालत पर असर पड़ता है | समय के अनुसार जानकारी में बदलाव नहीं आने के कारण किसान के उत्पादन पर भी असर देखने को मिलता है |

किसानों को कृषि के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी उपलब्ध हो तथा बदलते परिवेश को समझ सके इसके लिए बिहार राज्य सरकार ने कृषि पाठशाला का आयोजन किया है | कृषि पाठशाला प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित की जाएगी | इसकी पूरी जानकारी किसान समाधान लेकर आया है |

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कृषि पाठशाला कौन से जिलों में होगी आयोजित

बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बताया है कि फसल सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक जिले में खरीफ एवं रबी फसलों में 4–4 अर्थात कुल 304 कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला चलाई जा रही है एवं टाल विकास योजना अन्तर्गत राज्य के 6 जिलों के टाल क्षेत्रों में दलहनी फसलों पर 29 प्रखंडों में 4 – 4  यानि कुल 116 कृषक प्रक्षेत्र पाठशाला चलाई जा रही है |

कृषि पाठशाला में क्या बताया जायेगा ?

माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि फसल की बुआई से लेकर कटाई तक संचालित किए गए नियमित स्तरों के माध्यम से कृषकों का समूह फसल की परिस्थति को देखता है तथा उसकी गतिशीलता के बारे में चर्चा कर्ता है | किसान पाठशाला ऐसे नवाचार किसानों के खेतों में स्थापित किये जाते हैं, जो वैज्ञानिक और संधारणीय कृषि के माध्यम से अपने खेतों में उत्पादकता और लाभ में वास्तव में वृद्धि कर रहे हैं | किसान पाठशाला ज्ञान–प्रबंधन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है |

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किसान पाठशाला में प्रशिक्षण कौन देगा ?

फ़ार्म स्कूल उपलब्धि हासिल करने वाले कृषकों की तकनीकियों एवं नवाचारों का प्रचार–प्रसार फार्म फिल्ड स्कूल की समान प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए किया जाता है | यहाँ सहयोगकर्ता अथवा शिक्षक उपलब्धि प्राप्त करने वाला किसान होगा तथा उसके फार्म में उपयुक्त तकनीकियों / प्रौधोगिकियों का प्रसार किया जाता है |

इस पाठशाला का मुख्य थीम (स्लोगन) है –  “करके सीखो” |

यह खेत-खलिहान में संचालित होने वाला एक ऐसा अनौपचारिक स्कुल है, जहाँ सिखने एवं सिखाने वाले स्वयं प्रगतीशील किसान हो सकते हैं | फार्म विद्यालयों में प्रशिक्षक प्रगतिशील किसान/प्रसार कार्यकर्ता, वैज्ञानिक/ विशेषज्ञ हो सकते है, जो सरकारी अथवा गैर सरकारी क्षेत्र से संबंधित हो |

इस पाठशाला में कितने किसान भाग लेंगे ?

फार्म विद्यालय में 30 की संख्या में विभिन्न गावों के कृषक विधार्थी के रूप में अथवा समूह के द्वारा प्राधिकृत सदस्य रूप में भाग लेगे |

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