राष्ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) को मिली मंजूरी

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राष्ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) को मिली मंजूरी

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 14वें वित्त आयोग (2018-19 तथा 2019-20) की शेष अवधि के दौरान सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसए) के अंतर्गत केन्द्र प्रायोजित राष्ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) को स्वीकृति दे दी है। मिशन सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला बनाकर और उत्पादकों (किसानों) का उद्योग के साथ कारगर संपर्क स्थापित करके बांस क्षेत्र का सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करेगा।

योजना का विवरणः

  • कृषि आय के पूरक के रूप में गैर-वन सरकारी और निजी भूमि में बांस पौधरोपण क्षेत्र में वृद्धि करना और जलवायु परिवर्तन की दिशा में मजबूती से योगदान करना।
  • नवाचारी प्राथमिक प्रोसेसिंग इकाईयों की स्थापना करके, शोधन तथा मौसमी पौधे लगाकर, प्राथमिक शोधन करके संरक्षण प्रौद्योगिकी तथा बाजार अवसंरचना स्थापित करके फसल के बाद के प्रबंधन में सुधार करना।
  • सूक्ष्म, लघु और मझौले स्तरों पर उत्पाद विकास को प्रोत्साहित करना और बड़े उद्योगों की पूर्ति करना।
  • भारत में अविकसित बांस उद्योग का कायाकल्प करना।
  • कौशल विकास, क्षमता सृजन और बांस क्षेत्र के विकास के बारे में जागरूकता को प्रोत्साहित करना।
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कार्यान्वयन, रणनीति और लक्ष्यः

  • बांस क्षेत्र के विकास के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे-
  • मिशन जिन राज्यों में बांस के सामाजिक, वाणिज्यिक और आर्थिक लाभ है वहां बांस के विकास पर फोकस करेगा। वाणिज्यिक और औद्योगिक मांग की बांस प्रजातियों की वंशानुगत श्रेष्ठ पौध सामग्री पर फोकस होगा।
  • प्रारंभ से अंत तक समाधान अपनाया जाएगा, यानी बांस उत्पादकों से लेकर उपभोक्ताओं तक सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला होगी।
  • निर्धारित क्रियान्वयन दायित्वों के साथ मंत्रालयों/विभागों/एजेंसियों के एकीकरण के लिए एक मंच के रूप में मिशन को विकसित किया गया है।
  • कौशल विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों, फील्ड में काम करने वाले लोगों, उद्यमियों तथा किसानों के क्षमता सृजन पर बल दिया जाएगा।
  • बांस उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुसंधान और विकास पर फोकस किया जाएगा।

लाभार्थीः

इस योजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से किसानों, स्थानीय दस्तकारों और बांस क्षेत्र में काम कर रहे अन्य लोगों को लाभ होगा। पौधरोपण के अंतर्गत लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाने का प्रस्ताव किया गया है। इसलिए यह आशा की जाती है कि पौधरोपण को लेकर प्रत्यक्ष रूप से लगभग एक लाख किसान लाभान्वित होंगे।

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कवर किए गए राज्य/जिलेः

मिशन उन सीमित राज्यों में जहां बांस के सामाजिक, वाणिज्यिक और आर्थिक लाभ हैं वहां बांस के विकास पर फोकस करेगा, विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, कर्नाटक, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रेदश, तेलंगाना, गुजरात, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में। आशा है कि यह मिशन 4,000 शोधन/उत्पाद विकास इकाईयां स्थापित करेगा और 1,00,000 हेक्टेयर क्षेत्र पौधरोपण के अंतर्गत लाएगा।

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प्रभावः

बांस पौधरोपण से कृषि उत्पादकता और आय बढ़ेगी और परिणामस्वरूप भूमिहीनों सहित छोटे और मझौले किसानों तथा महिलाओं की आजीविका अवसर में वृद्धि होगी और उद्योग को गुणवत्ता सम्पन्न सामग्री मिलेगी। इस तरह यह मिशन न केवल किसानों की आय बढ़ाने के लिए संभावित उपाय के रूप में काम करेगा, बल्कि जलवायु को सुदृढ़ बनाने और पर्यावरण लाभों में भी योगदान करेगा। मिशन कुशल और अकुशल दोनों क्षेत्र में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन में सहायक होगा।

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