मध्यप्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। 1 जून से 10 अगस्त 2026 तक प्रदेश में सामान्य 571 मिलीमीटर के मुकाबले 483 मिलीमीटर बारिश हुई, जो औसत से करीब 15 प्रतिशत कम है। बारिश की असामान्य स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों सहित आम नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में प्रदेश में कम वर्षा की स्थिति और उससे उत्पन्न परिस्थितियों की समीक्षा की। उन्होंने कम बारिश वाले जिलों पर विशेष ध्यान देने तथा आने वाले दिनों में अधिक बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में भी आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए।
1 जून से 10 अगस्त तक बारिश के आंकड़े
बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 1 जून से 10 अगस्त की समयावधि में सामान्य वर्षा (571 मिमी) की तुलना में औसतन 483 मिलीमीटर वर्षा ही दर्ज की गई है, जो कि सामान्य से 15 प्रतिशत कम है।
- पूर्वी मध्य प्रदेश: 513.20 मिलीमीटर
- पश्चिम मध्य प्रदेश: 459.80 मिलीमीटर
- राज्य की कुल औसत सामान्य वर्षा 949.50 मिमी है। हालांकि, इन सबके बावजूद किसानों की मेहनत से धान की 84 प्रतिशत बोवनी का कार्य पूरा हो चुका है।
किसानों को कम सिंचाई वाली रबी फसलों की सलाह
कम बारिश की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाली रबी फसलों के लिए अभी से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसानों को ऐसी फसलों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करने को कहा है, जिनमें अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से चना फसल के लिए पर्याप्त बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
धान की 84 प्रतिशत बुआई पूरी
बैठक में खरीफ फसलों की बुआई की स्थिति की भी जानकारी दी गई। प्रदेश में अब तक धान की 84 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
फसल नुकसान का होगा पारदर्शी सर्वे
मुख्यमंत्री ने अतिवृष्टि या जलभराव से प्रभावित फसलों का पारदर्शी सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित फसलों की क्षति का आकलन करेंगी और पात्र किसानों को आपदा राहत कोष से मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही किसानों को अधिक से अधिक फसल बीमा योजना से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं।
खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। जहां भी अड़चन सामने आए, वहां विशेष टीम बनाकर समस्या का समाधान किया जाए। साथ ही खाद की कालाबाजारी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिंचाई के समय बिजली आपूर्ति पर भी जोर
कम बारिश की स्थिति में सिंचाई का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने सिंचाई के दौरान किसानों को सुचारू विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने संबंधित विभागों को किसानों और किसान संगठनों के साथ आवश्यक संवाद बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
बांधों में भी औसत से कम जलभराव
बैठक में प्रदेश के जलाशयों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। 10 अगस्त तक प्रदेश के बांधों में करीब 49 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है, जो पिछले पांच वर्षों के औसत 59 प्रतिशत से कम है। वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि में बांधों में जलभराव करीब 75 प्रतिशत था। प्रदेश में:
- 36 जलाशयों में जलभराव 50 प्रतिशत या उससे कम है।
- 18 जलाशयों में जलभराव 50 से 90 प्रतिशत के बीच बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रमुख जल स्रोतों और तालाबों के जलस्तर की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति में भी तैयार रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश की स्थिति की लगातार निगरानी की जाए। राज्य और जिला स्तर पर आपदा कंट्रोल रूम सक्रिय रहें और जलभराव तथा नुकसान से संबंधित सूचनाओं को तत्काल दर्ज किया जाए।
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राहत शिविरों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों में समय रहते चेतावनी जारी करने को कहा गया है।