मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में 10 साल बाद मंडियों का नया वर्गीकरण! 54 मंडियों को मिली पदोन्नति; जानें ‘A’ से ‘D’ ग्रेड की पूरी सूची

MP Mandi News: मध्यप्रदेश में 10 साल बाद 259 कृषि उपज मंडियों का नया वर्गीकरण किया गया है। 54 मंडियों को उच्च श्रेणी में क्रमोन्नत किया गया है। पढ़ें विस्तार से!

MP Mandi Reclassification 2026

प्रदेश में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत किसान कल्याणकारी गतिविधियों को विस्तार देते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना के निर्देशन में मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड ने पूरे 10 वर्षों के अंतराल के बाद राज्य की कृषि उपज मंडी समितियों का नवीन वर्गीकरण (Reclassification) जारी कर दिया है। मंडी बोर्ड के आयुक्त-सह-प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम द्वारा 19 अगस्त 2026 को यह नवीन वर्गीकरण आदेश प्रभावशील किया गया।

नवीन वर्गीकरण के अंतर्गत प्रदेश की 259 मंडी समितियों को चार वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें 47 मंडी समितियां ‘A’ वर्ग, 63 मंडी समितियां ‘B’ वर्ग, 81 मंडी समितियां ‘C’ वर्ग तथा 68 मंडी समितियां ‘D’ वर्ग में रखी गई हैं।

किन आधारों पर तय हुआ मंडियों का नया ग्रेड?

मंडी बोर्ड ने नया वर्गीकरण पिछले तीन वित्तीय वर्षों 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की औसत कृषि उपज आवक और औसत आय के आधार पर किया है। औसत आय की गणना में मंडी शुल्क और लाइसेंस शुल्क से प्राप्त वास्तविक आय को आधार बनाया गया है।

प्रदेश में वर्तमान में 259 कृषि उपज मंडी समितियां और 298 उपमंडियां संचालित हैं। इससे पहले मंडियों का वर्गीकरण वर्ष 2016 में किया गया था। बीते 10 वर्षों में मंडियों की आय, कृषि उपज की आवक और व्यापारिक गतिविधियों में आए बदलाव को देखते हुए अब नए सिरे से ग्रेडिंग की गई है।

A, B, C और D ग्रेड के लिए क्या हैं नए मानक?

नए वर्गीकरण में मंडी की आय के साथ कृषि उपज की औसत आवक को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है।

मंडी वर्ग

नई आय सीमा

कृषि उपज की औसत आवक

A वर्ग

6 करोड़ रुपये से अधिक

2.50 लाख मीट्रिक टन से अधिक

B वर्ग

3 से 6 करोड़ रुपये

1.25 से 2.50 लाख मीट्रिक टन

C वर्ग

1.50 से 3 करोड़ रुपये

0.50 से 1.25 लाख मीट्रिक टन

D वर्ग

1.50 करोड़ रुपये से कम

0.50 लाख मीट्रिक टन से कम

इस वर्गीकरण से ज्यादा आवक और आय वाली मंडियों को उनकी वर्तमान गतिविधियों के अनुरूप श्रेणी में रखने में मदद मिलेगी।

अब कितनी मंडियां किस ग्रेड में?

श्रेणी (Grade)

पूर्व वर्गीकरण (2016) में मंडियों की संख्या

नवीन वर्गीकरण (2026) में मंडियों की संख्या

स्थिति / बदलाव

A

39

47

+8 मंडियां जुड़ीं

B

42

63

+21 मंडियां जुड़ीं

C

56

81

+25 मंडियां जुड़ीं

D

122

68

-54 मंडियां (उच्च ग्रेड में प्रमोट हुई हैं)

कुल

259

259

54 मंडियों का प्रमोशन हुआ

किसानों और मंडी व्यवस्था पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

  1. वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार: उच्च श्रेणी में क्रमोन्नत होने से मंडी समितियों के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि होगी और अधिकारी-कर्मचारियों का प्रशासनिक सेटअप मजबूत होगा।
  2. बेहतर सुविधाएं: मंडियों की आय बढ़ने और ग्रेड में सुधार होने से स्थानीय स्तर पर किसानों के लिए शेड, पेयजल, डिजिटल तुलाई और विश्राम गृह जैसी बुनियादी सुविधाएं सुलभ होंगी।
  3. रोजगार व लाइसेंस विस्तार: मंडी प्रांगणों में हम्माल, तुलावटी और व्यापारियों के लाइसेंसों का सुव्यवस्थित विस्तार होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी।
  4. किसानों के हित में विशेष संरक्षण: सरकार ने स्पष्ट किया है कि नवीन वर्गीकरण लागू होने के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 (31 मार्च 2027 तक) किसी भी मंडी को उसके पूर्व प्रवर्गीकरण से निचले प्रवर्ग में नहीं रखा जाएगा।

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