मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री का कृषि सखियों से संवाद: प्राकृतिक खेती का कमाल, लागत घटी और आमदनी हुई कई गुना ज्यादा

मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ रही है। जीवामृत, बीजामृत और जैविक तकनीकों से लागत घटी, उत्पादन बढ़ा और किसानों को मिला बेहतर मुनाफा।

CM Mohan Yadav Jhabua Natural Farming Krishi Sakhi

मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनती जा रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि झाबुआ जिले में प्राकृतिक खेती के पर्याप्त और अपार अवसर मौजूद हैं। प्राकृतिक खेती न सिर्फ मानवीय सेहत के लिए वरदान है, बल्कि यह किसानों को बेहतरीन आमदनी का नया अवसर भी प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेशभर में कृषि और किसानों के कल्याण के लिए नए द्वार खुले हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ‘कृषि कल्याण वर्ष’ के तहत तमाम योजनाएं चला रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव झाबुआ जिले के थांदला में आयोजित प्रदेश स्तरीय “स्व-सहायता समूहों का क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम” को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने झाबुआ के विभिन्न क्षेत्रों से आईं प्राकृतिक खेती कर रही उन्नतशील कृषि सखियों और प्रगतिशील किसानों से सीधे संवाद किया।

प्राकृतिक खेती से गेहूं उत्पादन और आय में हुई वृद्धि

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम देवीगढ़ (विकासखंड मेघनगर) की उन्नतशील कृषि सखी संगीता डामोर से विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कृषि सखी के रूप में प्राकृतिक खेती का पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण लिया है। वर्तमान में वे अपने गांव और आसपास के करीब 125 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं।

  • प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण: किसानों को बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक आदान (इनपुट) तैयार करने की विधियां सिखाई जा रही हैं।
  • उत्पादन में वृद्धि: कृषि सखी डामोर खुद लगभग एक हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रही हैं। बेहतर फसल प्रबंधन और नवीन तकनीकों के चलते उनके खेत में गेहूं का उत्पादन 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पहुंच गया है, जिससे उनकी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं कृषि सखियों के पास पहुंचकर उनके इन प्रयासों की सराहना की और उन्हें आगामी रक्षाबंधन के त्योहार की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

किसान विमल भाबोर की आय हुई दोगुनी

झाबुआ विकासखंड के ग्राम खेड़ी निवासी प्रगतिशील कृषक विमल भाबोर ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए। श्री भाबोर के पास 25 बीघा कृषि भूमि है और वे खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत उन्होंने अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र (BRC) स्थापित किया है।

  • आर्थिक लाभ का गणित: प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले किसान विमल भाबोर की वार्षिक आय लगभग 50 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 1 लाख से 1.50 लाख रुपये सालाना हो गई है। इसके अलावा, जैव संसाधन केंद्र, नर्सरी, प्राकृतिक सब्जियों-फलों और वर्मी कंपोस्ट खाद के जरिए उन्हें लगातार अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाबोर के इस मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित रखते हुए लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम है।

सरकार का फोकस प्राकृतिक खेती पर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की लागत कम होगी, मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी। उन्होंने सफल किसानों से अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की।

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