मौसम वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 2026 के मानसून को लेकर जारी किए गए पूर्वानुमानों ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एल-नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण इस साल 2026 में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है, और जून के महीने में भी उम्मीद से कम बारिश होने के संकेत हैं।
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने कमर कस ली है। किसानों को इस संकट से उबारने के लिए जल संरक्षण आधारित वैज्ञानिक खेती अपनाने की विशेष सलाह दी जा रही है।
कम बारिश में ‘कतार बोनी’ से मिलेगा लाभ
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कम वर्षा की स्थिति में धान की पारंपरिक बुआई के बजाय सीड ड्रिल से कतार बोनी (Line Sowing) किसानों के लिए सबसे लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है। इस पद्धति के कई वैज्ञानिक फायदे हैं:
- मजबूत जड़ प्रणाली: कतार बोनी में बीज एक निर्धारित गहराई और समान दूरी पर बोए जाते हैं। इससे न सिर्फ अंकुरण बेहतर होता है, बल्कि पौधों की जड़ें भी अधिक गहराई तक विकसित होती हैं।
- सीमित नमी का सही उपयोग: जड़ों का गहरा विकास होने से पौधे मिट्टी में उपलब्ध सीमित नमी का भी प्रभावी ढंग से उपयोग कर पाते हैं, जिससे सूखे जैसी स्थिति में भी फसल सुरक्षित रहती है।
- संसाधनों का संतुलित उपयोग: कतारों में बुआई करने से पौधों के बीच पोषक तत्वों और धूप के लिए प्रतिस्पर्धा कम होती है।
- आसान खरपतवार नियंत्रण: इस विधि से निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण बेहद आसान हो जाता है, जिससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है।
नैनो डीएपी (Nano DAP) से मिलेगा फसलों को पोषण
कम पानी में फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। परंपरागत खाद के मुकाबले नैनो डीएपी में मौजूद फास्फोरस के सूक्ष्म कण पौधों द्वारा बेहद आसानी से अवशोषित कर लिए जाते हैं।
यह तकनीक कम नमी की स्थिति में भी पौधों की जड़ों का विकास तेज करती है और उनकी शुरुआती वृद्धि को बेहतर बनाती है। इसके उपयोग से पोषक तत्वों की बर्बादी रुकती है और पौधों की दक्षता बढ़ती है।
कृषि विभाग की अपील: अपनाएं वैज्ञानिक तरीके
कृषि विभाग ने देश के किसानों से खरीफ 2026 के सीजन में पारंपरिक तरीकों को छोड़कर वैज्ञानिक तकनीकों को प्राथमिकता देने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, इस सीजन में किसानों को निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
- सीड ड्रिल के माध्यम से कतार बोनी करें।
- खेतों की मेड़बंदी कर वर्षा जल का संचयन (Water Harvesting) करें।
- नैनो डीएपी, नैनो यूरिया और जैव उर्वरकों (Bio–fertilizers) का संतुलित उपयोग करें।
विशेषज्ञों के अनुसार जल संरक्षण, उन्नत बुवाई तकनीक और संतुलित पोषण प्रबंधन का संयुक्त उपयोग किसानों को कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन दिला सकता है। खरीफ 2026 में मौसम की चुनौतियों का सामना करने के लिए यही रणनीति किसानों के लिए सबसे प्रभावी उपाय मानी जा रही है।