किसान सलाह

मक्का की बुवाई का सही समय! कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की नई एडवाइजरी, जानें बीज दर, दूरी और खाद की सही मात्रा

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGAU) ने मक्का की वैज्ञानिक खेती के लिए राज्य स्तरीय निर्देशिका जारी की है। जानें सही बीज दर, बुवाई की विधि और खाद का सही गणित।

Makka Buai khad beej ke liye salah

छत्तीसगढ़ के मक्का उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर ने राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी करते हुए किसानों को मौसम के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से मक्का की बुवाई करने की सलाह दी है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश में अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं, इसलिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से तुरंत सीधी बुवाई और कतार बोनी शुरू करने की अपील की है। समय पर वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से मक्का की फसल में बेहतर अंकुरण, अधिक उत्पादन और खेती की लागत में कमी लाई जा सकती है।

प्रति हेक्टेयर मक्का का कितना बीज डालें ?

भरपूर फसल के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है सही मात्रा में उन्नत बीजों का चयन। वैज्ञानिकों ने मक्का की किस्मों के आधार पर निम्नलिखित बीज दर की अनुशंसा की है:

  • संकर किस्में (Hybrid Varieties): 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
  • संयुक्त/संकुल किस्में (Composite Varieties): 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।

मक्का बुवाई की विधि और पौधों के बीच सही दूरी

फसल के बेहतर प्रबंधन और हवाधूप के सही आवागमन के लिए मक्का की बुवाई हमेशा कतारों (पंक्तियों) में ही की जानी चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिकों ने दूरी का एक खास गणित साझा किया है:

  • सामान्य किस्मों के लिए: कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखना अनिवार्य है।
  • मध्यम एवं देर से पकने वाली विशेष किस्मों के लिए: वैज्ञानिकों ने 75 × 25 सेंटीमीटर (कतार से कतार 75 सेमी और पौधे से पौधे 25 सेमी) के अंतर पर बुवाई करने का निर्देश दिया है।

मक्का फसल में कितना खाद डालें?

भूमि की सेहत बनाए रखने और पौधों के समुचित पोषण के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने संतुलित खाद की मात्रा निर्धारित की है। मक्का की फसल से अधिकतम उत्पादन लेने के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर इतनी मात्रा का प्रयोग करना चाहिए:

पोषक तत्व

निर्धारित मात्रा (प्रति हेक्टेयर)

नत्रजन (नाइट्रोजन)

80 से 120 किलोग्राम

स्फुर (फास्फोरस)

50 से 75 किलोग्राम

पोटाश

30 से 50 किलोग्राम

विश्वविद्यालय की अपील: समय पर सही बुवाई, बेहतर उत्पादन हमारी जिम्मेदारी के संदेश के साथ विश्वविद्यालय ने प्रदेश के समस्त किसानों से इस वैज्ञानिक मार्गदर्शन और मौसम आधारित सलाह को अनिवार्य रूप से अपनाने का आग्रह किया है। छत्तीसगढ़ के किसान भाई जल्द से जल्द अपने खेतों की तैयारी पूरी कर कतार बोनी शुरू करें और इस सीजन में मक्का की खेती से बम्पर मुनाफा कमाएं।

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