पारंपरिक खेती से हटकर प्राकृतिक और जैविक खेती (Organic Farming) आज देश के अन्नदाताओं की किस्मत बदल रही है। सरकार के मुताबिक मध्यप्रदेश देश में 27 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी के साथ जैविक खेती में पहले स्थान पर है। वहीं, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अब तक 1,513 क्लस्टर बनाए जा चुके हैं, जिनसे 1.89 लाख किसानों को जोड़ा गया है। खरगौन में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से ऑनलाइन संवाद करते हुए प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्राकृतिक खेती के लिए 900 रुपए प्रतिमाह अनुदान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने देशी गोपालन करने वाले किसानों के लिए 900 रुपए प्रति माह अनुदान का प्रावधान किया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना, रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।
54 एकड़ में जैविक खेती, 13 राज्यों में पहुंच रहे उत्पाद
राज्य के प्रगतिशील किसानों की सफलता इसकी मिसाल है। कई वर्षों से जैविक खेती कर रहे विशेषज्ञ अविनाश दांगी के पास 54 एकड़ खेत है, जिसमें वे पूरी तरह से जैविक खेती करते हैं। उनके खेत पर करीब 40 गोवंश हैं और उनका पूरा 8 सदस्यीय परिवार इस खेती में जुटा हुआ है।
- अविनाश दांगी अपने खेतों में हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी प्रमुख मसाला फसलें उगा रहे हैं।
- उनके उत्पाद आज देश के 13 अलग-अलग राज्यों में सप्लाई हो रहे हैं।
- उनका मानना है कि सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले छोटे किसानों की भरपूर मदद कर रही है। रासायनिक उर्वरकों (फर्टिलाइजर) पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ जैविक किसानों को भी सीधे तौर पर मिलना चाहिए, क्योंकि वे इनका उपयोग नहीं करते।
सफेद मूसली की खेती से बेटे को अमेरिका भेजा पढ़ाने
खरगौन क्षेत्र के एक अन्य सफल किसान अनिल वर्मा सफेद मूसली, पपीता, प्याज और सोयाबीन की खेती कर रहे हैं। सरकारी नीतियों और अपने कड़े परिश्रम के दम पर उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की है।
- अनिल वर्मा बताते हैं कि सफेद मूसली की खेती से उन्होंने अपने बेटे प्रीतेश को अमेरिका पढ़ने भेजा, जो वर्तमान में ओहियो विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स करने के बाद उसी कॉलेज में पढ़ा भी रहे हैं।
- क्षेत्र में आज करीब 1,500 एकड़ भूमि पर 1,000 से अधिक किसान सफेद मूसली की खेती कर रहे हैं, जिससे किसानों को सालभर में 5 से 7 लाख रुपए तक का मुनाफा हो रहा है।
मशीन पर मिली 35% सब्सिडी
किसान अनिल वर्मा ने बताया कि पहले सफेद मूसली के छिलके हाथ से निकालने पड़ते थे, जिससे मजदूरी का खर्च अधिक आता था। अब केंद्र सरकार से 35 प्रतिशत सब्सिडी मिलने के बाद छिलके निकालने वाली मशीन खरीदी गई है। इससे श्रम लागत कम हुई है और क्षेत्र के 50 से 60 किसान इस मशीन का उपयोग कर रहे हैं।
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों ने कहा कि राज्य सरकार की कृषि नीतियों से खेती को नई दिशा मिली है। आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती के संयोजन से उत्पादन, गुणवत्ता और आय में सुधार देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों से ऑनलाइन संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने का आह्वान किया