मध्य प्रदेश

एमपी बनेगा ‘मिल्क कैपिटल’: 12 लाख किलो रोज पहुंचा दूध संग्रह, अब 26 हजार समितियां बनाने का लक्ष्य

मध्यप्रदेश को अगले 5 वर्षों में मिल्क कैपिटल बनाने का लक्ष्य है। दूध संग्रह बढ़कर करीब 12 लाख किलो प्रतिदिन पहुंचा, जबकि 26 हजार दुग्ध सहकारी समितियां बनाने की तैयारी है।

MP Milk Capital Rise in Milk Production and Collection

मध्यप्रदेश सरकार ने अगले पांच वर्षों में प्रदेश को मिल्क कैपिटल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। प्रदेश में दैनिक दुग्ध संकलन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में दूध का दैनिक संकलन 8.73 लाख किलोग्राम से बढ़कर जुलाई 2026 में करीब 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन पहुंच गया है।

सरकार ने दुग्ध उत्पादन और संगठित विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 26 हजार दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इसके साथ ही उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने, कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स सॉर्टेड सीमेन और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या लगभग दोगुनी

21वीं पशु संगणना के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 20वीं पशु संगणना की तुलना में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

प्रदेश में नस्ल सुधार के साथ प्रति पशु दूध उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देशी एवं गैर-प्रमाणित मवेशियों की उत्पादकता वर्ष 2014-15 में 927 किलोग्राम प्रति पशु प्रतिवर्ष थी, जो 2024-25 में बढ़कर 1,343.2 किलोग्राम हो गई।

इसी अवधि में भैंसों की उत्पादकता 1,880 किलोग्राम से बढ़कर 2,365.2 किलोग्राम और गाय के दूध की औसत उत्पादकता 1,648 किलोग्राम से बढ़कर 2,251 किलोग्राम प्रति पशु प्रतिवर्ष हो गई है।

मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति 707 ग्राम दूध की उपलब्धता

बेहतर पोषण, नस्ल सुधार, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक पशुपालन के चलते मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में भी वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 550 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 707 ग्राम प्रतिदिन हो गई है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम प्रतिदिन है। यानी मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।

इन योजनाओं से बढ़ाए जा रहे उन्नत नस्ल के पशु

प्रदेश सरकार पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशुओं से जोड़ने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। इनमें मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शामिल हैं।

इन योजनाओं के माध्यम से उन्नत नस्ल के पशुओं के प्रजनन और प्रसार को बढ़ावा दिया जा रहा है। लाभार्थी अन्य राज्यों से भी बेहतर नस्ल के पशु मध्यप्रदेश में ला रहे हैं।

18 लाख परिवारों तक पहुंचा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान

दूध की उत्पादकता केवल नस्ल सुधार से ही नहीं, बल्कि पशुओं के बेहतर पोषण और प्रबंधन से भी बढ़ाई जा रही है। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के माध्यम से लगभग 18 लाख परिवारों से संपर्क किया गया है।

वहीं गोरस ऐप के जरिए पशुपालकों को संतुलित पशु आहार और बेहतर पोषण की जानकारी दी जा रही है। साइलेज के उत्पादन और उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत साइलेज उत्पादन से जुड़े नए प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं।

सेक्स सॉर्टेड सीमेन से करीब 90% बछिया पैदा होने की संभावना

मध्यप्रदेश में नस्ल सुधार के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इस तकनीक से लगभग 90 प्रतिशत बछिया पैदा होने की संभावना रहती है।

वर्तमान में प्रदेश में होने वाले कुल कृत्रिम गर्भाधान में लगभग 20 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान सेक्स सॉर्टेड सीमेन के जरिए किए जा रहे हैं। भोपाल स्थित केंद्रीय वीर्य केंद्र में गिर, साहीवाल, थारपारकर और मुर्रा जैसी उन्नत नस्लों के वीर्य का उत्पादन किया जा रहा है। फिलहाल करीब 5 लाख डोज प्रतिवर्ष तैयार किए जा रहे हैं और आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य है।

47.50 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य

नस्ल सुधार को और गति देने के लिए हिरण्यगर्भा अभियान के तहत चालू वित्त वर्ष में 47.50 लाख कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष प्रदेश में लगभग 28 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए थे। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 10.5 लाख से अधिक कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं। आगामी पांच वर्षों में कृत्रिम गर्भाधान का कवरेज 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

दुग्ध संकलन में वृद्धि, उन्नत नस्लों के विस्तार, सेक्स सॉर्टेड सीमेन, वैज्ञानिक पशुपालन और सहकारी नेटवर्क के विस्तार के जरिए सरकार अब मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में काम कर रही है।

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