खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही राजनांदगांव और इसके आसपास के क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करने और सही प्रबंधन का है। यदि किसान इस समय कुछ वैज्ञानिक तौर-तरीके अपनाते हैं, तो न केवल उनकी लागत कम होगी बल्कि बंपर पैदावार भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
15 मई से जून अंत तक करें ‘हरी खाद’ की बुवाई; यूरिया का खर्च होगा आधा
जिले और निकटवर्ती क्षेत्रों में मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए मूंग, ढैंचा या सनई (हरी खाद) की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय 15 मई से जून के अंत तक माना जाता है। खरीफ की मुख्य फसल (जैसे धान) की बुवाई या रोपाई से लगभग 45-50 दिन पहले इसे बोना चाहिए।
मिट्टी में दबाने का सही तरीका: जब हरी खाद की फसल 35 से 40 दिन की हो जाए और उसमें फूल आने शुरू हो जाएं, तब इसे रोटावेटर या हल की मदद से मिट्टी में दबा दें। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन और जैविक कार्बन की मात्रा तेजी से बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों (जैसे यूरिया) पर निर्भरता बेहद कम हो जाती है।
गहरी जुताई और धान की सीधी बुवाई का सही समय
- सोलराइजेशन (धूप से उपचार): किसान खेतों की गहरी जुताई के लिए मिट्टी पलट हल (MB Plough) का प्रयोग करें और खेत को पॉलिथीन से ढंक दें। तेज धूप से खरपतवार, मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियां और कीड़ों के अंडे अपने आप नष्ट हो जाएंगे।
- धान की सीधी बुवाई: धान की सीधी बुवाई का उचित समय मानसून आने से पहले मई के अंतिम सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह तक है।
- मृदा जांच: रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों से बचने के लिए किसान सबसे पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच (Soil Test) करवाएं और रिपोर्ट के आधार पर ही संतुलित मात्रा में उर्वरक डालें।
खरीफ 2026: उन्नत किस्म के बीजों की लिस्ट
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुवाई से पहले ही उन्नत और प्रमाणित बीजों की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें:
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फसल |
उन्नत किस्में (Recommended Varieties) |
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धान |
इंद्रावती धान, एमटीयू 1153, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान 1919 |
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सोयाबीन |
आरएससी-10-46, आरएससी-11-15, आरएससी-11-07 |
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अरहर |
छत्तीसगढ़ अरहर 1, छत्तीसगढ़ अरहर 2, राजीवलोचन |
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मक्का |
पूसा हाइब्रिड 1, विवेक मक्का संकर 51, सीजी अगेती संकर मक्का-1 |
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मूंग |
पीकेवीएकेएम-4, मालवीय ज्योति, शिखा |
फल उद्यान (बागवानी) और सब्जियों की खेती के लिए टिप्स
नए बगीचे लगाने के इच्छुक किसान अभी से 1×1×1 मीटर का गड्ढा तैयार कर उसे धूप में खुला छोड़ दें।
- फलों का चयन: आम के लिए दशहरी, लंगड़ा, छत्तीसगढ़ नंदीराज और अमरूद के लिए इलाहाबाद सफेदा व लखनऊ-49 जैसी उन्नत किस्मों के पौधे लाएं।
- केला और पपीता: यदि ड्रिप (टपक) सिंचाई है, तो रोज शाम को 1 घंटा पानी दें। बाढ़ (Flood) पद्धति से हर 3-4 दिन में सिंचाई करें। पपीता की पूसा नन्हा या पूसा ड्वार्फ किस्म को पहले पॉलीबैग में लगाएं, ताकि मानसून आते ही मुख्य खेत में रोपा जा सके।
- कीट प्रबंधन: भिंडी और भटे (बैंगन) को फल बेधक कीट से बचाने के लिए प्रति एकड़ 10 फिरोमेन ट्रैप (Pheromone Trap) लगाएं और प्रभावित हिस्से को तोड़कर नष्ट कर दें।
गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं का ऐसे रखें ख्याल
बढ़ते तापमान को देखते हुए पशुपालकों को मवेशियों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई है:
- पानी और नमक: पशुओं को दिन में 4-5 बार ताजा पानी पिलाएं और प्रति पशु प्रतिदिन 50-60 ग्राम नमक जरूर खिलाएं।
- चारा प्रबंधन: बेहतर दूध उत्पादन के लिए रोजाना 25 से 30 किलो हरा चारा दें। हरे और सूखे चारे का अनुपात 3:1 होना चाहिए। साथ ही चारे में 25-30 ग्राम मिनरल मिक्सचर मिलाएं।
- बाड़े का तापमान: पशु बाड़े को हवादार बनाएं और चारों तरफ गीले बारदाने (बोरे) लटकाकर रखें ताकि अंदर ठंडक बनी रहे।