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काला नमक चावल की खेती से चमकी किसानों की किस्मत: 40 रुपए से बढ़कर 150 रुपए किलो पहुंचा भाव, उत्पादन में 5 गुना उछाल

सिद्धार्थनगर में काला नमक चावल का उत्पादन 5 गुना बढ़ा! ₹40 से बढ़कर ₹150/किग्रा हुआ दाम। जानिए कैसे "बुद्धा राइस" की खेती से किसानों का मुनाफा तीन गुना हुआ और कैसे सरकार इसे ग्लोबल ब्रांड बना रही है।

Kala Namak Chawal Farming Price and production

काला नमक चावल की खेती उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बनती जा रही है। सिद्धार्थनगर जिले में काला नमक चावल (Kalanamak Rice) के उत्पादन और खेती करने वाले किसानों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2025 के बीच काला नमक चावल का उत्पादन पांच गुना से अधिक बढ़ा है।

लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी द्वारा दिए गए एक लिखित उत्तर में यह जानकारी सामने आई है कि पारंपरिक खेती की तुलना में यह विशेष चावल किसानों के लिए अत्यधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है।

उत्पादन और कीमतों में जबरदस्त उछाल

काला नमक चावल की लोकप्रियता देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से बढ़ रही है:

  • उत्पादन में वृद्धि: सिद्धार्थनगर जिले में इसका उत्पादन वर्ष 2018 से 2025 के बीच पांच गुना से अधिक बढ़ गया है। खेती से जुड़ने वाले किसानों की संख्या भी वर्ष 2018 के 2,915 से बढ़कर वर्ष 2024 में 23,000 पहुंच गई है।
  • कीमतों में भारी बढ़ोतरी: वर्ष 2018 में जो काला नमक चावल 40 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता था, वह वर्ष 2026 में बढ़कर 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। इससे सामान्य धान की तुलना में किसानों की लाभप्रदता तीन गुना से अधिक बढ़ गई है।

काला नमक चावल की प्रोसेसिंग पर भारी सब्सिडी

काला नमक चावल की प्रोसेसिंग और मिलिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) तथा राज्य की एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) मार्जिन मनी योजना के तहत सहायता उपलब्ध है।

इन योजनाओं के तहत काला नमक धान की प्रोसेसिंग या मिलिंग इकाई स्थापित करने वाली पात्र व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाइयों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपए तक मिल सकती है।

सिद्धार्थनगर में काला नमक चावल के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) भी स्थापित किया गया है। यहां किसानों को आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

काला नमक चावल की नई उन्नत किस्में विकसित

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली काला नमक चावल की किस्मों के विकास और पारंपरिक लैंडरेस किस्मों के संरक्षण पर भी काम कर रही है।

काला नमक की कई उन्नत किस्में खेती के लिए जारी और अधिसूचित की गई हैं। इनमें काला नमक KN3, बौना काला नमक 101, बौना काला नमक 102, काला नमक किरण, पूसा नरेन्द्र काला नमक 1 और पूसा सीआरडी काला नमक 2 शामिल हैं। विशेष रूप से बाद की दो बौनी उच्च उपज वाली किस्मों की औसत उपज करीब 4.5 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है, जबकि पारंपरिक किस्मों की औसत उपज करीब 2.5 टन प्रति हेक्टेयर है।

काला नमक चावल की खेती को मिलेगा बीज और तकनीकी सहयोग

काला नमक धान का क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रजनक बीज कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त बीज की मांग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मांगकर्ता एजेंसियों द्वारा आधार और प्रमाणित बीजों के आगे गुणनीकरण के लिए हर साल करीब 15 से 20 क्विंटल प्रजनक बीज का उत्पादन किया जाता है।

वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच काला नमक धान की किस्मों का कुल 389.6 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादित कर किसानों को वितरित किया गया।

विदेशों में भी बढ़ रही काला नमक चावल की मांग

काला नमक चावल को अब घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। APEDA के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके चलते सिंगापुर और नेपाल जैसे बाजारों में काला नमक चावल के निर्यात का रास्ता खुला है। इसे ‘बुद्धा राइस’ के नाम से भी ब्रांड किया जा रहा है, जिससे जापान, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और म्यांमार जैसे बाजारों में इसकी पहचान और मांग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

सिद्धार्थनगर और आसपास के तराई क्षेत्रों को विशेष चावल के लिए APEDA के एग्री-एक्सपोर्ट जोन के ढांचे से भी जोड़ा गया है। इससे निर्यात के लिए पैकेजिंग, अवशेष जांच और क्वारंटीन नियमों के अनुपालन जैसी सुविधाओं में सहायता मिलने की उम्मीद है।

काला नमक चावल किसानों के लिए क्यों है खास?

काला नमक चावल की बढ़ती कीमत, बेहतर बाजार, सरकारी योजनाओं से सहायता और निर्यात की संभावनाएं इसे किसानों के लिए आकर्षक फसल बना रही हैं। साथ ही इसकी पारंपरिक पहचान और विशेष बाजार मांग किसानों को सामान्य धान के मुकाबले बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर देती है।

सरकार की ओर से वित्तीय सहायता, उन्नत बीज, तकनीकी प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात पर एक साथ काम किया जा रहा है। इससे काला नमक चावल की खेती का दायरा बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

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