कम जमीन वाले किसान भी खेती के साथ मछली पालन, पोल्ट्री, बतख पालन, सब्जियों और फलदार पौधों को जोड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना में आयोजित ‘कृषि जन कल्याण संवाद’ में छोटे किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को आय बढ़ाने का व्यावहारिक तरीका बताया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इस दौरान उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रदर्शन मॉडल और बिहार के सफल किसानों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे 2 से 3 बीघा जैसे छोटे खेत में भी खेती के कई काम एक साथ जोड़कर सालभर आमदनी का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
2-3 बीघा मॉडल से 2 लाख रुपए सालाना कमाई का फॉर्मूला
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी परिसर में लागू सफल इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कम ज़मीन में भी स्थिर आय संभव है:
- चार हिस्सों में फसल चक्र: 2-3 बीघे के मॉडल में धान के बाद खेत को 4 हिस्सों में बाँटकर गेहूँ, चना, सरसों और मक्का जैसी फसलें लगाई जाती हैं।
- एग्रो-अलाइड गतिविधियां: खेत के साथ भू-तालाब में मछली पालन, पोल्ट्री यूनिट, बतख पालन, बेल वाली सब्जियाँ, फलदार पेड़ और चारा उत्पादन को जोड़ा जाता है।
- सालभर स्थिर आमदनी: इस समेकित मॉडल से किसान परिवार को हर महीने आय मिलती रहती है, जिससे कई परिवारों की सालाना कमाई ₹2 लाख तक पहुँच रही है।
रसायन-मुक्त खेती और जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग पर ज़ोर
शिवराज सिंह चौहान ने केमिकल-खादों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई और किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी:
- ट्रायल फार्मिंग: किसान पहले अपनी कुल ज़मीन के एक छोटे हिस्से पर प्राकृतिक खेती आजमाकर देखें, फिर बड़े पैमाने पर लागू करें।
- ब्रांडिंग और मार्केटिंग: केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बिहार के किसानों के जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग व मार्केटिंग करेंगी ताकि उन्हें बेहतर बाज़ार मूल्य मिल सके।
किसानों से सीधे सुनीं समस्याएं
‘कृषि जन कल्याण संवाद’ के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों के साथ सीधे बातचीत की और खेती से जुड़ी उनकी समस्याओं एवं सुझावों की जानकारी ली।
उन्होंने प्रगतिशील किसान रामजीत शर्मा, रामकुमार विनय, सुशीला देवी और सुधांशु के अनुभवों की सराहना की और कहा कि किसानों से मिले सुझावों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के बीच जाकर उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना महत्वपूर्ण है। उन्होंने खेतों में किसानों के साथ समय बिताने के अपने अनुभव भी साझा किए।