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मंगलवार, जून 25, 2024
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धान खरीद पर सरकार देगी 117 रुपए प्रति क्विंटल बोनस, अब किसानों को धान का मिलेगा यह भाव

धान की सरकारी खरीद पर बोनस

देश में धान खरीफ सीजन की सबसे मुख्य फसल है, देश में कई किसान धान की खेती पर ही निर्भर है। ऐसे में किसानों को धान का उचित एवं लाभकारी मूल्य मिल सके इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रतिवर्ष धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP जारी किया जाता है। वहीं कई राज्य सरकारों के द्वारा धान के समर्थन मूल्य के अलावा अलग से बोनस भी दिया जाने लगा है। इस कड़ी में झारखंड सरकार ने राज्य में किसानों को धान की खरीद पर 117 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस देने का फैसला लिया है।

सरकार के इस फैसले से किसानों को केंद्र सरकार द्वारा धान पर मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP के अतिरिक्त झारखंड सरकार बोनस के रूप में 117 रुपये का भुगतान करेगी। किसानों को यह बोनस खरीफ फ़सल 2023-24 के लिए दिया जाएगा। राज्य कैबिनेट की 7 दिसंबर गुरुवार को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को पास कर दिया गया है।

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अब किसानों को धान का यह भाव मिलेगा

इस वर्ष केंद्र सरकार की ओर से साधारण धान के लिए 2183 रुपए प्रति क्विंटल एवं ग्रेडए धान के लिये 2203 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य निर्धारित किया गया है। इस राशि के अतिरिक्त राज्य सरकार किसानों को 117 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बोनस देगी। यानी अब किसानों को सामान्य धान अधिप्राप्ति के लिये कुल 2300 रुपए प्रति क्विंटल मिलेंगे। इसके अतिरिक्त सरकार राइस मिलरों को 60 रुपए प्रति क्विंटल की दर से इंसेंटिव का भी भुगतान करेगी। सरकार योजना के तहत कुल 70.20 करोड़ रुपए खर्च करेगी। अभी हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 27 प्रस्ताव पास किए गए हैं।

इस वर्ष सरकार कितनी धान ख़रीदेगी?

कैबिनेट सचिव वंदना दालेल ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने राज्य में इस वर्ष 6 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। उसमें 2.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना और 3.70 मीट्रिक टन धान की खरीद केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लिये की जाएगी। इसके साथ ही कैबिनेट ने झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना की स्वीकृति से संबंधित संशोधन को भी मंजूरी दे दी है। कस्टम मिल्ड राइस नहीं मिलने की स्थिति में पूर्व की तरह ही चावल की प्राप्ति की जाएगी। बता दें कि अभी चावल की प्राप्ति भारतीय खाद्य निगम या किसी राज्य के खाद्य निगम के माध्यम से किया जाता था।

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